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हरेली से होगी गोबर खरीदी, पेमेंट कैसे, इसका फैसला कैबिनेट में

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में वरिष्ठ अफसरों की बैठक

हरेली से होगी गोबर खरीदी, पेमेंट कैसे, इसका फैसला कैबिनेट में
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रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में होने वाली राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक गोधन न्याय योजना पर अहम निर्णय लिए जा सकते हैं। दरअसल इस योजना को लेकर मंत्रियों की उपसमिति अपना अभिमत दे चुकी है। दूसरी ओर मुख्य सचिव आरपी मंडल की अध्यक्षता में मंगलवार को कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक हुई। इस बैठक में गोबर खरीदी संबंधी प्रक्रिया के निर्धारण पर बातचीत हुई। इस संबंध में भी तैयार रिपोर्ट कैबिनेट में रखी जाएगी, लेकिन इससे पहले ये साफ है कि हरेली के दिन से गोबर खरीदी होगी। पशुपालकों को उसका भुगतान किस प्रक्रिया के तहत होगा, यह फैसला भी कैबिनेट में होगा।

कई विभाग मिलकर करेंगे काम

गोधन न्याय योजना में सरकार के कई विभाग मिलकर काम करेंगे। इसे लेकर मुख्य सचिव ने कृषि, पशुपालन, ग्रामीण विकास, वन विभाग सहित अन्य विभागीय अधिकारियों को समन्वय और सहभागिता से एकजुट होकर कार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायत के सीईओ, वन मंडलाधिकारी, नगरीय निकाय के अधिकारी, उप संचालक कृषि एवं पशुपालन को टीम भावना के साथ कार्य करने कहा है।

सीएस की बैठक में जुटे वरिष्ठ अफसर

मुख्य सचिव आरपी मण्डल की अध्यक्षता में मंगलवार को गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन, योजना की रूपरेखा, योजना के आय-व्यय के बारे में विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव अमिताभ जैन तथा मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी शामिल हुए। इस दौरान श्री मण्डल ने कहा कि योजना की शुरुआत हरेली त्योहार के दिन से की जा रही है। छत्तीसगढ़ में गोधन के संरक्षण, संवर्धन तथा जैविक खाद को बढ़ावा देने के लिए योजना बनी है। इसके तहत पशुपालकों से गोबर खरीदा जाएगा।

कृषि विभाग ने दिया प्रेजेंटेशन

कृषि विभाग की सचिव तथा कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता ने बैठक के दौरान कृषि विभाग की ओर से प्रेजेंटेशन दिया। इसका फोकस योजना के क्रियान्वयन के तौर-तरीकों पर आधारित था। प्रेजेंटेशन में बताया गया है कि किस तरह योजना के तहत प्रक्रिया का निर्धारण किया जाएगा। गोठान समितियों, स्व-सहायता समूहों तथा नोडल अधिकारियों को किस प्रकार प्रशिक्षण दिया जाएगा। बताया गया है कि हरेली के दिन से गोबर खरीदी तो शुरू होगी, लेकिन उसके भुगतान की प्रक्रिया कैबिनेट में तय होगी। गोबर खरीदी के बाद भी वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने में भी 60 से 90 दिन लगेंगे। बैठक में ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी, वन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ, नगरीय प्रशासन विकास विभाग की सचिव अलरमेल मंगई डी. सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

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