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किसने और क्यों दी ऐसी परिभाषा : तालाबों की दीवार तोड़ना, मरम्मत और पोताई करना- इज इक्वल टू स्मार्ट सिटी

जिस सरकार के पास बिजली बिल पटाने का पैसा नहीं है... वह विकास कार्य क्या करेगी। वह सरकार तो केवल भाजपा के समय स्वीकृत और शुरू हुए कामों का उद्घाटन भर कर रहे हैं। किसने और किस मसले पर ऐसा कहा, पढ़िए...

किसने और क्यों दी ऐसी परिभाषा : तालाबों की दीवार तोड़ना, मरम्मत और पोताई करना- इज इक्वल टू स्मार्ट सिटी
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रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा है कि 10 दिन पहले पूरे प्रदेश में अंधेरा छा गया था। स्थानीय संस्थाओं के ग्राम पंचायत और नगरीय निकायों के बिजली काट दिए गए थे। जिस सरकार के पास बिजली बिल पटाने का पैसा नहीं है... वह विकास कार्य क्या करेगी। वह सरकार तो केवल भाजपा के समय स्वीकृत और शुरू हुए कामों का उद्घाटन भर कर रहे हैं। श्री चंद्राकर ने कहा है कि बस कर और कर्ज ले रहे हैं। कांग्रेस के लंबे-लंबे दावों की पोल खुल जाएगी... उन्होंने कहा कि जानते हैं, स्मार्ट सिटी का मतलब इनके लिए क्या है- तालाब बनाना, तोड़ना, फिर मरम्मत करना, दीवार पोतना इज इक्वल टू स्मार्ट सिटी। हरिभूमि के सहयोगी न्यूज चेनल आईएनएच न्यूज़ पर पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि जो छत्तीसगढ़ के नेता बयान दे रहे हैं, प्रधानमंत्री मोदी को लेकर उनको सोनिया गांधी के बयान को पढ़ लेना चाहिए। 70 विधायकों के बहुमत ने कांग्रेसियों के दिमाग को पागल कर दिया है। राजनैतिक लूट खसोट, माफियाओं को संरक्षण देना यह कांग्रेस का एजेंडा है। प्रधानमंत्री जी का वक्तव्य यहां के कांग्रेसियों को आंख दिखाने वाला है। इसके साथ ही राज्य में हाल ही में संपन्न निकाय चुनावों को लेकर भी श्री चंद्राकर ने राज्य सरकार को आड़े हाथ लिया। श्री चंद्राकर बोले बिरगांव चुनाव में गाजी नगर का फर्जी मतदाता सूची वाला मुद्दा हमेशा जिंदा रहेगा। जब बीजेपी की सरकार थी तो सीधी प्रणाली से चुनाव होते थे, ईवीएम से वोटिंग होती थी। जैसे ही कांग्रेस चुनाव हारती है ईवीएम पर सवाल खड़े कर देती है। तमिलनाडु या पश्चिम बंगाल में ईवीएम पर कोई भी प्रश्न खड़ा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस पद्धति को भूपेश बघेल ने अपनाया है, अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली, अर्थात संस्था में कब्जा करने के लिए धनबल का उपयोग। कांग्रेस पार्षदों को खरीदी बिक्री की वस्तु समझती है, यह छत्तीसगढ़ के जनादेश का अपमान है।

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