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फरियाद लेकर कहाँ जाएं..., कहीं प्रभारी नहीं, जहां हैं वहां ज्यादातर वक्त लॉ एंड ऑर्डर की ड्यूटी

अंधेरे में डूबे कमरों और धूल खाती कुर्सियों के बीच पुलिस ने आमजनों के लिए संवेदना प्रकट करने के इंतजाम किए हैं। वीरान और खामोश कमरों के बीच असल जरूरतमंदों को राहत पहुंचाने के खोखले दावे किए जा रहे हैं। ऐसा नजारा तब सामने आया है, जब प्रदेश में खुद डीजीपी डीएम अवस्थी ने शहरों में आदर्श थाना बनाने का ऐलान किया है। प्रदेश की राजधानी में महिला सुरक्षा को दुरुस्त करने महिला हेल्पडेस्क और फिर निशक्तजन सीनियर सिटीजन के लिए बने मदद काउंटर नाममात्र के ही रह गए हैं। ज्यादातर थाने बल कम होने अपना दुखड़ा रो रहे, वहीं कई थानों में स्टाफ रहकर भी काउंटर से दूरियां आम हैं।

यूपी पुलिस ने मजबूर पिता से कहा, हमारे पास तुम्हारे बेटे को ढूंढ़ने का वक्त नहीं
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यूपी पुलिस ने मजबूर पिता से कहा, हमारे पास तुम्हारे बेटे को ढूंढ़ने का वक्त नहीं

रायपुर. अंधेरे में डूबे कमरों और धूल खाती कुर्सियों के बीच पुलिस ने आमजनों के लिए संवेदना प्रकट करने के इंतजाम किए हैं। वीरान और खामोश कमरों के बीच असल जरूरतमंदों को राहत पहुंचाने के खोखले दावे किए जा रहे हैं। ऐसा नजारा तब सामने आया है, जब प्रदेश में खुद डीजीपी डीएम अवस्थी ने शहरों में आदर्श थाना बनाने का ऐलान किया है। प्रदेश की राजधानी में महिला सुरक्षा को दुरुस्त करने महिला हेल्पडेस्क और फिर निशक्तजन सीनियर सिटीजन के लिए बने मदद काउंटर नाममात्र के ही रह गए हैं। ज्यादातर थाने बल कम होने अपना दुखड़ा रो रहे, वहीं कई थानों में स्टाफ रहकर भी काउंटर से दूरियां आम हैं।

शनिवार को हरिभूमि की पड़ताल में यह नजारा सामने आया। थानों में बाहर से चकाचक दिखने वाले संवेदना केंद्रों की बदहाली कैमरे में कैद हुई। हेल्पडेस्क बनाए गए थाने में महिला अपनी मिन्नत सुनाने भटकती नजर आई। आमानाका पहले इंटीग्रेटेड थाने में भी हेल्पडेस्क ने दम तोड़ दिया। बिना किसी कर्मचारी के यहां अभी भी हेल्पडेस्क का काउंटर संभाला जा रहा है। जबकि इंटीग्रेटेड थाना बनाते वक्त पुलिस ने दावा किया था कि फरियादी के थाना आने के बाद रिसेप्शन में उन्हें बिठाया जाएगा। वे बिना किसी झिझक के अपनी बात रखेंगे, लेकिन बिना कर्मचारी के यह दावा भी खोखला साबित हुआ।थानों में किए थे इंतजामथानों में आम लोगों के साथ महिलाओं की फरियाद सुनने विशेष कक्ष निर्माण और जनसुविधा केंद्र के नाम पर थानों में अलग-अलग खर्च किया गया है। ढाई से पांच लाख रुपए तक के बजट में कक्ष निर्माण-वॉल पेंटिंग के साथ तमाम तरह के इंतजाम किए गए।जर्जर हालत में महिला थाना, बारिश में आफतमहिला थाना बिल्डिंग जर्जर हालत में है। अब यहां बारिश होने से आफत है।

छत का पानी निकलने कोई इंतजाम नहीं होने से पानी दीवारों के साथ अंदर कमरों तक पहुंचने लगा है। भीड़ हाेने पर पक्षकारों को बाहर रहने की हिदायत अब आम हो गई है।ऑन द स्पॉटसुबह 11.30 बजे- सिविल लाइंसथाना परिसर में महिला कर्मियों ने बताया, महिला संबंधी अपराधों की जांच के लिए संवेदना केंद्र बना है। संवेदना केंद्र के दफ्तर में ताला लगा मिला। यहां किसी स्टाफ के बारे में जानकारी नहीं मिली। थाना आने वाली महिला फरियादी पहले की तरह मुख्य सिविल लाइंस थाना पहुंची, यहां मौजूद स्टाफ से संपर्क किया।दोपहर 12 बजे- कोतवाली थानाथाना में संवेदना केंद्र में महिला कर्मी तैनात। प्रभारी कक्ष संभालते मिली। यहां पर व्यवस्था और किसी थाने से बेहतर। महिला प्रभारी ने बताया, हर दिन कम से कम दो प्रकरणों की सुनवाई होती है। डीएसपी डीसी पटेल से संपर्क होने पर उन्होंने बताया, उनके जोनल एरिया में मौदहापारा थाना में संवेदना केंद्र नहीं बना सके। जगह की किल्लत से वहां पर परेशानी।

दोपहर 12.30 बजे

आजाद चौकमहिला संवेदना केंद्र में सन्नाटा। महिला स्टाफ के लॉ एंड आर्डर ड्यूटी में जाने की जानकारी थाना प्रभारी ने दी। प्रभारी के कक्ष के बाहर दो बुजुर्ग शिकायत के साथ मिले। वृद्धा सायरा बानो ने बताया, मकान का किराएदार परेशान करता है। इसकी शिकायत करने पहुंची हैं। साहब ने बाहर बैठने को कहा। एक घंटा गुजर गया।

दोपहर 1 बजे

अजाक थानाअनुसूचित जाति-जनजाति से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए अजाक थाने में हेल्पडेस्क और सीनियर डेस्क भी। महिला हेल्पडेस्क में नहीं मिलीं प्रभारी। सहयोगी स्टाफ से जानकारी लेने पर पता चला, प्रभारी घर पर हैं।

दोपहर 1.30 बजे

आमानाका थानानए इंटीग्रेटेड थाना में घुसते ही दो अलग-अलग काउंटर। महिला हेल्पडेस्क संवेदना कक्ष भी, लेकिन यहां पर कोई कर्मचारी नहीं मिला। अंदर स्टाफ से बात करने पर बताया गया, लॉ एंड आर्डर ड्यूटी के चलते व्यस्तता होने से कक्ष खाली। बाकी जानकारी के लिए टीआई नहीं मिले।

संवेदना केंद्र लोगों की सहूलियत के लिए बनाए गए हैं। खासकर महिलाओं को तुरंत मदद मिल सके। अगर किसी थाने में महिला स्टाफ की ड्यूटी लॉ एंड आर्डर पर है ताे उनकी जगह किसी और की ड्यूटी होना ही चाहिए। अगर कक्ष में कोई नहीं रहता तो इस पर टीआई से स्पष्टीकरण लिया जाएगा।

- अजय यादव, एसएसपी, रायपुर

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