Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

International Women's Day 2021 : 7वीं में फेल हुई, तंगी में साबुन बेचे, लांछन भी सहे, पर इन्हीं सबसे मजबूती आई

छत्तीसगढ़ की राज्यपाल और मध्यप्रदेश की बेटी अनुसुइया उइके से समझिए महिलाओं के जीवन का संघर्ष

International Womens Day 2021 : 7वीं में फेल हुई, तंगी में साबुन बेचे, लांछन भी सहे, पर इन्हीं सबसे मजबूती आई
X

आईएनएच/हरिभूमि के लिए सोनल भारद्वाज कौशल. फल सबको दिखते हैं। सफलता का तना भी सबको भाता है पर जमीन के अंदर जड़ों का संघर्ष अक्सर छिपा ही रह जाता है। पनपने के लिए जमीन भी सबको अलग अलग हासिल होती है। किसी को नरम मिट्टी मिलती है किसी को पत्थरों के बीच अपना आधार खड़ा करना होता है। जो विपरीत हालातों में खुद का अस्तित्व रचे, ऐसे ही लोग सफलता की दास्तां भी बनते हैं। मध्यप्रदेश की बेटी और वर्तमान में छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके की सफलता प्रेरित करती है। विपरीत हालात में उन्होंने कदम दर कदम कई मंजिलें तय कीं और सफलता के आयाम गढ़े हैं। उनका अतीत महिलाओं को भविष्य की राह बता सकता है। इस साक्षात्कार से जानिए, उनके अतीत का संघर्ष और वर्तमान की सफलता की कहानी।

सवाल- अपने बारे में बताएं? यह जो आज सफलता दिखती है, इसकी नींव कैसे रखी, कैसी दिक्कतों से जूझीं या यूं ही सब हासिल हो गया?

जवाब- महिलाओं को यूं ही कुछ भी हासिल नहीं होता। मेरा तो जीवन ही संघर्षों से भरा हुआ है। आर्थिक दिक्कतें थी, सामाजिक दिक्कतें थीं, शिक्षा को लेकर समस्याएं थीं। मैंने तो पैसे की तंगी की वजह से साबुन तक बेचे हैं। घर घर जाकर विज्ञापन तक किए। पढ़ाई के लिए पैसे जुटाना बड़ी समस्या रही लंबे समय तक। बहुत परेशानी झेली है। ताने सहे हैं। मेरी परिवारिक पृष्ठभूमि आर्थिक दिक्कतों से भरी हुई थी। समस्याओं की लंबी फेहरिस्त है। मैंने कभी नहीं सोचा कि यहां तक पहुंचूंगी। लेकिन एक ही बात कहना चाहती हूं। हौसला बनाए रखें। चलते रहिए, चलते रहिए। मेहनत कीजिए। कभी न कभी मंजिल जरूर मिलेगी।

सवाल- महिलाओं के लिए हर क्षेत्र में संघर्ष क्यों होता है? चाहे शिक्षा हो, कार्यस्थल हो या घर ही क्यों न हो?

जवाब- संघर्ष तो हर स्त्री के जीवन में होता है पर महिलाओं के सामने दो ही विकल्प होते हैं। या तो वो उसे चुनौती मानकर लक्ष्य को प्राप्त करें या पीछे हट जाएं, लेकिन फिर ऐसी महिला जीवन में कुछ कर नहीं सकती। मेरे सामने भी कई चुनौतियां आई, बचपन में शरारत बहुत किया करती थी डांट भी खाई है, पढ़ाई में बहुत अच्छी नहीं रही कभी, कक्षा सात में फेल भी हो गई थी पर उससे प्रेरणा मिली की जीवन में फेल होना, हारना कितनी पीड़ा देता है तभी से दरअसल असल संघर्ष और चुनौतियों का सामना करने की हिम्मत।

सवाल- आप जिस पद पर है यहां तक पहुंचने के लिए आपने भी कई संघर्ष किए होगें कुछ शेयर करना चाहेंगी?

जवाब- मेरे जीवन में भी बहुत संघर्ष रहा, विधायक, सांसद, राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष रहने पर भी बहुत से लोग मुझे पीछे करने के लिए बहुत हथकंडे अपनाते थे, कई बार बहुत पीड़ा भी होती थी। राजनीतिक जीवन में कई ऐसे मौके आए हैं, मैं यंग थी विधायक भी बहुत जल्दी बन गई थी। मेरे जुझारुपन से कई लोगों को बहुत तकलीफ होती थी पर मैं बिना डरे वहीं तपाक से उसका जवाब भी देती थी। वैसे ये वहीं लोग करते हैं जो महिलाओं को आगे बढ़ते देख बर्दाश्त नहीं कर पाते, ऐसे लोग कुंठित और विकृत मानसिकता के होते हैं। बहुत आरोप प्रत्यारोप लाछंन मैंने भी झेले हैं जीवन में।

सवाल- महिलाओं पर चरित्र संबंधी आरोप बहुत लगते हैं आप क्या सोचती है इस विषय पर?

जवाब-जैसा मैंने कहा, जब महिलाएं सफल होने लगती हैं तो जो बराबरी नहीं कर पाते वे लांछन लगाने लगते हैं। कई गलत बातें, कई अफवाहें उड़ाने लगते हैं। यह तो हर कदम पर होता है। लेकिन इससे डरकर अगर महिला घर बैठ जाए तो विकृत मानसिकता वाले लोगों की जीत हो जाएगी। वे यही तो चाहते हैं। ऐसे हालात से डरना नहीं है, पीछे नहीं हटना है। डटे रहना है। सभी सवालों का जवाब वक्त देता है। आपकी मेहनत, आपकी इच्छाशक्ति, आपकी सफलता ही सभी सवालों का जवाब है।

सवाल- आपके हिसाब से महिला सशक्तिकरण की सही परिभाषा क्या है?

जवाब- आज हर क्षेत्र में महिलाएं आगे बढ़ रही है यहीं सशक्तिकरण है लेकिन इसमें और आगे जाना है इसके लिए स्वंय में दृढ़ संकल्पित होने की आवश्यकता है लक्ष्य निर्धारित कर उस पर आगे बढ़ने की जरुरत है। सभी को जब समान अवसर मिलने लगेंगे। वही सार्थक सशक्तिकरण होगा।

सवाल- ये हेयर स्टाइल किसी का कॉपी किया या आपको ऐसे ही रखना पसंद है?

जवाब- बाल बहुत पतले हो गए थे तो एक बार कटवाए थे पर फिर ऐसे ही पसंद आने लगे है।

सवाल- क्या किसी महिला का नौकरी करना, उसके परिवार के सदस्यों खासकर बच्चों के साथ अन्याय होता है?

जवाब- समय के साथ परिस्थितियां बदली हैं और अब आर्थिक रुप से ये आवश्यक भी है लेकिन हां हर महिला को एक तालमेल जॉब और घर के बीच जरुर बनाना चाहिए। महिला कामकाजी है तो भी सामंजस्य जरूरी है। महिला का दायित्व तो समाज और परिवार गढ़ने का है। महिला यह कर सकती है। कर रही है।

सवाल- बलात्कार के मामलें लगातार बढ़े है सख्त से सख्त कानून होने के बाद भी ये रुक क्यों नहीं रहें?

जवाब- समाज के नजरिए को बदलने की आवश्यकता है तभी ये जड़ से खत्म होगा सिर्फ लड़कियों को नहीं लड़कों को भी संस्कार सिखाने होंगे।

सवाल- कहते है कि आप कई बार अड़ जाती है अपनी मर्जी का करती हैं। खासतौर पर छग के संदर्भ में ?

जवाब- मैं कोई भी काम किसी दबाव में नहीं करती हूं जो भी निर्णय लिए वह संवैधानिक दायरे के अंतर्गत लिए गये हैं इसके बाद भी कोई किसी को तकलीफ है तो न्यायालय प्रक्रिया का सहारा लेना चाहिए.

सवाल- एक स्त्री सम्पूर्ण कब होती है?

जवाब- किसी भी महिला को सम्पूर्ण उसकी सोच और उसका व्यवहार बनाता है खूबसूरती शरीर की नहीं मन की होनी चाहिए, स्त्री के अंदर हमेशा किसी की मदद करने का ख्याल होना चाहिए, फिर लोग खुद ब खुद उसके प्रति आकर्षित होते हैं उसका सम्मान भी करते हैं।

सवाल- महिलाओं के नाम आपका संदेश क्या होगा?

जवाब- महिलाओं के पास बहुत शक्ति है वह उसे पूरा उपयोग नहीं करतीं, यदि वह उस ऊर्जा का सही इस्तेमाल करेगी तो दुनिया उनके कदमों में होगी, बस दृढ़ निश्चय के साथ ईमानदारी से अपने पद पर आगे बढ़ते रहिए।

Next Story