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लेमरू प्रोजेक्ट पर भड़के टीएस सिंहदेव, सीएम काे पत्र लिखकर कहा- एरिया कम करने कभी नहीं कहा

हाथियों की समस्या से जूझ रहे छत्तीसगढ़ में दो साल पहले, 2019 में जशपुर, बलरामपुर, सूरजपुर और कोरबा जिले के जंगलों को जोड़कर लेमरू हाथी प्रोजेक्ट तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट को लेकर अब नया विवाद खड़े हो गया है। विवाद की वजह वन विभाग के अवर सचिव का पत्र है।

लेमरू प्रोजेक्ट पर भड़के टीएस सिंहदेव, सीएम काे पत्र लिखकर कहा- एरिया कम करने कभी नहीं कहा
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रायपुर. हाथियों की समस्या से जूझ रहे छत्तीसगढ़ में दो साल पहले, 2019 में जशपुर, बलरामपुर, सूरजपुर और कोरबा जिले के जंगलों को जोड़कर लेमरू हाथी प्रोजेक्ट तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट को लेकर अब नया विवाद खड़े हो गया है। विवाद की वजह वन विभाग के अवर सचिव का पत्र है। पत्र में लेमरू प्रोजेक्ट को 1 हजार 995 वर्ग किलोमीटर से घटाकर 450 वर्ग किलोमिटर के दायरे में समेटने का मामला है। पत्र में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अवर सचिव केपी राजपूत ने लेमरू प्रोजेक्ट को छोटा करने सात विधायकों की सहमति के साथ स्वास्थ्य मंत्री टीएस की सहमति होने का उल्लेख किया है।

लेकिन पत्र को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव भड़क गए हैं। उन्होंने 26 जून को लिखे पत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि वे कभी लेमरू प्रोजेक्ट को छोटा करने की मांग नहीं की। उनके नाम का उल्लेख गलत है। भ्रामक तरीके से उनका नाम उपयोग किया गया है। श्री सिंहदेव ने लिखा है कि कैबिनेट की बैठक में 1995.48 वर्ग किलोमीटर एलिफेंट रिजर्व में अपनी सहमति व्यक्त की है। साथ ही उन्होंने लेमरू एलिफेंट रिजर्व को छोटा करने की बात कभी नहीं की। श्री सिंहदेव के मुताबिक लेमरू एलिफेंट रिजर्व में ग्रामीणों को किसी तरह से परेशानी नहीं होने पर लेमरू एलिफेंट रिजर्व पर सहमति देने की बात कहा।

इसलिए लेमरू प्रोजेक्ट को मूर्त रूप दिया जा रहा

राज्य में दो दशक से ज्यादा मानव हाथी द्वंद्व की स्थिति निर्मित हो रही है। मानव हाथी द्वंद्व की ज्यादा समस्या उत्तर तथा पूर्वी छत्तीसगढ़ में ज्यादा है। इससे व्यापक पैमाने पर जान-माल का नुकसान हो रहा है। इसे देखते हुए हाथियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए वर्ष 2011 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने वर्ष 2011 में एलिफेंट रिजर्व बनाने का निर्णय लिया था। इस संबंध में सरकार द्वारा अधिसूचना भी जारी की गई थी। तब इस योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। इसके बाद वर्ष 2019 में राज्य शासन ने इस योजना को मूर्त रूप देने का निर्णय लिया।

यह है अवर सचिव का पत्र

अवर सचिव श्री राजपूत ने पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ पीवी नरसिंग राव को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के अलावा लैलुंगा विधायक चक्रधर सिंह सिदार, भरतपुर-सोनहत विधायक गुलाब कमरो, मनेंद्रगढ़ विधायक डॉ. विनय जायसवाल, लुण्ड्रा विधायक डॉ. प्रीतम राम, कटघोरा विधायक पुरुषोत्तम कंवर, कुनकुरी विधायक यूडी मिंज और कोरबा विधायक मोहित राम जनभावनाओं के अनुरूप लेमरू प्रोजेक्ट का क्षेत्र सीमित रखने का अनुरोध किया है। विधायकों के अतिरिक्त लेमरू हाथी रिजर्व क्षेत्र की अनेक ग्राम पंचायतों द्वारा भी लेमरू हाथी रिजर्व का क्षेत्र सीमित रखने का अनुरोध किया है। ग्रामीणों को यह आशंका है कि हाथी क्षेत्र का विस्तार से उनकी आजीविका बाधित होगी तथा उनकी गतिविधियां सीमित हो जाएंगी। इसलिए हाथी रिजर्व के क्षेत्रफल को घटाकर 450 वर्ग किलोमीटर कर मंत्री परिषद के समक्ष रखा जाए।

मैंने कभी क्षेत्र कम करने नहीं कहा

एक पत्र संज्ञान में आया है जिसमें मेरे द्वारा लेमरू प्रोजेक्ट का क्षेत्र कम पर सहमति देने का उल्लेख है। यह गलत और भ्रामक है। मैंने कभी इस तरह की सहमति नहीं दी है। मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं।

- टीएस सिंहदेव, स्वास्थ्य मंत्री छत्तीसगढ़

मंत्रिमंडल तय करेगा क्षेत्र

लेमरू हाथी रिजर्व का 1995.48 वर्ग किलोमीटर करने के संबंध में एक प्रेजेंटेशन कैबिनेट में दिया गया था, जिसमें अंतिम निर्णय होना बाकी है। इस वजह से नोेटिफिकेशन जारी नहीं हो पाया है। क्षेत्र को कम या अधिक करने का निर्णय मंत्रिमंडल में होता है।

- मोहम्मद अकबर, मंत्री, वन एवं जलवायु परिवर्तन

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