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'3 साल पूरे' : स्पीकर बोले- विपक्ष की संख्या काफी कम, नेता प्रतिपक्ष बोले- विधानसभा में आक्रामकता जरूरी

बतौर विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने आज 3 साल पूरे कर लिए हैं. 3 साल पूरे होने पर नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने श्री महंत को बधाई देते हुए चुटकी भी ली. सदन में हल्का-फुल्का नोंकझोंक भी हुई. सदन में आज वार्षिक कैलेंडर का भी विमोचन हुआ.

3 साल पूरे : स्पीकर बोले- विपक्ष की संख्या काफी कम, नेता प्रतिपक्ष बोले- विधानसभा में आक्रामकता जरूरी
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रायपुर. बतौर विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने आज 3 साल पूरे कर लिए हैं. 3 साल पूरे होने पर नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने श्री महंत को बधाई देते हुए चुटकी ली. विधानसभा में हल्की-फुल्की नोंकझोंक भी हुई. सदन में आज वार्षिक कैलेंडर का विमोचन किया गया.

नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि आने वाले साल भी बेहतर होगा. मौसम अध्यक्ष के रूप में यात्रा के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मामले में नेता प्रतिपक्ष कौशिक ज्यादा अनुभवी हैं. क्योंकि उन्होंने 5 वर्ष का कार्यकाल इस विधानसभा में अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला है.

हमें थोड़ी तकलीफ होती है कि विपक्ष की संख्या काफी कम है, लेकिन कम संख्या में भी काफी ज्यादा बोलने वाले लोग विपक्ष में शामिल है. कोरोना संकट को लेकर कहा कि पिछली बार अपेक्षा हम लोग इस बार काफी ज्यादा सतर्क हैं.

विधानसभा कि जो बरसों पुरानी परंपरा रही है. उसे अन्य विधानसभा में भी करने की कोशिश की जाती है. नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि मेरी हार्दिक इच्छा है कि सभी प्रतिवेदन का जवाब दिया जा सके.

'ना काहू से दोस्ती और न काहू से बैर'...विधानसभा अध्यक्ष ने कबीर जी की इस वाणी के साथ विधानसभा में अच्छे वातावरण बने रहने की बात कही. उपाध्यक्ष मोहन मंडावी ने कहा कि अति सौभाग्य है कि मेरे प्यारे और दुलारे बड़े भाई सबको हंसाने वाले अध्यक्ष के रूप में तीन वर्षों का कार्यकाल पूर्ण कर लिया. मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि मैं एक विधानसभा उपाध्यक्ष के रूप में हूं. कैलेंडर विमोचन आज हुआ, उसी को देखकर अब इस वर्ष चलने की बात कही है.

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने आज तीन साल का कार्यकाल पूरा किया. नेता प्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक ने बधाई देते हुए कहा कि विधानसभा की गरिमा उसकी शोभा है. जितने ज्यादा दिन तक विधानसभा चलाएंगे, उतना अच्छा. विधानसभा की घटती अवधि पर लोकसभा में भी चिंता व्यक्त की गई है. विधानसभा की अवधि से लेकर कार्यसूची पर चर्चा होनी चाहिए. शांति से विधानसभा चलेगी तो लोगों की रुचि ख़तम हो जाएगी. लोगों की रुचि ही इसके आक्रामक होने पर है.

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