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तीन मंत्रियों ने ली अफसरों की क्लास, डहरिया ने कहा- अस्पताल को बना रखा है मजाक

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक के बाद एक चार बच्चों की मौत ने हड़कंप मचा दिया। इसकी सूचना मिलते ही स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव दिल्ली का प्रवास रद्द कर अंबिकापुर लौट आए और सीधे अस्पताल पहुंचे। इधर, रायपुर से भी नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया अंबिकापुर पहुंचे। मंत्रियों ने प्रबंधन के साथ मीटिंग कर हालात की जानकारी ली। इस दौरान डहरिया ने नाराजगी जताते हुए कहा कि लापरवाही के चलते अस्पताल को मजाक बनाकर रखा है। मंत्रियों ने कहा कि आंकड़े सामान्य से ज्यादा है, इसलिए यह चिंता का विषय है। 

तीन मंत्रियों ने ली अफसरों की क्लास, डहरिया ने कहा- अस्पताल को बना रखा है मजाक
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अम्बिकापुर. पिछले 36 घंटे में एसएनसीयू समेत अस्पताल के शिशु वार्ड में चार बच्चों की मौत और दो की सूचना से हंगामा मचा हुआ है। बच्चों की मौत के बाद परिजनो ने इलाज मे लापरवाही का आरोप लगाया है। इसे गंभीरता से लेते हुए टीएस सिंहदेव दिल्ली से लौट आए। उन्होंने मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एमसीएच भवन में एसएनसीयू वार्ड का निरीक्षण किया व लगातार चार मौतों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने डीन डा. आर मूर्ति, अधीक्षक डॉ. लखन सिंह व विभाग के एचओडी डॉ. जेके रेलवानी से बच्चों को दिए गए उपचार व एसएनसीयू में बच्चों की स्थिति की जानकारी ली और फिर बन्द कमरे में प्रबंधन के साथ बैठक की।

इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि एक साथ चार मौतें होना चिंताजनक है। आज भी दो और मौतों की जानकारी मिली थी लेकिन वे बच्चे नियोनेटल नही थे। उन्होंने कहा, अगर निरंतर मौतें हो रही हैं तो इसका कारण जानने आया था कि कही आक्सीजन की कमी तो नही थी। वजन कम होने, प्री मेच्योर व अन्य कारणों से सामान्य से ज्यादा मौतें देखने को मिलती है लेकिन एक साथ चार मौतें चौकाने वाली है क्योंकि ये आंकड़े सामान्य से अधिक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रतिवर्ष 6 लाख बच्चों का जन्म हो रहा है और उनमें से 22 हजार बच्चों को एसएनसीयू में भर्ती होना पड़ रहा है। वजन कम व समय से पहले जन्म के कारण मौतें हो रही है और सिर्फ एक अस्पताल नहीं बल्कि रायपुर, सरगुजा व जगदलपुर में मौत का प्रतिशत अधिक है। इसके कारणों का गहराई से पता लगाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि गर्भवती माताएं आ रही हैं तो यह देखना होगा कि उन्होंने एचबी टेस्ट कराया है या नही। कुछ जगहों पर देखा जा रहा है कि पहले तीन माह तक महिलाएं गर्भधारण की जानकारी नही दे पाती है। महिलाओं में आयरन, एचबी टेस्ट व अन्य बुनियादी चीजों को लेकर पहल करनी होगी। महिलाओण का एचबी काउंट कराना जरूरी है। इसके साथ ही नियमित एएनसी चेकअप व जन्म के बाद बच्चों के देखभाल पर ध्यान देना जरूरी है।

लापरवाही पर होगी कार्रवाई

मरीज के परिजन द्वारा समय समय पर लगाए जाने वाले लापरवाही के आरोप व रिफर करने की शिकायत पर उन्होंने कहा कि अस्पताल में बिस्तर की संख्या 30 हो गई है और इसे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। लगातार मरीज आ रहे हैं, इससे दबाव बना है। कोई भी नही चाहता कि मृत्यु हो फिर भी अगर परिजन कह रहे है तो उनसे भी पूछा जाएगा और लापरवाही पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

एमसीएच का किया निरीक्षण, सिंहदेव के साथ बैठक कर लगाई फटकार

मेडिकल कॉलेज के एमसीएच स्थित एसएनसीयू में एक साथ 4 बच्चों की मौत को लेकर प्रदेशभर में मचे बवाल के बाद रात प्रदेश के नगरीय प्रशासन व जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया भी सरगुजा पहुंचे। मंत्री डॉ. डहरिया के साथ खाद्यमंत्री अमरजीत भगत भी मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एमसीएच भवन का निरीक्षण किया

व एसएनसीयू व प्रसूति वार्ड में बच्चों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। अस्पताल के निरीक्षण के बाद मंत्री डॉ. डहरिया सीधे प्रबंधन की बैठक ले रहे स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के पास पहुंचे व अधिकारियों से घटना को लेकर जानकारी ली। बैठक में पहुंचते ही मंत्री डॉ. डहरिया ने कड़ी नाराजगी जताते हुए 15 व 16 अक्टूबर को मरने वाले बच्चों की संख्या व मौत के कारणों की जानकारी मांगी ।जिस पर डीन डॉ. मूर्ति व अन्य चिकित्सकों ने बताया कि बच्चे लो बर्थ, प्री मैच्योर थे और उन्हें अन्य कॉम्प्लिकेशन भी थी। मंत्री डॉ. डहरिया ने कहा कि अस्पताल में 15 दिन में 37 मौतें हुई है जो बहुत ज्यादा हैं।

इस पर अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल में 139 एडमिशन हुए जिसमें से 37 मौतें हुई हैं। इनमें से 19 न्यू बोर्न बच्चे हैं। डॉ. डहरिया ने कड़े लहजे में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि घटना के दिन कौन कौन डॉक्टर की ड्यूटी लगाई गई थी इसके साथ ही पिछले 15 दिन के डॉक्टरों का ड्यूटी चार्ट उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही होने वाली मौतों की रिपोर्ट भी बनाकर दी जाए। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव से कहा कि उस दिन अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं था। उस दिन चार प्रोफेसर की ड्यूटी थी लेकिन कोई नही था। यहां एक जिम्मेदार डॉक्टर को हमेशा रहना चाहिए। इस बात की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान विधायक डॉ. प्रीतम राम, पादप बोर्ड के अध्यक्ष बाल कृष्ण पाठक, श्रम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष शफी अहमद, 20 सूत्रीय क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष अजय अग्रवाल, मेयर डॉ. अजय तिर्की, जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता, जेपी श्रीवास्तव व अन्य मौजूद थे।

साफ सफाई पर भी नाराजगी

बैठक में उन्होंने साफ सफाई को लेकर नाराजगी जताई। अस्पताल में चारों तरफ गंदगी है। इसे लेकर उन्होंने डीन से सवाल किया। मंत्री श्री सिंहदेव ने कहा कि अस्पताल में मरीज के परिजन के अनियमित आगमन को सुधारना होगा। अस्पताल के पाइप लाइन में बोरी, चादर, सेनेटरी पेड निकल रहा है। बोरी और चादर कौन डालता है।

आवश्यकताओं को पूर्ण करने का आश्वासन

मंत्री डॉ. डहरिया ने कहा कि हेल्थ डिपार्टमेंट को 8 करोड़ रुपए दिया जाता है। प्रोफेसर की जरूरत है तो ले आओ, वेतन हम देंगे। चिकित्सकों ने अस्पताल में वार्मर व बेड की संख्या बढ़ाने की मांग की जिसपर उन्होंने व्यवस्थाओं में सुधार करने व संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया। एमसीएच व जिला अस्पतालों में बेड व वार्मर की व्यवस्था की जाएगी।

सिंहदेव ने कहा -उपलब्ध कराएं फुटेज

इधर घटना को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव ने कहा कि आप कह रहे हैं डॉक्टर थे ,तो मंत्री जी के पास जानकारी कैसे है कि कोई नहीं था। इसका मतलब किसी ने बताया। इसलिए उस दिन का सीसीटीवी फुटेज मंत्री जी को उपलब्ध कराएं व 15 दिनों का डाटा दें।।

डॉक्टर से बुलाकर पूछताछ

आज बैठक के दौरान उस ड्यूटी डॉक्टर को बुलाकर पूछताछ की जिसपर उन्होंने बताया कि उस रात वे ड्यूटी पर थी व बच्चों को देखने के साथ ही उनकी रिपोर्ट लिखी थी व परिजन को भी वस्तुस्थिति से अवगत कराया था। इस पर मंत्री श्री सिंहदेव ने कहा कि रायपुर व जगदलपुर की तुलना में यहां मौत का प्रतिशत 28 है लेकिन यह भी अधिक है। इसे कम करने की जरूरत है। वहीं मंत्री डॉ. डहरिया ने कहा कि सीएमएचओ सभी निजी हॉस्पिटल की भी सारी जानकारी रखें। कितना रिफर निजी अस्पताल से आया है। बोलने से काम नहीं चलेगा। पूरी जानकारी लेनी पड़ेगी, इसकी जिम्मेदारी सीएमएचओ की है।

पुराने समय के लोग कर रहे नेतागिरी

बैठक में मंत्री सिंहदेव ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अस्पताल में अभी भी पुराने समय के लोग नेतागिरी कर रहे हैं। रिटायर होने के बाद भी कश्यप नामक बाबू खुलेआम घूम रहा है कब्जा करके बैठा है।

अब एमएस व एचओडी की एक साथ छुट्टी नहीं

बैठक के दौरान डॉ.डहरिया ने कहा कि यह प्रशानिक लापरवाही है। नर्स उस दिन मरीज देख रही थी। इतनी बड़ी घटना हो रही है,देश में छप रहा है और बदनामी सरकार की हो रही है। उन्होंने कहा कि त्यौहार मनाना ठीक है लेकिन लापरवाही नही चलेगी। अब अस्पताल के एमएस व एचओडी एक साथ एक दिन छुट्टी पर नहीं जाएंगे।

एमएस से पूछा आप कहां थे

डॉ. डहरिया ने मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक से पूछा कि आप घटना के दिन कहा थे। शिकायत ये है कि उस दिन अस्पताल में ड्यूटी पर कोई डॉक्टर नहीं था। नर्स जिम्मेदारी संभाल रही थी। उस दिन कोई डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं आया। अस्पताल में पूरी नेगलिजेंसी है। अस्पताल को आप लोगों ने मजाक बनाकर रखा है। डॉक्टरों द्वारा ड्यूटी की दलील देने और उन्होंने कहा कि उस दिन के साथ ही सभी दिन का अटेंडेंस रजिस्टर निकाला जाए। अब अस्पताल में डॉक्टर के नर्स सहित अन्य स्टाफ की हाजरी ऑनलाइन लगेगी।

भूपेश के निर्देश पर डहरिया भी पहुुंचे

बच्चों की मौत को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बेहद संवेदनशीलता से लिया। उन्होंने अंबिकापुर के प्रभारी मंत्री शिव डहरिया को तत्काल रवाना कर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि हालात का तत्काल जायजा लें और इलाज की बेहतर से बेहतर व्यवस्था की जाए। श्री बघेल के निर्देश के बाद श्री डहरिया तत्काल रवाना हो गए। वहां पहुंचकर उन्होंने मीटिंग ली। उनके साथ स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव और खाद्यमंत्री अमरजीत भगत भी मौजूद रहे।

मेटर्नल मोर्टिलिटी रेट 100 के ऊपर

स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव ने कहा कि प्रदेश में भी मेटर्नल मोर्टिलिटी रेट (एमएमआर) अभी प्रदेश में प्रतिवर्ष 100 के ऊपर है। शिशु मृत्यु दर की बात करें तो 5 साल से ऊपर 46, 5 वर्ष से 1 वर्ष के बीच 41 प्रतिशत व उससे नीचे काफी कम है लेकिन अभी भी इसमें सुधार की गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि एक अस्पताल नही बल्कि प्रदेश में मुहिम चलाकर सुधार करना पड़ेगा। दूसरों से बेहतर आंकड़े देखकर खुश होने के बजाए अपनी व्यवस्था को और कैसे सुधार जाए इस पर दिन देने की आवश्यकता है।

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