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बाजारों, धरनास्थल और रैली में हजारों की भीड़, ऐतराज नहीं, नए साल के जश्न में पाबंदी

सवाल यह उठ रहा है कि अगर भीड़भाड़ को रोका ही जाना है, तो सभी स्थानों पर पाबंदी होनी चाहिए। सिर्फ नए साल के जश्न या अन्य कार्यक्रमों में 50 फीसदी उपस्थिति का फरमान महज औपचारिकता बनकर न रह जाए। हरिभूमि ने भीड़भाड़ वाले स्थानों की पड़ताल की, शनिवार को शहर के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न समाजों के धार्मिक कार्यक्रमों भारी भीड़ में सैकड़ों लोग बिना मास्क के नजर आए। बूढ़ापारा धरनास्थल पर आंदोलनकारियों की खचाखच भीड़ में हजारों लोग सोशल डिस्टेसिंग को धता बताते हुए आए दिन भीड़ का हिस्सा बन रहे हैं। राजधानी के सबसे व्यस्त मार्ग मालवीय रोड में लोगों की ऐसी भीड़ उमड़ रही है कि सोशल डिस्टेंसिंग भी खौफ खा जाए। पढ़िए स्पेशल रिपोर्ट...

बाजारों, धरनास्थल और रैली में हजारों की भीड़, ऐतराज नहीं, नए साल के जश्न में पाबंदी
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रायपुर: कोरोना व नए वैरिएंट ओमिक्रान के खतरे को देखते हुए प्रदेश में लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने कोविड-19 एवं नए संक्रमण के नियंत्रण के लिए धार्मिक व सामाजिक त्योहारों और नववर्ष के मौके पर होने वाले जश्न के कार्यक्रमों पाबंदी लगाते हुए कार्यक्रम स्थलों पर क्षमता के 50 फीसदी तक व्यक्तियों के भाग लेने अनुमति दी है। वहीं दूसरी ओर शहर के प्रमुख बाजारों, धरनास्थल सहित अन्य स्थलों पर हजारों की भीड़ पर न कोई बंदिश है, न भीड़ से किसी को ऐतराज। ऐसे में नए साल के जश्न में सैकड़ों पर पाबंदी का फरमान लोगों के बीच चर्चा में है। इसे लेकर सहज रूप में यह सवाल उठ रहा है कि अगर भीड़भाड़ को रोका ही जाना है, तो सभी स्थानों पर पाबंदी होनी चाहिए। सिर्फ नए साल के जश्न या अन्य कार्यक्रमों में 50 फीसदी उपस्थिति का फरमान महज औपचारिकता बनकर न रह जाए। हरिभूमि ने भीड़भाड़ वाले स्थानों की पड़ताल की, तो प्रोटोकॉल को लेकर ऐसी तस्वीरें सामने आई।

केस-1

धार्मिक आयोजनों में डर कैसा

यूं तो जिला प्रशासन ने धार्मिक आयोजनों में क्षमता से 50 फीसदी व्यक्तियों के ही शामिल होने की अनुमति दी है, लेकिन यह फरमान महज औपचारिकता बन गई है। शनिवार को शहर के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न समाजों के धार्मिक कार्यक्रमों भारी भीड़ में सैकड़ों लोग बिना मास्क के नजर आए। इनमें महिलाएं, उम्रदराज, युवा से लेकर बच्चों की मौजूदगी देखी गई। फिर भी संक्रमण के खतरे को नजरअंदाज कर हो रहे आयोजनों में न सावधानी दिखी, न मॉनिटरिंग।

केस-2

हजारों की भीड़ गिनती के मास्क

बूढ़ापारा धरनास्थल पर आंदोलनकारियों की खचाखच भीड़ में हजारों लोग सोशल डिस्टेसिंग को धता बताते हुए आए दिन भीड़ का हिस्सा बन रहे हैं। मास्क यहां गिनती के चेहरों पर ही नजर आती है। एक नहीं अनेक संगठन तंबू लगाकर हक की आवाज बुलंद करने दूरदराज से यहां आए हैं। जिन्हें धरनास्थल से सड़क और डिवाइडर से लेकर बूढ़ेश्वर मंदिर और श्याम टाकीज तक देखा जा सकता है। इनमें महिलाओं, बच्चों से लेकर बुजुर्ग और दिव्यांग भी शामिल हैं। यही नहीं दर्जनों वेंडर, पुलिस के जवान भी इसी भीड़ का हिस्सा बन रहे हैं।

केस-3

डिस्टेंस ऐसा कि चलने की जगह नहीं

राजधानी के सबसे व्यस्त मार्ग मालवीय रोड में लोगों की ऐसी भीड़ उमड़ रही है कि सोशल डिस्टेंसिंग भी खौफ खा जाए। यहां लोगों के बीच डिस्टेंस इतना कम है कि दिन के समय चलना मुश्किल होता है। कोरोना के खतरे को नजरअंदाज करने वालों को देखने वाला कोई नहीं है। व्यापारिक संगठनों ने पहले बाजार क्षेत्रों में बिना मास्क दुकानों, प्रतिष्ठानों में प्रवेश करने पर रोकने का अभियान शुरू किया था, लेकिन अब यह पूरी तरह ठप है। ऐसे में संक्रमण की आशंका बनी हुई है।

केस-4

संक्रमण का बाजार कौन जिम्मेदार

रायपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से हर दिन हजारों लोग शास्त्री बाजार और गोलबाजार पहुंचते हैं, लेकिन किसी के चेहरे पर मास्क नजर नहीं आता। इन बाजारों में इतनी जगह नहीं कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सके। ऐसे में कोरोना की आशंका तो यहां भी बनी हुई है, लेकिन सावधानी के नाम पर जिम्मेदार मौन हो जाते हैं। नगर निगम प्रशासन का दावा है कि मास्क के लिए अभियान चलाया जा रहा है, पर मानिटरिंग नहीं होने से बाजार में भीड़भाड़ की स्थिति बनी है।

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