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विधायकों की मुराद होगी पूरी, सरकार लौटाएगी 180 करोड़ रुपए, मंथन हो चुका, आदेश जल्द

कोरोना संक्रमण कम हुआ, विधायक निधि का इस्तेमाल अपने इलाकों में कर सकेंगे

विधायकों की मुराद होगी पूरी, सरकार लौटाएगी 180 करोड़ रुपए, मंथन हो चुका, आदेश जल्द
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रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार अपने प्रदेश के 90 विधायकों के लिए जल्द एक महत्वपूर्ण फैसला करने जा रही है। प्रदेश में जब कोरोना की दूसरी लहर आई, तो सरकार ने लोगों का इलाज करने के लिए धन जुटाने के प्रयास में विधायक निधि का उपयोग करने का फैसला किया था। प्रदेश में अब संक्रमण की दर अत्यंत कम होने तथा हालात सामान्य होने पर सरकार का विचार है कि विधायक निधि की राशि 180 करोड़ रुपए विधायकों को लौटा दी जाए। प्रदेश के हर विधायक को साल में 2 करोड़ रुपए अपने क्षेत्र में खर्च करने के लिए मिलते हैं।

जल्द हो सकता है फैसला

सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें, तो राज्य सरकार ने इस बात पर गंभीरता से विचार किया है कि कोरोना काल के दौरान विधायकों की निधि से लिए गए दो-दो करोड़ रुपए, कुल मिलाकर 180 करोड़ रुपए विधायकों को वापस किए जाएं। ऐसा करने से राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों में विधायकों की अनुशंसा पर कई जरूरी काम हो सकेंगे। बताया गया है कि सरकार ने इस बारे में विचार विमर्श पूरा कर लिया है। ऐसी संभावना है कि जल्द ही इस बारे में निर्णय लिया जाए।

खर्च हुई राशि देगी सरकार

बताया गया है कि जब सरकार ने विधायक निधि कोरोना के लिए लेने का फैसला किया था, उससे पहले तक कुछ विधायकों ने अपने क्षेत्रों के लिए कार्यों की अनुशंसा कर दी थी। इसके पालन में आवंटन जारी हो गया था। सूत्रों के अनुसार यह राशि 27 करोड़ रुपए के आसपास थी। अब सरकार जब विधायक निधि का पैसा वापस करने का फैसला करने जा रही है, तो ये विचार भी किया गया कि खर्च हो चुकी राशि का क्या किया जाए। पता लगा है कि सरकार ने तय किया है कि जितनी राशि खर्च हो चुकी है, उसे काटा नहीं जाएगा, बल्कि ये राशि खुद सरकार अपने खजाने से अदा करेगी।

भाजपा विधायकों ने किया था विरोध

राज्य सरकार ने जब विधायक निधि कोरोना फंड में लेने का फैसला किया था, तब मुख्य विपक्षी भाजपा ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया था। विपक्ष का कहना है था कि जब केंद्र सरकार कोरोना के इलाज के लिए संसाधन दे रही है, तो फिर राज्य सरकार को यह कटौती करने की जरूरत ही क्या है। हालांकि सरकार ने उस समय विपक्ष की बात नहीं मानी थी, लेकिन अब हालात बदले, तो खुद सरकार ने यह राशि वापस करने का विचार किया है।

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