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आदिवासी से इसाई बनी मां के शव को अपनी ही जमीन में दफना नहीं पाया बेटा

पीड़ित परिवार ईसाई धर्म स्वीकार करने के कारण समाज से बहिष्कृत है, माह का यह दूसरा प्रकरण है, जिले में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, इससे पहले इस माह में ऐसा ही एक और प्रकरण प्रशासन के पास आया था, जहाँ पर बड़ेगौरी के एक परिवार के साथ भी कुछ इसी प्रकार की घटना हुई थी। प्रशासन ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश किया था, पर नकाम हो गई थी जिसके चलते पीड़ित परिवार को शव को गांव से बाहर चारामा में दफनना पडा था। पढ़िए पूरी ख़बर..

आदिवासी से इसाई बनी मां के शव को अपनी ही जमीन में दफना नहीं पाया बेटा
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कांकेर: विकासखंड कांकेर के ग्राम पंचायत आतुरगांव के आश्रित ग्राम गोवर्धन के एक परिवार को अपने धर्म को छोड़कर दूसरे धर्म में जुड़ना महंगा पड़ गया। दूसरे धर्म में जाने के कारण गाँव के लोग ग्राम में महिला को अपने रीति रिवाज से हटकर दूसरी रीति रिवाज से दफनाने नहीं देने के कारण बेटा अपनी जमीन पर अपनी माँ के शव को नहीं दफना पा रहा। प्रशासन से गुहार लगाई, प्रशासन ने टीम भेजी, परंतु समाचार लिखे जाने तक ग्राम के लोग प्रशासन की एक बात नहीं सुनी।

दरअसल पूरा मामला ग्राम पंचायत आतुरगांव के आश्रित ग्राम गोवर्धन का है जहां एक परिवार अपने समाज के लोगो के साथ अपनी शिकायत लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय व कलेक्ट्रोरेट पहुंचे। ग्रामीण संग्राम उइके ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें ईसाई धर्म में जुड़ने के पश्चात ग्राम से बहिष्कृत कर दिया गया था। ग्राम के किसी भी कार्य करने से मना कर दिया गया था। मेरी माता चैतीबाई उइके का निधन 14 दिसंबर की शाम को हो गया था, जिसका अंतिम संस्कार अपने घर के बाड़ी में करना चाहता हूँ, पर ग्राम के कुछ व्यक्ति को इससे आपत्ति है, जिसके चलते वे अंतिम संस्कार ग्राम में करने नही दे रहे जिसको लेकर प्रशासन के संज्ञान में लाया। प्रशासन व पुलिस की टीम गांव पहुंचकर गांव के लोगों को समझाने की कोशिश की, परंतु समाचार लिखे जाने तक कोई निर्णय नहीं हुआ। समाचार लिखे जाने तक शव का अंतिम संस्कार नहीं हो पाया।

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