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15 सालों में नहीं बन पाया क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र, अब होता जा रहा कंडम, लोग कपड़ा सुखा रहे

हतराई में दो एकड़ में पिछले 15 सालों से बन रहा महिला एवं बाल विकास का क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र अब तक अधूरा है। काम पूरा नहीं होने और अधिकारियों की लापरवाही के कारण पूरी बिल्डिंग खंडहर होती जा रही है। इसके प्रशासनिक भवन निर्माण पर अब तक साढ़े 64 लाख रुपए तो हॉस्टल और कर्मचारी आवास पर एक करोड़ 12 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं।

15 सालों में नहीं बन पाया क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र, अब होता जा रहा कंडम, लोग कपड़ा सुखा रहे
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बिलासपुर. बहतराई में दो एकड़ में पिछले 15 सालों से बन रहा महिला एवं बाल विकास का क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र अब तक अधूरा है। काम पूरा नहीं होने और अधिकारियों की लापरवाही के कारण पूरी बिल्डिंग खंडहर होती जा रही है। इसके प्रशासनिक भवन निर्माण पर अब तक साढ़े 64 लाख रुपए तो हॉस्टल और कर्मचारी आवास पर एक करोड़ 12 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। पूरी बिल्डिंग में लगे कमरों की खिड़की-दरवाजे टूट गए हैं, तो बिजली और सेनिटरी फिटिंग नहीं की गई है। इसकी वजह से उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। परिसर में झाड़ उग आए हैं, तो कमरों के अंदर तक कचरा भरा हुआ है। दोनों तरफ के मुख्य गेट कई सालों से बंद पड़े हैं और अब उस पर वहीं रहने वाले अटल आवास के लोग अपना कपड़ा सुखाते हैं।

बिलासपुर के क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान के प्रशासनिक भवन की प्रशासकीय स्वीकृति 2005-06 में और हॉस्टल और कर्मचारी आवास बनाने की प्रशासकीय स्वीकृति 2012-13 में दी गई थी। प्रशासनिक भवन पर अब तक साढ़े 64 लाख रुपए तो वहीं हॉस्टल और कर्मचारी आवास पर एक करोड़ 12 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। विधानसभा में बेलतरा से भाजपा विधायक रजनीश सिंह ने इस मामले को उठाते हुए इसे शासकीय राशि के दुरुपयोग का मामला बताया है।

अधिकारियों की लापरवाही का बड़ा नमूना

दरअसल राज्य बनने के बाद से ही प्रदेश में महिलाओं के प्रशिक्षण के लिए केंद्र खोले की मांग हो रही थी। इसमें महिला बाल विकास विभाग से जुड़ीं पर्यवेक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ ही मितानिन को भी ट्रेनिंग दी जानी थी। इसी मंशा के तहत रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर तीन स्थानों पर क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान खोलने की योजना बनी। रायपुर, जगदलपुर में तो ट्रेनिंग सेंटर शुरू हो गए लेकिन बिलासपुर में पदस्थ अधिकारियों की लापरवाही के कारण काम में देरी होता गया। हाल यह रहा कि 2005-06 में प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद भ‌वन निर्माण 2009-10 में शुरू हो सका। इसके बाद भी अधिकारी सोए रहे और बिल्डिंग का काम 15 सालों बाद भी अधूरा है।

3 बिल्डिंग खड़ी कर दी, देखने वाला कोई नहीं

महिलाओं को ट्रेनिंग देने के लिए इस क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र को बनाया जा रहा है। इसके तहत दो एकड़ के क्षेत्र में तीन बिल्डिंग खड़ी कर दी गई है। इसमें से एक प्रशासनिक भवन है, तो दूसरा हास्टल और तीसरा ट्रेनिंग सेंटर है। तीनों बिल्डिंग में बनाए गए कमरे कंडम होते जा रहे हैं और इनको देखने वाला कोई नहीं है। हाल यह है कि इस जगह पर जाने के लिए कोई रास्ता ही नहीं है। एक रास्ता जरूर है जो कि नगर निगम द्वारा बनाए गए अटल आवास के बीच से होकर जाता है। दूसरी तरफ खेत हैं जहां बाइक क्या पैदल जाना मुश्किल है।

दो साल से नहीं मिली वित्त विभाग से अनुमति

जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया ने बताया है कि 2019 में यह मामला उनके संज्ञान में आया था, उसके बाद बचे हुए काम कराने के लिए एक प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया है। अभी तक उसको स्वीकृति नहीं मिली है। विस सदस्यों ने कहा कि इसके लिए दोषी लोगों पर कार्रवाई करना चाहिए। इस पर मंत्री ने कहा कि निर्माण एजेंसी गृह निर्माण मंडल है। इसके कार्य के लिए फिर से स्वीकृति जारी की गई है, लेकिन काम में देरी हो रही है इस पर ध्यान दिया जाएगा।

शिफ्टिंग नहीं होने से क्षतिग्रस्त हो रहा भवन

तीन साल पहले तीन बिल्डिंग बना ली गई थी। उस दौरान महिला बाल विकास विभाग ने हैंडओवर नहीं लिया। शिफ्टिंग नहीं होने के कारण कमरे और भवन क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। शासन से 40 लाख रुपए की स्वीकृति और मांगी गई है।

- एमके नरेटी, ईई, हाउसिंग बोर्ड

जाने का रास्ता भी नहीं

बिल्डिंग बना देने से क्या होता है। महिलाओं के ट्रेनिंग सेंटर शुरू करने से पहले सुरक्षा सबसे जरूरी है। बहतराई में बनी बिल्डिंग में तो जाने का रास्ता तक नहीं है। लाइट, पानी कुछ भी तो नहीं। शासन से इस बारे में चर्चा चल रही है।

- निशा मिश्रा, उपसंचालक, महिला बाल विकास

दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो

क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र का प्रशासनिक भवन अब भी अधूरा है। यह लापरवाही है। विधानसभा में मामला उठाया था। केंद्र का संचालन किराए के भवन में हो रहा है। इसके लिए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

- रजनीश सिंह, बेलतरा विधायक

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