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कोरोना इलाज के लिए नया प्रोटोकाॅल जारी, डॉक्टरों के प्रिसक्रिप्शन का होगा ऑडिट

निजी अस्पतालों के बैड की भी निगरानी होगी, रेमडेसिविर, टोसीलिजुमाब पर भी दिए निर्देश

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रायपुर. छत्तीसगढ़ में अब डॉक्टरों द्वारा लिए गए प्रिसक्रिप्शन (दवा परची) का ऑडिट राज्य चिकित्सा परिषद (मेडिकल काउंसिल) द्वारा किया जाएगा। अगर किसी डॉक्टर ने बिना किसी जरूरत के कोई दवा लिखी, तो ऐसे डॉॅक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिया है। इसके साथ ही अनावश्यक दवाइयां न देनेे के संबंध में भी नीति निर्धारित की गई है।

कोविड इलाज के लिए जारी हुआ नया प्रोटोकाॅल

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली द्वारा जारी किए गए प्रोटोकॉल के अनुसार एवं छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ चिकित्सकों की अनुशंसा पर कोविड के इलाज के लिए राज्य के स्वास्थ्य ए‌वं परिवार कल्याण विभाग द्वारा नया प्रोटोकॉल जारी किया गया है। एम्स नई दिल्ली एवं आईसीएमआर की अनुशंसा के मुताबित ये निर्देश दिए गए हैं कि रेमडेसिविर, टोसीलिजुमाब एवं प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग केवल अस्पतालों में किया जाएगा।

जरूरत हो तभी दें ये दवाएं

रेमडेसिविर, टोसीलिजुमाब दवाओं के संबंध में कहा गया है कि इन दवाओं को प्रिस्क्राइब करने वाले डॉक्टर की ये जिम्मेदारी होगी कि वह इन दवाओं के संबंध में मरीज की आवश्यकता का आकलन कर लें। यह भी सुनिश्चित कर लें कि मरीज को कोई अन्य बीमारी जैसे किडनी रोग, ह्दय रोग, कैंसर आदि तो नहीं है। ऐसा इसलिए कि ये दवाएं अभी एक्सपेरीमेंटल दवाएं हैं। इसीलिए इन दवाओं को किसी भी मरीज को देने से पहले उनके परिजन से सहमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

बेड होने पर भी भर्ती नहीं की तो कार्रवाई

सरकार ने यह आदेश भी जारी किया है कि यदि कोई अस्पताल मरीज को बेड उपलब्ध होने के बावजूद भर्ती करने से इनकार करता है, तो ऐसी स्थिति में संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सीएमओ रायपुर द्वारा अलग अलग पांच दल बनाए जाएंगे। ये दल निजी अस्पतालों में जाकर बेड की उपलब्धता की जानकारी लेंगे। यह भी देखा जाएगा कि पोर्टल पर बेड की उपलब्धता की जानकारी अपडेट रहे। ये भी देखा जाएगा कि अस्पताल द्वारा मरीजों को भर्ती करने से वंचित तो नहीं किया जा रहा है।

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