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CG Assembly Winter Session : सदन में गरमाया रेडी-टू-ईट का मामला, विपक्ष ने किया वॉकआउट

शीतकालीन सत्र का आज तीसरा दिन भी हंगामेदार रहा. प्रश्नकाल शुरू होते ही रेणु जोगी ने चिटफंड को लेकर सवालों की झड़ियाँ लगा दी. बाद में पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह ने धान खरीदी का मुद्दा उठाया. सदन में आज महिला स्व सहायता समूह से रेडी टू ईट का काम निजी हाथों में देने का मामला भी गरमाया. सदन में 3 बजे के लिए तय किये गए चर्चा के समय पर अंसतुष्ट विपक्ष के सदस्यों ने एक बार फिर की तुरन्त चर्चा मांग की. भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि तत्काल चर्चा हो नहीं तो भाजपा विधायक सदन का बहिर्गमन करेंगे. हंगामा करते हुए विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन कर लिया.

CG Assembly Winter Session : सदन में गरमाया रेडी-टू-ईट का मामला, विपक्ष ने किया वॉकआउट
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रायपुर. शीतकालीन सत्र का आज तीसरा दिन भी हंगामेदार रहा. प्रश्नकाल शुरू होते ही रेणु जोगी ने चिटफंड को लेकर सवालों की झड़ियाँ लगा दी. बाद में पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह ने धान खरीदी का मुद्दा उठाया. सदन में आज महिला स्व सहायता समूह से रेडी टू ईट का काम निजी हाथों में देने का मामला भी गरमाया. सदन में 3 बजे के लिए तय किये गए चर्चा के समय पर अंसतुष्ट विपक्ष के सदस्यों ने एक बार फिर की तुरन्त चर्चा मांग की. भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि तत्काल चर्चा हो नहीं तो भाजपा विधायक सदन का बहिर्गमन करेंगे. हंगामा करते हुए विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन कर लिया.

विधानसभा शीतकालीन सत्र के आज तीसरे दिन कार्यवाही शुरू होते ही सदन में चिटफंड फ्रॉड का मुद्दा गूंजने लगा. प्रश्नकाल में रेणु जोगी ने चिटफंड कंपनियों के फ्रॉड का मुद्दा उठाया. रेणु जोगी ने पूछा कि प्रदेश में कितनी कंपनियां संचालित थी. सहारा इंडिया के कितने निवेशकों को पैसा दिलाया. कांग्रेस ने किस आधार पर घोषणा पत्र में डूबे पैसे दिलाने का वादा किया. जवाब में गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि चिटफण्ड में डूबी हुई रकम लौटाई जा रही है. प्रदेश में कोई भी चिटफंड कंपनी अधिकृत रूप पंजीकृत अथवा संचालित नहीं है. जोगी कांग्रेस से विधायक डॉ. रेणु अजीत जोगी ने सहारा इंडिया में निवेशकों द्वारा जमा की गई राशि का विवरण मांगा. रेणु जोगी ने गृह मंत्री से सवाल पूछा कि वर्ष 2018 से छत्तीसगढ़ प्रदेश में निवेशक के रूप में कितनी चिटफंड कंपनियां संचालित थी? कंपनियों के नाम सहित जानकारी देवें? सहारा इंडिया की विभिन्न शाखाओं में निवेशकों द्वारा जमा कराई गई राशि के भुगतान के लिये 17-11-2021 तक क्या-क्या कार्रवाई हुई है? प्रदेश के कितने निवेशकों द्वारा उक्त कंपनी में कितनी राशि का निवेश किया गया है?

गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने जवाब देते हुए कहा कि वित्त विभाग की जानकारी अनुसार प्रदेश में चिटफंड अधिनियम, 1982 प्रभावशील है. इस अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत प्रदेश में कोई भी चिटफंड कंपनी अधिकृत रूप से पंजीकृत अथवा संचालित नहीं है. दूसरे सवाल के जवाब में गृह मंत्री ने कहा कि सहारा इंडिया पर राज्य शासन का नियंत्रण नहीं है. जिस कारण निवेशकों के द्वारा जमा राशि एवं भुगतान की जानकारी दिया जाना संभव नहीं है. जो मामले संज्ञान में आए हैं, आ रहे हैं उन पर समुचित कार्यवाही की जा रही है. सहारा इंडिया कंपनी में निवेशित राशि की जानकारी राज्य शासन को उपलब्ध नहीं है. नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि राजनांदगांव में जमीन की नीलामी कर निवेशकों को रकम दिलाई जा सकती है तो रायपुर में 500 एकड़ जमीन नीलाम कर सरकार पैसा वापस क्यों नहीं कर रही है. कार्यवाही नियत है तो समय सीमा बताएं. भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि घोषणा पत्र में चिटफंड का पैसा वापसी का वादा किया गया था. सत्ता पक्ष ने घोषणा पत्र में झूठा वादा किया था. सत्ता पक्ष सदन में माफी मांगे.

विधानसभा शीतकालीन सत्र के आज तीसरे दिन धान खरीदी के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ. खाद्य मंत्री के जवाब से डॉ. रमन असंतुष्ट हो गए. डॉ. रमन ने कहा कि मंत्री अमरजीत भगत विद्वान मंत्री हैं जवाब कहीं का कहीं जा रहा है. विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि डॉ रमन सिंह 15 साल तक मुख्यमंत्री रहे हैं. मंत्री जी आप उनके केबिन में जाकर उन्हें समझा दीजिए उनकी चिंता को शांत कीजिए. पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि सवालों के जवाब नही आ रहे हैं. धान उठाव और परिवहन में राष्ट्रीय नुकसान हुआ है. क्या इस मामले में सदन की समिति से जांच कराएंगे? जवाब में मंत्री अमरजीत भगत ने कहा डॉ साहब आपके खाने के दांत और दिखाने के और हैं.

मंत्री अमरजीत की बात पर भाजपा विधायकों ने बात को आरोप करार दिया. विपक्ष ने इस बात पर जमकर हंगामा किया. विपक्ष मंत्री से माफी मांगने पर अड़ा रहा. विधान सभा अध्यक्ष ने मंत्री की टिप्पणी को विलोपित किया. विपक्ष ने हंगामा करते हुए अमर्यादित भाषा का आरोप लगाया. हंगामा के बाद डॉ. रमन सिंह,अजय चंद्राकर,नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक समेत अन्य विधायक निलंबित हो गए. कुछ देर के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने निलंबन समाप्त किया. सदन की कार्यवाही पुनः शुरू होते ही हंगामा जारी रहा. विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मैंने टिप्पणी को विलोपित कर दिया है. अब मंत्री जी के विवेक पर है कि उन्हें अपनी टिप्पणी पर क्या कहना है. मंत्री अमरजीत भगत ने अपनी टिप्पणी पर खेद व्यक्त किया. 5 मिनट के बाद निलंबन समाप्त किया. निलंबन समाप्ति के बाद विपक्ष ने मंत्री अमरजीत भगत के सवालों के जवाब में भाग नहीं लेने की बात कही. विपक्ष ने कहा कि आज मंत्री अमरजीत किसी सवाल-जवाब में भाग नहीं लेंगे.

सदन में पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह ने धान उपार्जन केंद्रों से उठाव और नीति का मुद्दा उठाया. डॉ रमन सिंह ने सदन में परिवहन नीति पर भी सवाल पूछा. पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने पूछा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में कुल कितने धान उपार्जन केंद्र हैं ? खरीफ सीजन वर्ष 2020-21 में खरीदे गए धान का माहवार उठाव का विवरण? साथ ही किन-किन महीनों में कितना कितना धान, राईस मिलरों को दिया गया और कितना कितना धान संग्रहण केंद्र में परिवहनकर्ताओं को भंडारण हेतु दिया गया, जिलेवार विवरण देवें ? कितने धान की बिक्री नीलामी के माध्यम से की गई तथा बिक्री किए गए धान का उठाव कितना हो गया तथा कितना शेष है ? जिलेवार विवरण दें? पिछले प्रश्न के अंतर्गत यदि किसी महीने में धान का उठाव नहीं किया गया तो उक्त महीने में क्या राईस मिलरों ने धान के उठाव हेतु रूचि नहीं दिखाई या संग्रहण केंद्रों में धान भंडारण की क्षमता से ज्यादा हो गया था?

खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने जवाब देते हुए कहा कि राज्य में खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में कुल 2311 धान उपार्जन केन्द्र संचालित थे. खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में उपार्जित किये गये धान में से कस्टम मिलरों को उपार्जन केन्द्रों से 59.12 लाख में, टन धान तथा संग्रहण केन्द्रों से 20.18 लाख मीट्रिक टन धान कुल 79.30 लाख मीट्रिक टन धान प्रदाय किया गया है. परिवहनकर्ताओं को संग्रहण केन्द्रों में धान भण्डारण हेतु 22.38 लाख मीट्रिक टन धान प्रदाय किया गया है. खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में नीलामी के माध्यम से 8.97 लाख मे. टन धान का विक्रय किया गया. जिसमें से 8.96 लाख मीट्रिक टन धान का उठाव किया जा चुका है तथा 564 मैट्रिक टन धान उठाव हेतु शेष है. जिसके उठाव की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है. खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में कस्टम मिलरों द्वारा धान उपार्जन के प्रारंभ से ही लगातार धान का उठाव किया गया है एवं संग्रहण केन्द्रों की भण्डारण क्षमता अनुसार ही धान का भण्डारण किया गया था.

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