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लैब में जांच की सुविधा सीमित, सैंपल डंप चार दिनों तक नहीं मिल रही कोरोना रिपोर्ट

सैंपल देकर असमंजस की स्थिति में फंस रहे जांच कराने वाले, जब तक रिपोर्ट आती है, तब तक व्यक्ति स्वस्थ, फिर भी बंधन, न बाहर निकल पा रहे और न होम आइसोलेशन में रह पा रहे मरीज। पढ़िए पूरी ख़बर..

लैब में जांच की सुविधा सीमित, सैंपल डंप चार दिनों तक नहीं मिल रही कोरोना रिपोर्ट
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रायपुर: कोविड संक्रमितों की पहचान के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों के सैंपल लेने के जोश में बड़ी संख्या में सैंपल डंप होने लगे है। लक्षण दिखने के आधार पर सैंपल देने के बाद चार-पांच दिनों तक रिपोर्ट नहीं मिलने की वजह से लोग असमंजस की स्थिति मेें आने लगे हैं। रिपोेर्ट में देरी होने की वजह से न वे बाहर निकल पा रहे हैं और न होम आइसोलेशन में रह पा रहे हैं। कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने ज्यादा से ज्यादा आरटीपीसीआर सैंपल लेने के निर्देश मैदानी अमले को दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार सैंपल भी एकत्रित कर रही है, मगर जांच के साधन सीमित होने की वजह से जांच सही समय पर पूरी नहीं हो पा रहा है और सैंपल डंप होते जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अभी मेडिकल काॅलेज में चार दिन पुराने सैंपल की जांच वेटिंग में है और रोजाना सैंपल की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सैंपल की जांच नहीं होने का सीधा असर आम लोगों पर हो रहा है और निगेटिव तथा पाॅजिटिव के असमंजस में वे तनाव में आने लगे हैं। जानकारी के मुताबिक लक्षण के आधार पर कोविड केंद्र तक जाकर अपनी जांच कराने वालों को उनके सैंपल की रिपोर्ट चार-पांच दिन तक नहीं मिल रही है।

रिपोर्ट मिलने तक व्यक्ति स्वस्थ

प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही लैब से रिपोर्ट मिलने में लेटलतीफी सामने आ रही है। ऐसे में देखा जा रहा है कि जब तक सैंपलों की जांच होती है रिपोर्ट मिलती है, तब तक व्यक्ति बीमार होकर ठीक भी हो जाता है। इसके बावजूद देर से रिपोर्ट मिलने पर उसे कोरोना प्रोटोकॉल के तहत जांच कराने से लेकर रिपोर्ट आने के सात दिनों तक आइसोलेट रहना पड़ता है। इस तरह सात दिन के आइसोलेशन की अवधि बढ़कर दस से बारह दिनों की हो रही है। जबकि संक्रमितों को ठीक होने में अधिकतम पांच दिन लग रहा है।

प्रदेश में नौ लैब

प्रदेश के 9 मेडिकल कॉलेजों रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, राजनांदगांव, रायगढ़, अंबिकापुर, कोरबा, महासमुंद और कांकेर के वॉयरोलॉजी लैब में आरटीपीसीआर जांच की सुविधा है। इसके साथ ही कोरिया के बैकुंठपुर में भी एक प्रयोगशाला संचालित है। एम्स में भी आरटीपीसीआर की सुविधा है, इन सबको मिलाकर एक दिन में अधिकतम 10 हजार 500 नमूनों की ही जांच की जा सकती है।

निजी लैब की मदद

नए वैरिएंट की दहशत के कारण इस बार ज्यादा से ज्यादा आरटीपीसीआर सैंपल पर जोर दिया जा रहा है। विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में सैंपल कलेक्ट तो हो रहे हैं, मगर वायरोलॉजी लैब की क्षमता सीमित होने की वजह से जांच भी सीमित है, इसकी वजह से रिपोर्ट सही समय पर नहीं मिल रही है। जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग अब जांच के लिए निजी लैब की भी मदद लेने की तैयारी में है।

सुविधा बढ़ाई जा रही

कोरोना की आरटीपीसीआर जांच के लिए सुविधा बढ़ाई जा रही है। इसके लिए संसाधन और स्टाफ जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।

- डॉ. सुभाष मिश्रा, प्रवक्ता, स्वास्थ्य विभाग

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