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आवश्यक दस्तावेज बनवाने के लिए तहसील बंद, च्वाइस सेंटरों के ज्यादातर काम फंसे

कोरोना संक्रमण के खौफ में तहसील समेत कई शासकीय कार्यालयों में सीमित काम होने की वजह से च्वाइस सेंटरों में आवेदनों की भरमार होने के साथ पेंडेंसी बढ़ गई है। आलम कुछ ऐसा है कि मूल निवास और जाति प्रमाणपत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज पंद्रह दिन के बजाय एक महीने बाद मिल रहे हैं।

जाति प्रमाणपत्र की प्रक्रिया में विसंगतियां, सरलीकरण की बताई जरूरत
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जाति प्रमाण-पत्र (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कोरोना संक्रमण के खौफ में तहसील समेत कई शासकीय कार्यालयों में सीमित काम होने की वजह से च्वाइस सेंटरों में आवेदनों की भरमार होने के साथ पेंडेंसी बढ़ गई है। आलम कुछ ऐसा है कि मूल निवास और जाति प्रमाणपत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज पंद्रह दिन के बजाय एक महीने बाद मिल रहे हैं। आवेदन एप्रूव नहीं किए जाने के कारण च्वाइस सेंटरों में ज्यादातर आवेदन लौटाए जा रहे हैं।

जरूरत के समय आवश्यक दस्तावेज नहीं मिल पाने की वजह से लोग अब भटकने को मजबूर हो रहे हैं। जिले में मौजूद 300 से ज्यादा च्वाइस सेंटरों के खुलने के बाद 5000 से ज्यादा आवेदन स्वीकृत कर ऑनलाइन डाटा अपलोड किया गया है लेकिन यहां पर एप्रूवल नहीं मिलने की वजह से अब लोगों को आवेदन वापस किए जा रहे हैं।

जाति प्रमाणपत्र , मूल निवास, जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने डेढ़ से दो माह का वक्त मांगा जा रहा है ऐसे में जरूरतमंदों काे समय पर दस्तावेज मिलने में मुश्किल हो रही है। आकस्मिक मौत और इंश्योरेंस क्लेम के मामले में बिना प्रमाणपत्र के केस नहीं लिए जा रहे हैं। बीमा कंपनियों की ओर से अधूरे दस्तावेजों पर बीमा क्लेम स्वीकृत नहीं किए जाने की स्थित में पीड़ित पक्षकारों को इधर-उधर हलाकान होना पड़ रहा है।

शंकरनगर निवासी नीलांचल ने शादी के बाद पत्नी का नया आधारकार्ड बनाने आवेदन किया। इस आवेदन के स्वीकृत किए जाने के बाद भी नया कार्ड नहीं बन सका है। आवेदक ने बताया, आवेदन जमा किए पौने दो महीने गुजर गए लेकिन काम आगे नहीं बढ़ सका।

मारवाड़ी श्मशानघाट की ओर रहने वाले एक पीड़ित ने बताया है कि उनके पिता के निधन के बाद से मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए भटक रहे हैं। प्रमाणपत्र के बगैर बीमा क्लेम कर पाना मुश्किल हो गया है। पुलिस थाने जाने पर आवेदन में रिसीविंग तक नहीं दी जा रही है ऐसे में बड़ी परेशानी हो रही है।

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तहसील कार्यालय बंद होने की वजह से नामांतरण और सीमांकन-बटांकन का काम लगभग प्रभावित ही है। जमीन कारोबार में इस स्थिति का बहुत बुरा असर पड़ा है, जहां पर आम लोगाें को बहुत नुकसान उठाना पड़ा है। तहसील कार्यालय से सीमांकन, बटांकन कार्य किया जाना प्रस्तावित है, लेकिन अफसरों-कर्मियों की सुस्ती की वजह से उन्हें मायूस लौटना पड़ रहा है।

तहसील बंद, च्वाइस सेंटरों के ज्यादातर काम फंसे

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