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सर्वे का सर्वे, घर-घर पहुंचने का दावा फर्जी, आधा दर्जन जिलों के लोगों ने कहा- कोई झांका तक नहीं

आधे घरों तक नहीं पहुंच पाई कोरोना टीम, अब 31 दिसंबर तक सर्वे

सर्वे का सर्वे, घर-घर पहुंचने का दावा फर्जी, आधा दर्जन जिलों के लोगों ने कहा- कोई झांका तक नहीं
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रायपुर. प्रदेश में कोरोना मरीजों की पहचान के लिए कराए गए सर्वे की सच्चाई जानने के लिए हरिभूमि ने आधा दर्जन जिलों में सर्वे किया। दावा था कि प्रदेश के 55 लाख घरों में पहुंचकर यह जाना जाएगा कि कोई कोरोना मरीज तो नहीं है। या किसी व्यक्ति में कोरोना के लक्षण तो नहीं हैं। हरिभूमि की जांच में यह बात सामने आई है कि कई जिलों के 50 फीसदी से ज्यादा लोगों के घरों तक टीम ही नहीं पहुंची। अब 31 िदसंबर तक प्रदेश में कोरोना सघन सामुदायिक सर्वे अभियान चलाया जाएगा, इस बारे मे अपर मुख्य सचिव रेणु जी. पिल्लै ने कलेक्टरों को आदेश जारी किया है।

प्रभािवत आधा दर्जन जिलों के लोगों का ही कहना है, सर्वे के नाम पर महज खानापूर्ति की गई है। राजधानी रायपुर में भी यह स्थिति रही है कि कुछ गली-मोहल्ले में मन मुताबिक घरों में जाकर पूछताछ की गई और बाकी जगह अपने मन से फार्म में जानकारी लिख दी गई। राजधानी में ही कई कालोनियों और बस्ती के लोगों की शिकायत रही कि सर्वे टीम के दर्शन तक नहीं हुए। हरिभूमि टीम ने अलग-अलग कालोनियों में सौ से ज्यादा लोगों से पूछा तो 80 से ज्यादा का जवाब था कि टीम उनके यहां नहीं पहुंची। पांच से बारह अक्टूबर तक सर्दी-खांसी बुखार तथा अन्य लक्षण के आधार पर कोरोना के मरीजों के मरीजों की पहचान के लिए प्रदेश के सभी जिलों में अभियान चलाया गया। इसमें दावा किया गया प्रदेश के 55 लाख 92 हजार 394 घरों में सर्वे किया गया, जिसमें एक लाख 16 हजार 250 मरीजों में कोरोना के लक्षण मिले हैं। एक लाख सात हजार 414 का टेस्ट किया गया, जिसमें से 6571 पाजिटिव मिले। इस दावे काे परखने के लिए हरिभूमि की टीम ने कई जिलों में सर्वे कराया तो यह सच्चाई सामने आई है कि ज्यादातर जिलों में कुछ प्रतिशत घरों तक ही सरकारी जांच टीम पहुंची।

कवर्धा में यही हाल

कवर्धा में 5 से 12 अक्टूबर तक जिले भर के कुल 181835 घरों में दस्तख देकर लक्षण वाले व गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों को चिंहित कर उनकी जांच कराई है। आंकड़ों मुताबिक इस अभियान में कुल 1884 लक्षण युक्त व 412 उच्च जोखिम वाले लोगों की पहचान की गई। लेकिन लोगों की माने तो यह सर्वे सिर्फ औपचारिकता थी। सर्वे टीम जिन भी घरों तक पहुंची वहां पर लोगों से न तो सही ढंग से जानकारी ली गई और न ही दी गई जानकारी के हिसाब से कार्यवाही की गई। कुछ लोगों का तो आरोप यह भी है कि उनके घरों तक सर्वे टीम पहुंची ही नहीं। यही वजह है कि जिले में इस 8 दिन के कोरोना सघन सर्वे अभियान के बाद भी जिले में हर रोज कोरोना संक्रमण के आंकड़े बढ़ रहे हैं। गुरूवार को ही जिले में 110 कोरोना संक्रमित नए मरीज मिले हैं जबकि इससे पूर्व भी यह आंकड़ा 60 से ऊपर ही रहा है।

अफसर बोले- संभव नहीं था

अफसर खुलकर इस मामले पर नहीं बोलना चाहते। लेकिन कहते हैं कि इतनी आबादी के पास सप्ताहभर में जाना संभव नहीं था। सर्वे टीम जहां जा सकती थी वहां तक पहंची। लेकिन हर घर में जाना मुश्किल है। लोगों के आरोप पर कहा कि ऐसा हो सकता है कि हर घर का सर्वे नहीं हो पाया हो।

राजधानी : कालोनियों में सर्वे ही नहीं हुआ

अमलीडीह के श्रीजी कचनार सोसायटी के राजकुमार सिंह के मुताबिक कालोनी में 89 घर है जहां कोई भी सर्वे करने वाली टीम नहीं पहुंची। टिकरापारा उमंग कालोनी में रहने वाले पीके सिंह ने बताया कि कालोनी में करीब पचास घर हैं, जिसमें से आठ दस घरों में ही सर्वे किया गया। मठपारा के प्राथमिक शाला के पास रहने वाले प्रकाश यादव ने बताया कि यहां उनके घर से किसी तरह की जानकारी नहीं ली गई। देवेन्द्र नगर के सुनील वोरा, इसी तरह डंगनिया सजल शर्मा, सुंदर नगर नीलेश ठाकुर, अश्विनीनगर के रजनीकांत पांडे, पेंशनबाड़ा संजय यादव, एकता नगर गुढ़ियारी अनिल गुप्ता, हांडीपारा, लाखे नगर, शंकर नगर, अवंति विहार, डीडीनगर समेत कई इलाकों में कोरोना की जानकारी जुटाने के लिए टीम नहीं पहुंची।

बिलासपुर : घर बैठे सर्वे

बिलासपुर जिले में 6 लाख से अधिक लोगों से संपर्क का दावा किया गया, पर हकीकत यह है कि शहर की ही पॉश कालोनियों तक विभाग की टीम नहीं पहुंची। विभाग ने कागजों में ही अभियान को सफल बता दिया है। बाबजी पार्क निवासी कुश पटेल ने बताया, जुलाई के महीने में विभाग की टीम आई थी इसके बाद अब तक कोई भी पूछताछ करने नहीं आया है जबकि कालोनी में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या अधिक पाई गई है। शांति नगर निवासी एडवोकेट शुभा श्रीवास्तव ने कहा कि शांति नगर में कोरोना संक्रमण फैलने के बाद भी अब तक प्रशासन के तरफ से कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा है। वन विभाग के रिटायर्ड अधिकारी ओपी चौबे ने कहा कि इन 7 दिनों में भी विभाग की टीम कालोनी तक नहीं पहुंची है। नेहरु नगर साई मंदिर के पास रहने वाले राजू राजन ने कहा कि कालोनी में हर दिन कोरोना संक्रमित मरीज पाए जा रहे हैं। इसके बाद भी आसपास क्षेत्र में कोरोना की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग के लोग अब तक नहीं आए है। ओम गार्डन निवासी सलीम कुरैशी ने बताया कि ओम गार्डन ही नहीं आसपास के क्षेत्र तक में स्वास्थ्य विभाग के लोग सर्वे करने नहीं पहुंचे है,जबकि इस क्षेत्र में भी काेरोना से संक्रमित मरीज पाए गए हैं।

कोरिया : केवल नाम पूछकर चली गई टीम

कोरिया में 9 दिनों में 13 अक्टूबर तक कुल 1 लाख 40 हजार 863 परिवारों के घरों तक पहुंचने का दावा किया गया है, जबकि इससे ज्यादा जिले में राशन कार्डधारी परिवारों की संख्या है। इस सर्वे से कई परिवार दूर रहे, कई परिवार वालों का कहना है कि सर्वे की टीम तो पहुंची लेकिन परिवार से संबंधित जानकारी पूछते हुए आगे बढ़ते चले गए। बैकुंठपुर नपा अंतर्गत कचहरीपारा निवासी सुरेन्द्र सिंह ने बताया, टीम कब वार्ड में आई, इसकी जानकारी ही नहीं है। वहीं नगर पालिका मनेन्द्रगढ़ में पड़ताल की गई तो वार्ड क्रमांक 14 निवासी तीजा बाई पति स्व पूरन लाल ने बताया कि सर्वे की टीम हमारे घर में पहुंची ही नहीं। वार्ड क्रमांक 4 महौरपारा निवासी अली शेर पिता अब्दुल हक ने बताया कि उनके पास कोई पूछने नहीं आया।सर्वे के नाम पर औपचारिकता निभाई गई है।

जांजगीर चांपा : नहीं पहुंची टीम

जिला मुख्यालय जांजगीर के वार्ड क्रमांक 20 बीएसएनएल टावर गली निवासी कमलेश शर्मा ने बताया, उनके यहां सर्वे टीम पहुंची ही नहीं है। इसी प्रकार रवि बरेट करण शर्मा ने भी बताया, उनके मोहल्ले में सर्वे टीम पहुंची ही नहीं है। इधर जांजगीर के ही वार्ड क्रमांक 17 निवासी रमाकांत मिश्रा ने बताया, पिछले दिनों 1-2 कर्मचारी मोहल्ले में आए थे और तिराहे पर खड़े हुए इस दौरान दरवाजे पर निकले 1-2 घरों के लोगों को सर्दी खांसी बुखार होने की बात पूछी और नहीं का जवाब सुनते ही वहां से चले गए। इसी प्रकार वार्ड क्रमांक 6 बीडी महंत नगर जांजगीर निवासी ललिता साहू, सोनम यादव, पूराइन बाई साहू, रमेश कश्यप आदि ने बताया, मोहल्ले में सर्वे टीम पहुंची थी, लेकिन सभी घरों में जाकर पूछने के बजाये गली में ही खड़े होकर 4-6 लोगों से पूछ कर लौट गई।

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