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स्पेशल रिपोर्ट: लावारिस मिले, लावारिस ही रह गए, कई लाशों का राज फाइलों में दफन

रायपुर जिले में बीते 5 साल में 20 से अधिक लावारिस लाशों की पहचान नहीं हो सकी, पुलिस जांच में लावारिस लाशों के नहीं मिले परिजन, कइयों की फाइल बंद, आंबेडकर अस्पताल में भर्ती दूसरे जिले के मरीजों की मौत के बाद परिजन हो जाते थे गायब.. पढ़िए स्पेशल रिपोर्ट...

स्पेशल रिपोर्ट: लावारिस मिले, लावारिस ही रह गए, कई लाशों का राज फाइलों में दफन
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रायपुर: लावारिस मिले, लावारिस ही रह गए, मरने के बाद भी उनको परिजनों का साया नसीब नहीं हुआ। यह कहानी नहीं, बल्कि लावारिस लाशों की हकीकत है। रायपुर जिले में हर साल कई लावारिस लाशें मिलती हैं। इनमें कुछ की पहचान होती है, लेकिन कुछ की पहचान ही नहीं होती है। पुलिस भी परिजनों की तलाश करती है, लेकिन उनका पता नहीं लगता है तो पुलिस खात्मा पेश कर कानूनी कारगुजारी पूरी कर देती है। ऐसी एक-दो नहीं, बल्कि पांच साल में 13 लाशें मिल चुकी हैं, जिनके मौत का राज सरकारी फाइलों में दफन हो गया यानी पुलिस ने लावारिस लाशों की जांच पूरी कर कोर्ट में खात्मा पेश कर दिया। कोर्ट ने भी फाइलों को रिकॉर्ड रूम में रखने का आदेश जारी कर दिया।

13 लावारिस लाशों का खात्मा पेश

जानकारी के मुताबिक रायपुर जिले में हर साल करीब 7 से 8 लावारिस लाशें मिलती हैं। इस हिसाब से बीते 5 साल में करीब 35 से 40 लाशें मिली हैं। इनमें अधिकांश लाशों की शिनाख्त हो गई, लेकिन 13 लाशों की शिनाख्त नहीं हो सकी। इनमें खात्मा रिपोर्ट पेश कर दी गई है।

छोड़ जाते हैं लाशें

जानकारों के मुताबिक मौदहापारा थाने में साल 2021 में अब तक 17 लावारिस लाशें मिल चुकी हैं, जिनकी शिनाख्त नहीं हो सकी है। सबसे अहम है, इनमें अधिकांश लाशें आंबेडकर अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मृत मरीजों की शामिल हैं। इनकी मौत के बाद मौदहापारा पुलिस महीनों से उनके परिजनों को तलाश रही है।

72 घंटे तक लाश रखने का नियम

जानकारी के मुताबिक लावारिस लाश मिलने के बाद पुलिस उसे पोस्टमार्टम हाउस भेजती है। वहां करीब 72 घंटे तक लाश को सुरक्षित रखना अनिवार्य होता है। इस अवधि में लाश की पहचान नहीं होती है तो लाश का अंतिम संस्कार कर दिया जाता है।

छोड़ जाते हैं लाशें

जानकारों के मुताबिक मौदहापारा थाने में साल 2021 में अब तक 17 लावारिस लाशें मिल चुकी हैं, जिनकी शिनाख्त नहीं हो सकी है। सबसे अहम है, इनमें अधिकांश लाशें आंबेडकर अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मृत मरीजों की शामिल हैं। इनकी मौत के बाद मौदहापारा पुलिस महीनों से उनके परिजनों को तलाश रही है।

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