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स्पेशल रिपोर्ट: केंद्र के पेंच ने की सोसायटियों की हालत पतली, लाखों टन मोटा धान केंद्रों में जाम

केंद्र सरकार ने उसना चावल खरीदी से मना कर दिया है। लेकिन राज्य सरकार सभी प्रकार की धान की खरीदी कर रही है। ऐसे में जो उसना चावल बनाने वाले मिलर्स हैं। वे संकट में आ गए है। जिले के 130 खरीदी केंद्रों में उसना का ढेर लगा हुआ है और बोरियों में भरकर उसे किनारे रख दिया गया है। पढ़िए प्रदेश भर के धान केंद्रों का विस्तृत ब्यौरा..

स्पेशल रिपोर्ट: केंद्र के पेंच ने की सोसायटियों की हालत पतली, लाखों टन मोटा धान केंद्रों में जाम
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रायपुर: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को 28 दिन पूरे हो गए। अब तक 66 लाख 91 हजार 826 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। राज्य में मोटा, सरना और पतला धान खरीदा जाता है। राज्य 28.99 लाख टन मोटा, 22.66 लाख टन सरना और 9.94 लाख टन पतला धान की खरीदी की जा चुकी है। राज्य सरकार से इस साल केंद्रीय पूल में 37.65 टन और राज्य पूल में 24 लाख मीट्रिक टन चावल जमा कराना है। राज्य में इस बार केंद्रीय पूल में अरवा चावल जमा करने की बाध्यता को देखते हुए उसना और पतला धान से अरवा चावल बनाकर जमा किए जाने मिलिंग के लिए पहले इसका उठाव किया जा रहा है। मोटा धान केंद्रों में जाम है। इससे सोसायटियों की हालत पतली हो गई है। सूखत को लेकर समितियों ने अभी से हाथ खड़े कर दिए हैं।

पढ़िए प्रदेश भर का जिलेवार ब्यौरा

रायपुर: प्रदेश में 40 प्रतिशत मोटा धान और 60 प्रतिशत सरना और पतला धान की किस्म खरीदी जाती है। इनमें से पतला और सरना किस्म के धान से अरवा चावल बनाकर केंद्रीय पूल में जमा किया जाता है। वहीं मोटा धान से उसना चावल बनता है, यह पूरा स्टेट पूल में जमा किया जाता है। बताया जाता है चूंकि मोटा किस्म का धन जल्दी खराब नहीं होता अत: इसका उठाव बाद में किया जाता है। इस साल केंद्रीय पुल में अरवा चावल जमा करने के लिए सरना और पतला किस्म का धान मिलिंग के लिए मिलर्स को पहले दिया जा रहा है। पालिसी के तहत माेटा किस्म के धान का उठाव धीमी गति से किया जा रहा है।

राजनांदगांव: केंद्र सरकार द्वारा सेंट्रल पुल में उसना चावल लेने से इंकार किए जाने का असर अब जिले की सोसाईटियो में भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। हालात यह है कि अधिकांश सोसाईटियो में सिर्फ सरना धान का ही उठाव हो रहा है वहीं मोटा और पतला धान डंप पड़ा है। राईस मिलर्स द्वारा अरवा चावल के लिए सिर्फ सरना का उठाव किए जाने से सोसाईटियो को अब सूखत की मार भी झेलनी पड़ सकती है।

बलौदा बाजार: संग्रहण केंद्रों में मोटा धान पड़ा हुआ है

बलौदा बाजार में मोटा धान का उठाव नहीं हो पा रहा है। प्रदेश में कस्टम मिलिंग के संबंध में लागू नीति के अनुसार राइस मिलर को 60 प्रतिशत सरना, 35 प्रतिशत मोटा तथा 5 प्रतिशत पतला धान के हिसाब से उठाव करना जरूरी है। बताया गया है कि एफसीआई द्वारा केवल अरवा धान चावल लिए जाने के कारण राइस मिलर द्वारा सरना धान का उठाव कर एफसीआई को चावल जमा किए जाने के कारण जिले को आवंटित 7.3 लाख क्विंटल चावल का कोटा पूरा जमा किया जा चुका है, दूसरी बार आवंटित कोटा भी सोमवार तक पूरा हो जाने की उम्मीद राइस मिलर संघ द्वारा दी गई है, लेकिन नागरिक आपूर्ति निगम को अभी तक कस्टम मिलिंग का चावल नहीं मिल पाने की जानकारी देते हुए बताया गया है कि क्योंकि मोटा धान से अरवा चावल बनाने में टूट ज्यादा आने से राइस मिलर को नुकसान होता है। अतः राइस मिलर मोटा धान का उठाव नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण संग्रहण केंद्रों में मोटा धान पड़ा हुआ है।

रायगढ़: मिलर्स कर रहे सरना का उठाव, मोटा डंप

जिला विपणन अधिकारी एसके गुप्ता ने बताया कि नियमत: विभाग से दोनों प्रकार के धान के उठाव का डीओ बराबर अनुपात मे कटता है, लेकिन सरकारी सोसायटी द्वारा खरीदे गए पतले सरना धान का चावल ही भारतीय खाद्य निगम मे जमा होता है। इसमें चावल की गुणवत्ता व एज टेस्ट के जटिल प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है, जबकि मोटा धान नागरिक आपूर्ति निगम के भण्डार गृह में भेजा जाता है, जहां धान का एज टेस्ट नहीं होता। इसलिए एफसीआई में क्वालिटी टेस्ट के कारण पतले धान का उठाव मिलर्स पहले कर रहे हैं। डीएमओ श्री गुप्ता ने बताया कि मोटे धान का भी उठाव हो रहा है, किंतु गति धीमी है। वहीं उसना धान को संग्रहण केंद्रों तक पंहुचाया जा चुका है।

गरियाबंद: नुकसान होने के अधिक संभावनाएं हैं

गरियाबंद में उपार्जन केंद्रों में बंपर धान की ख़रीदी हुई है। किसानों ने पतला व मोटा किस्म के धान केंद्रों में बेचे हैं। देखा यह गया है कि ट्रांसपोर्ट कंपनी ने नजदीक के धान खरीदी केंद्र से धान का उठाव अधिक किया है, जबकि मैनपुर देवभोग जैसे दूरस्थ क्षेत्र के उपार्जन केंद्रों में धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है। इधर जिले के मिलर्स ज्यादातर पतला धान का उठाव कर रहे है। जिसके चलते उपार्जन केंद्रों में खरीदे गए धान पड़े हुए है। धान का उठाव नहीं होने से नुकसान होने के अधिक संभावनाएं हैं। शुक्रवार शाम तक के रिपोर्ट के मुताबिक जिले के 58408 किसान अपना धान बेच चुके हैं। अब तक 23 लाख क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी है। जिसमें से 50 फीसदी अर्थात साढे 10 लाख क्विंटल धान का उठाव हो गया है। धान के उठाव में मोटा पतला नहीं देखा जा रहा है। जिले के खाद्य अधिकारी जन्मजय नायक के मुताबिक यहां किसी भी तरह से कोई परेशानी नहीं है। विभाग के टीम सतत निगरानी रखे हुए है।

महासमुंद: केंद्रों में 28 लाख क्विंटल धान जाम

महासमुंद की सोसायटियों में उठाव नहीं हो पाने के चलते धान जाम की स्थिति है। वहीं जगह की कमी के चलते धान खरीदी की गति भी धीमी हो गई है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में उठाव नहीं होने की समस्या को लेकर समिति कर्मचारियों ने आगामी 10 जनवरी से खरीदी बंद करने की चेतावनी दे दी थी। लेकिन, आनन-फानन में उनकी समितियों के डीओ और टीओ जारी कर उन्हें आंदोलन में जाने से प्रशासन ने रोका। फिर भी उठाव नही होने से जिले के खरीदी केंद्रों में 28 लाख क्विंटल से धान जाम है। केंद्र सरकार द्वारा उसना चावल नहीं लिए जाने की घोषणा के बाद उसना मिलें बंद हो चुकी हैं। वहीं मिलरों को उठाव के लिए पहले मोटे धान का डीओ काटा जा रहा है। मोटा धान की अरवा मिलिंग को लेकर मिलरों की परेशानी यह है कि मोटा धान की मिलिंग में अधिक लागत आती है। इसके चलते मोटा धान उसना मिलरों द्वारा उठाया जाता रहा है और लेव्ही में यही चावल दिया जाता रहा है। मिली जानकारी के अनुसार उठाव के लिए 9300 सौ मिट्रिक टन का डीओ और 6100 सौ मिट्रिक टन का टीईओ जारी किया जा चुका है।

भिलाई: भिलाई में अबतक 21 लाख 79 हजार 985 क्विंटल धान की खरीदी की गई है। इसमें से 18 लाख 22 हजार 552 क्विंटल धान का उठाव किया जा चुका है और 35 लाख 7 हजार 433 क्विंटल धान का उठाव नहीं हुआ है। हालांकि सीएम का गृह जिला होने की वजह से शासन के दबाव में मिलर्स को साफ निर्देश है कि वे नियमित रूप से सभी प्रकार के धान का उठाव करें, लेकिन अभी भी धान केंद्रों में पड़ी हैं। विभाग की मानें तो 1 दिसंबर से धान की खरीदी शुरू हुई है। तब से लेकर अबतक 10 लाख 31 हजार 814 क्विंटल मोटा धान की खरीदी की गई है। इसमें से 9 हजार 52 हजार 855 क्विंटल धान का उठाव मिलर्स ने कर लिया है, लेकिन अभी भी केंद्र में 78 हजार 959 क्विंटल धान खरीदी केंद्रों में ही रखा हुआ है।

उसना वाले भी अरवा के नाम से कर लिए पंजीयन

केंद्र सरकार ने उसना चावल खरीदी से मना कर दिया है। लेकिन राज्य सरकार सभी प्रकार की धान की खरीदी कर रही है। ऐसे में जो उसना चावल बनाने वाले मिलर्स हैं। वे संकट में आ गए है। ऐसे में मिलर्स में काफी नाराजगी थी। बड़ी मशक्कत के बाद शासन और मिलर्स के बीच संवाद हुआ और सामजंस्य बना है। 131 मिलर्स ने अपना पंजीयन कराया है। इसमें 40 उसना चावल बनाने वाले मिलर्स थे। जिन्होंने भी पंजीयन किया है, लेकिन वे उसना के नाम से नहीं बल्की अरवा के नाम से पंजीयन कर अपने मिल को उसना के बदले अरवा मिल में अपडेट कर लिया है।

दुर्ग: केंद्र में जमा है 3 लाख 57 हजार 432 क्विंटल धान

दुर्ग के धान खरीदी केंद्रों में धान रखा है, लेकिन इसके अलावा खरीदी केंद्र से उठाव कर संग्रहण केंद्र में भी धान रखा है। संग्रहण केंद्र से मिलर्स धान का उठाव करते हैं और मिल में ले जाकर धान को चावल बनाते हैं, लेकिन संग्रहण केंद्रों से मिलर्स धान का पूरा उठाव नहीं कर पा रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार संग्रहण केंद्रो में 78 हजार 958 क्विंटल मोटा, 1 लाख 94 हजार 235 क्विंटल पतला और 84 हजार 238 क्विंटल सरना धान रखा हुआ है। जिले में 60 प्रतिशत सरना, 10 प्रतिशत मोटा और 13 प्रतिशत पतला धान की खरीदी की जाती है।

सेंदरी, लखराम, सेलर जैसे बड़े केंद्रों में किसानों से खरीदी तो की जा रही है, लेकिन उसना धान का परिवहन नहीं हो रहा है। कुछ समिति प्रबंधकों ने प्रशासन को पत्र लिखकर इस बारे में अवगत भी कराया है। एफसीआई और नान में भी फिलहाल अरवा चावल ही जमा हो रहा है। जिले के 18 उसना प्लांटों में भी अरवा चावल की मिलिंग की जा रही है। मिलर्स सीधे समितियों से धान का उठाव कर रहे हैं, लेकिन उठाव में मिलर्स पतला धान के बदले मोटा और सरना धान उठाव में अधिक रुचि ले रहे हैं। इसके कारण समिति से पतला धान का जमाव अधिक होने लगा है। जिले के अधिकांश समितियों में यही स्थिति है।

कुल 1900 राइस मिलें, इनमें 450 उसना

प्रदेश में 1900 राइस मिलें हैं और इनमें 450 उसना मिलें हैं यानी 25 फीसदी राइस मिलें उसना चावल का उत्पादन करती हैं। उनकी क्षमता राइस मिलों की कुल क्षमता का 40 फीसदी है। साथ ही छत्तीसगढ़ में 40 फीसदी ऐसे धान की खेती होती है, जिससे उसना चावल ही बन सकता है। अरवा मिलिंग करने पर चावल में ब्रोकन ज्यादा आता है। जिला विपणन अधिकारी उपेंद्र खांडे के मुताबिक उसना का तो इस बार अभी तक टारगेट ही नहीं आया है। राज्य शासन द्वारा जैसा आदेश दिया जाएगा, उसका पालन करेंगे।

मिली जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा उसना चांवल नहीं लेने के कारण सोसाईटियो की माली हालत खराब होने के आसार दिखाई देने लगे है। आंकड़ो की माने तो जिले में अभी तक 20 लाख क्विंटल धान का उठाव हुआ है जिसमें पचास फीसदी से ज्यादा सरना धान ही है। वहीं मोटा और पतले धान को संग्रहण केंद्र में डंप किया जा रहा है।

मिलर्स नहीं दिखा रहे रूचि

राज्य शासन द्वारा कस्टम मिलिंग की दर को बढ़ाए जाने के बाद भी मिलर्स मिलिंग में ज्यादा रूचि नहीं दिखा रहे है। मिलर्स का कहना है कि उसना चांवल नहीं लेने के कारण काफी दिक्कतें आ रही है। जिले में अभी तक 10 लाख क्विंटल धान का डीओ कटा है। मिलर्स ने अभी तक नौ लाख क्विटंल धान का उठाव किया है। जिसमें करीब छह लाख क्विंटल धान सरना किस्म का है वहीं पतले और मोटे किस्म के धान का सिर्फ 35 फीसदी ही उठाव किया गया है।

उसना की मिल में अरवा का उत्पादन

जिले में उसना की 18 मिले है। केंद्र सरकार द्वारा उसना नहीं लिए जाने के चलते इस बार यह मिल बंद होने की कगार पर आ गयी थी लेकिन मिलर्स ने नुकसान से बचने उसना मिलो में अरवा का उत्पादन शुरू कर दिया है।

आगे आएगी दिक्कतें

सेट्रल पुल में सरना धान से अरवा चावल की सप्लाई किए जाने के बाद संग्रहण केंद्र में डंप पड़े मोटे और पतले किस्म के धान की मिलिंग का दौर शुरू होगा। ऐसा माना जा रहा है कि मोटे और पतले किस्म के धान से बनने वाले मोटे चावल की सप्लाई नागरिक आपूर्ति निगम को की जाएगी। यहां से यह चावल राशन दुकानो में भेजा जाएगा।

समस्या का हल निकालेंगे

मिलर्स ने अपनी परेशानियों से अवगत कराया है। वर्तमान में क्या स्थिति है, इसकी जानकारी ली जा रही है। इसमें यदि कोई समस्या है तो केंद्र और राज्य स्तर पर बातचीत करते हुए उसका हल जरूर निकाला जाएगा।

- अरुण साव, सांसद, बिलासपुर

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