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श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर विधानसभा अध्यक्ष ने दी श्रद्धांजलि, भाजपा के सभी विधायक नदारद

डॉ. श्यामा प्रसाद भाजपा के जनक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जयंती के अवसर पर विधानसभा में परंपराओं के अनुरुप पुष्प अर्पित कर विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने श्रद्धांजलि दी। हैरानी की बात यह रही कि जनसंघ के संस्थापक को नमन करने के इस कार्यक्रम में भाजपा की ओर से कोई मौजूद नहीं था। भाजपा की ओर से विधानसभा में किसी भी विधायक का इस कार्यक्रम में मौजूद ना होना चर्चा का विषय बना रहा। पढ़िए पूरी खबर-

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर विधानसभा अध्यक्ष ने दी श्रद्धांजलि, भाजपा के सभी विधायक नदारद
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रायपुर। देशभर में आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 120वीं जयंती मनाई जा रही है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ही वो पहले शख्स थे जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में धारा 370 का विरोध किया था। डॉ. श्यामा प्रसाद भाजपा के जनक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जयंती के अवसर पर विधानसभा में परंपराओं के अनुरुप पुष्प अर्पित कर विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने श्रद्धांजलि दी। हैरानी की बात यह रही कि जनसंघ के संस्थापक को नमन करने के इस कार्यक्रम में भाजपा की ओर से कोई मौजूद नहीं था। भाजपा की ओर से विधानसभा में किसी भी विधायक का इस कार्यक्रम में मौजूद ना होना चर्चा का विषय बना रहा।

विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने पुष्पांजलि कार्यक्रम के बाद कहा- 'वे बहुत बड़े शिक्षाविद थे, बंगाल प्रांत के वित्तमंत्री थे,आदरणीय नेहरु जी के साथ कैबिनेट मंत्री के रुप में उन्होंने कार्य किया..आज पूरा देश उनको नमन करता है.. विधानसभा छत्तीसगढ़ की ओर से आज हम सब उनको नमन करने के लिए उपस्थित हुए हैं'

नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक के कार्यालय से इस संबंध में जानकारी दी गई है कि, कार्यक्रम की सूचना विधानसभा से आई थी लेकिन नेता प्रतिपक्ष अपने क्षेत्र में है, और वहीं पर डॉ. श्यामा प्रसाद जयंती कार्यक्रम भी आयोजित है, वे वहां शामिल होंगे।

विधानसभा सचिवालय की ओर से बताया गया है कि सभी माननीय सदस्यों को सूचना भेजी गई थी, केंद्रीय कक्ष में जिनके भी तैल चित्र हैं, उनकी जयंती पर नियमित कार्यक्रम होता है।

डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में धारा 370 का विरोध सबसे पहले किया था। उनका मानना था कि इससे देश की अखंडता को धक्का लगेगा और ये देश की एकता में बाधक होगा। 23 जून 1953 को संदिग्ध परिस्थिति में उनकी मौत हो गई थी।

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