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छत्तीसगढ़ में अब तक कोरोना के 4300 के मरीज मिले, स्वस्थ होकर लौटे 3200

बढ़ रहे कोरोना संक्रमण मगर घबराएं नहीं, पांच से दस दिन में ही ठीक हो रहे मरीज

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रायपुर. प्रदेश में अब तक मिले 4300 के लगभग मरीजों में से 3200 से ज्यादा मरीज यानी 76 प्रतिशत स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। वर्तमान में रायपुर को छोड़कर शेष 27 जिलों में एक्टिव मरीजों की संख्या दहाई तक सीमित है। चार माह पहले विदेश से लौटने वाले विद्यार्थियों के साथ कोरोना के वायरस ने प्रदेश में दस्तक दी थी। इसके बाद धीरे-धीरे मरीज बढ़ते चले गए और वर्तमान में रोजाना औसत 80 से ज्यादा मरीजाें के सामने आने के बाद कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 4300 के करीब पहुंच गई है। इसके बाद भी स्थिति चिंताजनक नहीं है, क्योंकि प्रदेश में सामने आने वाले आधे से ज्यादा मरीज स्वस्थ होकर वापस घर लौट चुके हैं।

गंभीर और पुरानी बीमारी से पीड़ित मरीजों को छोड़कर ज्यादातर मरीज सामान्य बुखार और सर्दी-खांसी की तरह पांच से दस दिनों के भीतर ठीक हो जा रहे हैं। जिन मरीजों में इलाज की अवधि के दौरान किसी तरह के लक्षण भी दिखाई नहीं पड़ रहे हैं, उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने के वक्त भी आरटीपीसीआर की रिपोर्ट निगेटिव आने का भी इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। प्रदेश में अब तक दस माह के छोटे बच्चे से लेकर 89 वर्ष के मरीज कोरोना अस्पतालों से स्वस्थ होकर वापस घर लौट चुके है। इनमें से कई ऐसे मरीज भी रहे हैं, जो कोरोना के साथ अन्य गंभीर बीमारियों से भी जूझ रहे थे, इसके बाद भी अस्पतालों में लक्षण के आधार पर दी जाने वाली दवा के असर से वे स्वस्थ हो चुके हैं। वर्तमान में प्रदेश में केवल रायपुर जिले में ही एक्टिव मरीजों की संख्या सैंकड़ों में है, बाकी शेष 27 जिलों में कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या वर्तमान में दहाई से ऊपर नहीं गई है।

डिस्चार्ज करने गाइडलाइन

प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मरीजों की संख्या को ध्यान में रखते हुए आईसीएमआर की गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए राज्य में कोविड अस्पताल के उपचार संबंधी तकनीकी समिति द्वारा दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, जिसमें लक्षण रहित कोरोना पॉजिटिव मरीजों को बिना आरटीपीसीआर में निगेटिव रिपोर्ट के डिस्चार्ज किए जाना शामिल था।

कोविड अस्पतालों से काफी संख्या में रोजाना स्वस्थ होने के बाद मरीज अस्पतालों से डिस्चार्ज हो रहे हैं। इसके बाद भी कोरोना से बचाव के लिए खासकर बुजुर्ग, छोटे बच्चे तथा गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को ध्यान देने की आवश्यकता है।

- डा. निर्मल वर्मा, अतिरिक्त संचालक एवं प्रवक्ता चिकित्सा शिक्षा

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