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सप्रे शाला और दानी गर्ल्स स्कूल मामला : हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, निगम प्रशासन ने स्वीकार किया कि...

सप्रे शाला और दानी गर्ल्स स्कूल मामले में लगी याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 22 जून को मुक़र्रर की है. आज हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता और निगम प्रशासन दोनों ने ही अपना पक्ष रखा. निगम प्रशासन की ओर से कोर्ट में जवाब में कहा गया है कि किसी भी तरह का कोई निर्माण कार्य नहीं चल रहा है. न ही पे़ड़ काटे गए हैं. न ही मैदान को छोटा किया गया है. हालांकि निगम प्रशासन इस बात को स्वीकार किया गया कि दानी स्कूल की बिल्डिंग टूटी है. उसे नए रूप में तैयार किया जाएगा. जिसके लिए सरकार की ओर से 6 करोड़ की स्वीकृति मिली है.

सप्रे शाला और दानी गर्ल्स स्कूल मामला : हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, निगम प्रशासन ने स्वीकार किया कि...
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रायपुर. सप्रे शाला और दानी गर्ल्स स्कूल मामले में लगी याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 22 जून को मुक़र्रर की है. आज हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता और निगम प्रशासन दोनों ने ही अपना पक्ष रखा. निगम प्रशासन की ओर से कोर्ट में जवाब में कहा गया है कि किसी भी तरह का कोई निर्माण कार्य नहीं चल रहा है. न ही पे़ड़ काटे गए हैं. न ही मैदान को छोटा किया गया है. हालांकि निगम प्रशासन इस बात को स्वीकार किया गया कि दानी स्कूल की बिल्डिंग टूटी है. उसे नए रूप में तैयार किया जाएगा. जिसके लिए सरकार की ओर से 6 करोड़ की स्वीकृति मिली है.

दरअसल निगम प्रशासन पर यह आरोप है कि सप्रे शाला और दानी गर्ल्स स्कूल मैदान को छोटा कर वहाँ पर चौपाटी बनाई जा रही है. ऐतिहासिक धरोहर को खत्म करने की कोशिश की जा रही है. आधी रात को पुलिस की मौजूदगी में काम किया जा रहा है. निर्माण के लिए सड़क किनारे पेड़ों को काटे जा रहे हैं. आरोप यह भी यह कि इसके लिए किसी तरह कोई टेंडर भी जारी नहीं हुआ. इन आरोपों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अजित डेंगरेकर की ओर से याचिका लगाई गई है.

आज इसी याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने पक्ष रखा. देवर्षि ठाकुर का कहना था कि महापौर ने बीते दिनों एक प्रेसवार्ता की थी. प्रेसवार्ता में उन्होंने बूढ़ा तालाब सौंदर्यीकरण के पूरे प्लान के बारे में जानकारी नहीं दी थी. महापौर ने यह नहीं बताया है कि सप्रे शाला मैदान को छोटा क्यों किया जा रहा है ? वहाँ फोरलेन सड़क बनाई जा रही है ? प्रोजेक्ट कब तैयार हुआ ? टेंडर कब हुआ ? कौन सी कंपनी काम कर रही है ? रात को अंधेरे में काम कराने के पीछे मकसद क्या है ? लैंड यूज कैसे बदल गया ? यही सारे सवाल हमने कोर्ट समक्ष रखे. देवर्षि ठाकुर ने कहा कि निगम प्रशासन जनता को गुमराह करने का काम कर रही है. इस मामले में आगे सुनवाई 22 जून को होगी. 22 जून को हम और पुख्ता तरीके से अपनी बात को कोर्ट के समक्ष रखेंगे.

वहीं निगम प्रशासन की ओर पक्ष रखने वाले अधिवक्ता पीयूष भाटिया ने कहा कि आज पहली सुनवाई थी. चीफ जस्टिस के सामने याचिका लगी हुई थी. याचिकाकर्ता के तीन पीटीशन थे. पहला निगम द्वारा सप्रे मैदान के 50 पेड़ काटे जाने, दूसरा व्यावसायिक गतिविधि के लिए सप्रे शाला स्कूल के खेल मैदान को खत्म करने और तीसरा दानी गर्ल्स स्कूल के क्लास रूम को तोड़े जाने को लेकर थी.

हमने न्यायालय को बताया कि सप्रे शाला मैदान का एक भी पेड़ नहीं काटा गया है. दूसरा सप्रे शाला मैदान का हिस्सा कहीं से भी छोटा नहीं किया जा रहा है. हम एक मैदान के बतौर डाइमेंशन को मेन्टेन करेंगे और वहां पर एक बहुत अच्छा मैदान तैयार करेंगे. दानी गर्ल्स स्कूल की पुरानी बिल्डिंग, जो किसी के ऊपर गिर सकती थी. उसे तोड़कर हम एक बहुत अच्छा नया स्कूल बना रहे हैं. जिसके लिए शासन ने 6 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं.

भाटिया ने यह भी कहा कि न्यायालय में को हमने जानकारी दी है कि सप्रे शाला मैदान और दानी गर्ल्स स्कूल में कोई भी कमर्शियल एक्टिविटी शुरू नहीं करने वाले हैं. वहां पर कोई भी चौपाटी नहीं बनने वाली है. सारी चीजों को बस नया प्रारूप दिया जा रहा है. आज के समय के हिसाब से स्मार्ट सिटी के हिसाब से उसे तैयार किया जा रहा है. निगम प्रशासन के वकील भाटिया के मुताबिक हाईकोर्ट ने इस मामले में कहा है कि निगम का कार्य जारी रहेगा.

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