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मेडिकल की पीजी सीटों पर भी कोरोना का साया, एडमिशन लेने नहीं पहुंचे छात्र, 104 सीटें खाली

माॅपअप राउंड के जरिए रिक्त सीटों को भरने की कवायद

मेडिकल की पीजी सीटों पर भी कोरोना का साया, एडमिशन लेने नहीं पहुंचे छात्र, 104 सीटें खाली
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रायपुर. प्रदेश के पांच मेडिकल काॅलेजाें में विभिन्न विषयों की स्नातकोत्तर सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया पर कोरोना का असर नजर आया। प्रवेश के लिए दो काउंसिलिंग के बाद भी 104 सीटों पर एडमिशन नहीं हो पाया। सीटें आवंटित होने के बाद भी प्रवेश लेने के लिए एमबीबीएस की पढ़ाई कर चुके डाक्टर नहीं पहुंचे। इन सीटों को भरने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने माॅपअप राउंड का प्रयास शुरू किया है। आवेदन करने वालों को 14 जुलाई की रात 11.59 बजे तक विषयों का चयन करने की वक्त दिया गया है।

प्रदेश में रायपुर के अलावा बिलासपुर, जगदलपुर और रायगढ़ तथा दुर्ग के एक निजी मेडिकल काॅलेज में अभा., स्टेट तथा ईडब्ल्यूएस कोटे को मिलाकर 175 सीटों पर एडमिशन दिया जाना था। अभा. कोटे की काउंसिलिंग होने के बाद खाली सीटें राज्य को वापस कर दी गई थीं। प्रदेश में भी चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से दो काउंसिलिंग के माध्यम से प्रवेश की प्रक्रिया पूरी की गई, मगर आधे से ज्यादा सीटों पर एडमिशन नहीं हुआ, जिसमें अदालत के फैसले के इंतजार में कुल सीटों का 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस कोटा भी शामिल था।

सूत्रों के मुताबिक दो काउंसिलिंग मिलाकर सभी सीटों के हिसाब से प्रावीण्य सूची जारी की गई थी, मगर आवेदक काॅलेज तक नहीं पहुंचे। नतीजतन सीटें खाली रह गईं और इसके लिए मॉपअप राउंड में प्रवेश प्रक्रिया शुरू की गई है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 14 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन करने वालों के विषयों का चयन करने के निर्देश दिया है, क्योंकि दूसरे राउंड की काउंसिलिंग के दौरान विषयों के चयन की प्रक्रिया स्वत: शून्य हो जाएगी। वर्तमान में रायपुर मेडिकल काॅलेज में 137 में 21 सीटें, बिलासपुर मेडिकल काॅलेज की 27 में से 15, जगदलपुर में 5 में से 3 तथा रायगढ़ में 6 में से 6 सीटें तथा निजी मेडिकल काॅलेज की 28 में 26 सीटों पर माॅपअप राउंड के माध्यम से प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जानी है।

ईडब्ल्यूएस की 16 सीटों पर एडमिशन

पीजी में ईडब्लूएस की 16 सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया पूरा करने के निर्देश हाईकोर्ट द्वारा दिया गया है। इसमें प्रवेश का मामला अदालत में पेंडिंग था। इस मामले में यह भी सवाल सामने आ रहा है कि क्या एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वालों को आर्थिक रूप से कमजोर माना जा सकता है।

डेंटल कॉलेजों की हालत भी पतली

डेंटल की पीजी सीटों पर भी एडमिशन की स्थिति भी कुछ खास अच्छी नहीं है। यहां के एकमात्र शासकीय डेंटल काॅलेज की 18 में से आठ सीटों पर ही एडमिशन हुआ है और दस सीटें खाली हैं। वहीं निजी मेडिकल काॅलेजों के 78 सीटों खाली रह गई हैं, जिन पर भी एडमिशन की प्रक्रिया पूरी की जानी है।

दो राउंड के काउंसिलिंग के बाद रिक्त बची एमडी-एमसी तथा डेंटल की एमडीएस की सीटों पर प्रवेश के लिए माॅपअप राउंड का आयोजन किया गया है।

- डा. जीतेंद्र तिवारी, प्रवक्ता, चिकित्सा शिक्षा संचालनालय

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