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धान का समर्थन मूल्य 72 रूपए बढ़ाने पर सियासत, ऐसे में कैसे होगी किसानों की आय दोगुनी

केंद्र सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य 72 रुपए बढ़ाए जाने को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत तेज होती दिख रही है। सरकार के प्रवक्ता मंत्री मोहम्मद अकबर का कहना है कि महज 72 रुपए बढ़ाया जाना नाकाफी है। इस संक्षिप्त बढ़ोतरी से किसानों की आय कैसे बढ़ेगी। उन्होंने ये मांग भी उठाई है कि केंद्र सरकार पीएम किसान सम्मान निधि के तहत सालाना 6 हजार रुपए दे रही है।

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धान की बोरी (प्रतीकात्मक फोटो)

केंद्र सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य 72 रुपए बढ़ाए जाने को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत तेज होती दिख रही है। सरकार के प्रवक्ता मंत्री मोहम्मद अकबर का कहना है कि महज 72 रुपए बढ़ाया जाना नाकाफी है। इस संक्षिप्त बढ़ोतरी से किसानों की आय कैसे बढ़ेगी। उन्होंने ये मांग भी उठाई है कि केंद्र सरकार पीएम किसान सम्मान निधि के तहत सालाना 6 हजार रुपए दे रही है। इस राशि को बढ़ाया जाना चाहिए। इससे कई गुना अधिक राशि तो राज्य सरकार अपने किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत दे रही है।

ये है मामला

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को निर्णय लेकर किसानों को धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) वर्ष 2021-22 के लिए बढ़ाकर 1940 रुपए किया है। पिछले साल यह रेट 1868 रुपए प्रति क्विंटल था। इस हिसाब से केंद्र ने प्रति क्विंटल 72 रुपए की बढ़ोतरी की है। कांग्रेस शासित एवं धान उत्पादक राज्य छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार के इस फैसले को लेकर सियासत तेज हो गई है।

ऐसे में कैसे होगी किसानों की आय दोगुनी

राज्य सरकार के प्रवक्ता मंत्री मोहम्मद अकबर ने हरिभूमि से चर्चा में कहा है कि केंद्र सरकार ने अपने घोषणापत्र में किसानों की आय दोगुना करने की बात कही है। घोषणापत्र के अनुसार अगर किसानों की आय दोगुना की जानी है तो ये 72 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाने से कुछ नहीं होने वाला है। इस मामूली बढोतरी से किसानों की आय दोगुनी कैसे हो सकती है।

किसान सम्मान निधि की राशि भी बढ़ाए केंद्र

श्री अकबर का कहना है कि केंद्र सरकार पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत एक किसान को साल में छह हजार रुपए की जो राशि दे रही है, उसे भी बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि इससे कई गुना अधिक राशि राज्य की भूपेश बघेल सरकार अपने किसानों को दे रही है। छत्तीसगढ़ में धान उत्पादक किसानों को पिछले साल तक प्रति एकड़ 10 हजार रुपए दिए गए हैं। आने वाले वर्ष से यह राशि 9 हजार रुपए मिलेगी।

यह राशि प्रति एकड़ की फसल के आधार पर मिलती है। इसे ऐसे समझा जाना चाहिए कि 10 एकड़ भूमि वाले एक किसान को केंद्र सालभर में 6 हजार रुपए दे रहा है जबकि राज्य सरकार आने वाले साल से एक किसान को 10 एकड़ जमीन के एवज में 90 हजार रुपए देगी। केंद्र द्वारा दी जाने वाली किसान के सम्मान के अनुरूप नहीं है इसे बढ़ाया जाना चाहिए।

किसानों के साथ वादा खिलाफी,‌ विश्वासघात- धनेंद्र

पूर्व मंत्री एवं किसान पृष्ठभूमि के कांग्रेस नेता धनेंद्र साहू ने 72 रुपए बढ़ोतरी को किसानों के साथ घोर वादा खिलाफी ए‌वं विश्वासघात करार दिया है। उनका कहना है कि यह किसानों की भावनाओं के साथ कुठाराघात है। एक तरफ किसानों से वोट लेते समय किसानों की आमदनी दोगुना करने की बात करते हैं वहीं जब धान का मूल्य निर्धारण करते समय मात्र 72 रुपये की वृद्धि करता है। भाजपा पूर्व में 2013 के चुनाव में 2100 रुपये समर्थन मूल्य एवं 300 रुपये बोनस देने की बात कही थी। आज समर्थन मूल्य उसी के अनुसार दे देते तो भी किसानो के साथ न्याय हो पाता। हमारे छत्तीसगढ़ के किसान के लिए घोर निराशा का विषय है।

स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट दरकिनार

श्री साहू का कहना है कि केंद्र सरकार स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश लागू करेंगे कहकर सत्तासीन हुए थे। आज 7 वर्ष व्यतीत होने के बाद भी किसानों के प्रति सोच नहीं बदली। कृषि लागत का डेढ़ गुना देने की बात केंद्र की सरकार ने सत्ता मेें आने के पहले की थी। 72 रुपये की बढ़ोतरी किसानों के साथ भद्दा मजाक है। किसानों की कृषि लागत, लगातार लगभग चार गुना बढ़ गई है। डीजल, खाद,बीज, मजदूरी सभी की दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो गई है। रोज डीजल का दाम बढ़ रहा है। डीजल का भाव आज 100 रुपए के आसपास पहुंच रहा है। खेती की लागत का आज कई गुना मंहगी हो रही है, जबकि आमदनी को 2022 तक दोगुनी करने का वादा किये थे लेकिन आमदनी तो नहीं, मंहगाई कृषि संसाधनों की चार गुना हो गई है।


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