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ऑपरेशन ब्लैक आउट : पैसे लेकर बिजली काटने वाले 5 इंजीनियर जांच पूरी होने से पहले ही बहाल

छह माह बाद भी नहीं हो सकी है इस मामले की जांच पूरी, मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऊर्जा विभाग ने कराई थी जांच

ऑपरेशन ब्लैक आउट : पैसे लेकर बिजली काटने वाले 5 इंजीनियर जांच पूरी होने से पहले ही बहाल
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रायपुर. हरिभूमि मीडिया समूह के ऑपरेशन ब्लैक आउट के खुलासे के बाद निलंबित किए गए पावर कंपनी के पांच अभियंताओं को जांच पूरी होने के पहले ही बहाल कर दिया गया है। छह माह बाद भी अब तक जांच पूरी नहीं हो सकी है। बहाली के आदेश में इस बात का उल्लेख भी है कि अनुशासत्मक कारर्वाई प्रक्रियाधीन है।

हरिभूमि मीडिया समूह के चैनल 'आईएनएच' ने जब 24 जनवरी को आपरेशन ब्लैक आउट को लेकर स्टिंग आपरेशन में खुलासा किया था, तब इसे लेकर पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया था। इसके बाद इस मामले को प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने काफी गंभीरता से लेते हुए ऊर्जा विभाग को इस मामले की जांच के निर्देश दिए। इस निर्देश के बाद ऊर्जा विभाग ने प्रदेश के सभी फीडरों से बिजली कट की छह माह की रिपोर्ट मंगाकर जांच करने का आदेश पावर कंपनी को दिया। इसके लिए पावर कंपनी ने अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजस्व ज्योति ननोरे को जांच का जिम्मा सौंपा था।

मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच अधिकारी ने तत्काल इस मामले में एक्शन लिया और सभी फीडरों से रिपोर्ट मंगाकर उनकी जांच का काम प्रारंभ किया। महज 12 दिनों में ही रिपोर्ट मंगाकर उसको खंगालने से यह बात सामने आई है कि 380 फीडरों में बिजली खराबी ठीक करने के मामले में कुछ न कुछ लोचा है। इन फीडरों में दस से लेकर सौ मिनट तक का ज्यादा समय लगा था।

एएमआर टीम की जांच अधूरी

फीडरों से जो रिपोर्ट आई और उसमें डिविजन से जो जानकारी दी गई थी, उसको पावर कंपनी ने आंख बंद करके सही नहीं माना। अगर किसी डिवीजन ने किसी फीडर को लेकर एक या दो बार बंद होने की जानकारी दी है तो उसकी जानकारी में कितनी सच्चाई है, इसका पता लगाने के लिए एएमआर टीम को जिम्मा दिया गया। पावर कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक हर फीडर में एक एएमआर मीटर रहता है, जिसका कंट्रोल सीधे कंट्रोल रूम से रहता है। इस मीटर की जांच में यह बात सामने आ जाती है कि फीडर को कितनी बार कितने समय के लिए कब-कब बंद किया गया था। अब इससे पहले कि यह जांच पूरी होती, अचानक कोरोना का कहर आ गया। इसके बाद पावर कंपनी में भी लॉकडाउन हो गया। इसकी वजह से जांच भी बंद हो गई।

इनकी हुई बहाली

कोरोनाकाल के कारण जांच तो अटकी हुई है, लेकिन चार कनिष्ठ और एक सहायक अभियंता की वापस बहाली हो गई है। सहायक अभियंता महेश्वर टंडन को कोरबा के दर्री, कनिष्ठ अभियंता डोमेंद्र कुमार साहू को सारागांव, सुनील कुमार ठाकुर को कोरबा के भैंसमा, योगेंद्र कुमार साहू को सरसींवा और नारायण प्रसाद सोनी को भाटापारा के सुहैला में पदस्थ किया गया है।

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