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छत्तीसगढ़ में ओमिक्रॉन का कम्युनिटी स्प्रेड, स्वास्थ्य मंत्री के सैंपल में ओमिक्रॉन वैरिएंट की पुष्टि

10 दिनों में ही मरीजों की रोज मिलने वाली संख्या में 14 गुना का इजाफा हुआ है। मंगलवार को प्रदेश में 4 नए ओमिक्रॉन मरीज मिले हैं। जिन लोगों में ओमिक्रॉन वैरिएंट की पुष्टि हुई है उनमें स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव भी एक हैं। सिंहदेव 2 जनवरी को कोरोना पाॅजिटिव पाए गए थे। इस नतीजे के बाद इस बात की पुष्टि हो गई है की छत्तीसगढ़ में कोरोना की यह तीसरी लहर नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की है। पढ़िए पूरी खबर...

छत्तीसगढ़ में ओमिक्रॉन का कम्युनिटी स्प्रेड, स्वास्थ्य मंत्री के सैंपल में ओमिक्रॉन वैरिएंट की पुष्टि
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यह नतीजा अभी आए जीनोम सीक्वेंसिंग की रिपोर्ट पर आधारित है। चार में से दो यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) से लौटे थे। लेकिन स्वास्थ्य मंत्री और एक अन्य को बीमारी यहीं लग गई।

रायपुर: छत्तीसगढ़ में कोरोना की तीसरी लहर की रफ्तार भयावह है। पिछले 10 दिनों में ही मरीजों की रोज मिलने वाली संख्या में 14 गुना का इजाफा हुआ है। एक जनवरी को प्रदेश भर में 279 नए मरीज मिले थे। 10 जनवरी को 4 हजार 120 नए मरीज मिले हैं। 222 लोगों को होम आइसोलेशन से डिस्चार्ज किया गया है। वहीं 358 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया। इनमें से 136 लोगों को अस्पतालों से छुट्‌टी दी गई है। छत्तीसगढ़ के एपिडेमिक कंट्रोल विभाग के डायरेक्टर डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया, हमने जिन लोगों के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग की जांच के लिए ओडिशा के भुवनेश्वर भेजे थे, उनमें चार की रिपोर्ट आई है। उनमें ओमिक्रॉन वैरिएंट का संक्रमण पाया गया है। सभी रायपुर के हैं। इनमें से दो की ट्रैवल हिस्ट्री है। वे लोग UAE-दुबई से वापस लौटे थे। यहां जांच हुई तो वे पॉजिटिव पाए गए। उसके बाद उनके नमूनों को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा गया था।

यह नतीजा अभी आए जीनोम सीक्वेंसिंग की रिपोर्ट पर आधारित है। चार में से दो यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) से लौटे थे। लेकिन स्वास्थ्य मंत्री और एक अन्य को बीमारी यहीं लग गई। डॉ. सुभाष मिश्रा ने कहा, इसका मतलब है कि ओमिक्रॉन का संक्रमण सोसाइटी में फैल चुका है। स्वास्थ्य विभाग, विदेश से लौटकर पॉजिटिव पाए गए लोगों और किसी क्लस्टर में पॉजिटिव पाए गए सभी लोगों से लिए नमूनों को ओमिक्रॉन अथवा किसी दूसरे वैरिएंट की पहचान के लिए भुवनेश्वर लैब भेजता है। हर जिले से कोरोना पॉजिटिव पाए गए कुल लोगों में से 5% के नमूने भी जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भुवनेश्वर भेजे जाते हैं। ऐसा रेंडम जांच के लिए किया जाता है ताकि कुछ नमूनों की जांच से वायरस में बदलाव की पहचान की जा सके।

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