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न्याय- रसूखदारों के खिलाफ ग्रामीणों की लड़ाई- हाईकोर्ट के आदेश पर वापस मिला तालाब

रसूखदारों ने सरकारी कागजात में हेराफेरी कर बेच दिया था तालाब को। लालपुर के ग्रामीणों ने एकजुट होकर लड़ी हक़ की लड़ाई। हाईकोर्ट से वापस मिला ग्रामीणों को सरकारी तालाब। हाईकोर्ट ने बलौदाबाजार कलेक्टर को 90 दिवस के भीतर जवाब देने भेजा नोटिस। तालाब को 1961 में ही राज्य शासन में निहित करने के थे आदेश। हाईकोर्ट के आदेश पर एसडीएम ने की जांच और वापस दिलाया तालाब। पढ़िए रसूखदारों के खिलाफ ग्रामीणों के हक की लड़ाई की सच्ची कहानी...

न्याय- रसूखदारों के खिलाफ ग्रामीणों की लड़ाई- हाईकोर्ट के आदेश पर वापस मिला तालाब
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भाटापारा: विधानसभा के अंतिम छोर पर बसे गांव लालपुर में कुछ वर्ष पहले गांव के दबंगों द्वारा ग्रामवासियों के निस्तारी तालाब के सरकारी कागजों में हेरफेर कर कृषि भूमि बताकर बेच दिया था। जिसे गांव के रवि यादव और ग्रामवासियों ने न्याय पाने आवाज बुलंद की। कलेक्टर कार्यालय। एसडीएम कार्यालय एवं शासकीय कार्यालयों के चक्कर काट काट कर शिकायत की गई। लेकिन कुछ प्रभाव नहीं पड़ा। फिर मामले में न्याय पाने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली। इसके बाद लगभग 1 साल तक मामला चलता रहा। जिसके बाद हाईकोर्ट ने बलौदाबाजार कलेक्टर से मामले में जवाब तलब किया। जिसमें 90 दिवस में जवाब देने कहा। जो कि एसडीएम कार्यालय में प्रकरण की सुनवाई चल रही थी और ग्रामीणों को सफलता मिली और तालाब वापस शासन के रिकार्ड में शासकीय रूप में दर्शित हुआ।

वर्तमान एसडीएम ने दिलाया ग्रामीणों को तालाब

एसडीएम लवीना पांडे द्वारा प्रकरण की जांच की गई। जिसमें सुप्रीमकोर्ट के गाइड लाइन अनुसार 1951 के पूर्व निस्तारी वाली जो जगह है वो राज्य शासन में निहित होगी। उसी गाइड लाईन का पालन करते हुए 1961 में लालपुर का यह तालाब राज्य शासन में निहित हो चुका था। लेकिन उसका परिपालन पूर्ण रूप से नहीं किया गया था। जिसके कारण निजी भूमि बताकर बेच दिया गया था। जिसे हाईकार्ट के आदेश अनुसार सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन को मानते हुए 1961 में तालाब को शासन में निहित करने की कार्यवाही पूर्ण की गयी। जिससे अब तालाब शासकीय संपत्ति कहलाएगी और ग्रामीण उसे निस्तारी के रूप में उपयोग कर सकेंगे। लालपुर निवासी रवि यादव लगातार गांव के विकास में अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्हें और ग्रामवासीयों को गांव की संपत्ति बचाने में सफलता मिली।

लालपुर ग्राम के इस तालाब के बारे में पंचायत और उसके जनप्रतिनिधि पूरी तरह से जानते थे। लेकिन उनकी मिली भगत के चलते खुले आम तालाब को कृषि भूमि बनाकर बेच दिया गया। शासकीय कागजों के साथ हेरफेर करना और ग्राम वासियों के साथ धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज होना। वर्तमान सरपंच सचिव और पटवारियों के अपराधिक कृत्य का क्षम्य न कर उन्हें संवैधानिक धाराओं के अंतर्गत कानून गिरफ्त में लाना चाहिए। जिससे इस तरह की हरकत करने से जनप्रतिनिधि सौ बार सोंचे।

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