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सर्दी-जुकाम होने पर नो एंट्री, नहीं चलेगी स्कूल बसें, खुद पहुंचना होगा

बच्चों की मुस्कुराहटों और शरारतों से स्कूल एक बार फिर गुलजार होंगे। 11 माह के लंबे इंतजार के बाद अब स्कूल 15 फरवरी से दोबारा खुलेंगे। कैबिनेट की बैठक खत्म होते ही तत्काल स्कूल खोलने संबंधित आदेश जारी कर दिए गए हैं। लेकिन इसके साथ ही कोरोना गाइडलाइन के पालन को लेकर सख्त दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

सर्दी-जुकाम होने पर नो एंट्री, नहीं चलेगी स्कूल बसें, खुद पहुंचना होगा
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रायपुर. बच्चों की मुस्कुराहटों और शरारतों से स्कूल एक बार फिर गुलजार होंगे। 11 माह के लंबे इंतजार के बाद अब स्कूल 15 फरवरी से दोबारा खुलेंगे। कैबिनेट की बैठक खत्म होते ही तत्काल स्कूल खोलने संबंधित आदेश जारी कर दिए गए हैं। लेकिन इसके साथ ही कोरोना गाइडलाइन के पालन को लेकर सख्त दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

काेरोना संक्रमण से छोटे बच्चों को बचाने के लिए सिर्फ 9 से 12वीं कक्षा तक ही स्कूल खोलने इजाजत दी गई है। लेकिन इसमें एक पेंच फंस गया है। स्कूल संचालकों ने तय किया है कि बसें नहीं चलाई जाएंगी। बच्चों को अपने साधनों से ही आना होगा। काेरोना वायरस के भारत में प्रवेश करने के कुछ दिनों पश्चात ही 12 मार्च को राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में स्कूल बंद करने के आदेश जारी कर दिए थे।

पहली बार जब आदेश जारी हुआ तब सिर्फ 31 मार्च तक ही स्कूल बंद रखने कहा गया था। लेकिन संक्रमण फैलता गया और स्कूल बंद रखने की तिथि में इजाफा होता गया। शनिवार को जारी किए गए अपने आदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी विद्यार्थी में सर्दी, जुकाम, बुखार अथवा कोरोना के कोई अन्य लक्षण दिखाई देते हैं तो उन्हें कक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा तथा तत्काल कोरोना जांच की व्यवस्था की जाएगी।

पालकों की अनुमति आवश्यक होगी अथवा नहीं?

इसे लेकर स्पष्ट रूप से निर्देश नहीं दिए गए हैं, लेकिन कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा काेविड-19 से बचाव के लिए जारी गाइडलाइन का पालन करना होगा। इसके मुताबिक पालकों की अनुमति आवश्यक होगी। यदि पालक अपने बच्चे को स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं तो वे ऑनलाइन माध्यम से ही पढ़ाई करेंगे। किंतु 9 वीं से 12वीं कक्षा तक की परीक्षाएं ऑफलाइन मोड में ही दिलानी होगी।

कक्षा में कैसे होगा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन?

सिर्फ 9वीं से 12वीं तक ही कक्षाएं संचालित करने की अनुमति मिली है। लेकिन क्लासरूम पहली से आठवीं कक्षा तक के भी खोले जाएंगे। इन कक्षाओं का इस्तेमाल करके ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा। एक कक्षा में 25 छात्र ही बैठेंगे। आवश्यकता हुई तो दो शिफ्ट में छात्रों को बुलाया जाएगा।

बस में संक्रमण रोकने क्या व्यवस्था होगी?

आदेश में इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। लेकिन प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन परिवहन का फैसला स्कूलों पर छोड़ दिया है। अधिकतर निजी स्कूलों ने बसें संचालित नहीं करने का फैसला लिया है। छात्र अपने साधन से ही स्कूल आएंगे-जाएंगे।

बच्चों को बात करने से कैसे रोकेंगे?

निजी स्कूलों ने इसके लिए विशेष टीम बनाने का फैसला लिया है। प्राइवेट स्कूल एसोसिशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता के मुताबिक, यह टीम देखेगी कि छात्र मैदान में, परिसर में, शाला गेट के पास अथवा स्कूल की अन्य जगहों में एकत्र होकर बात ना करें। पढ़ाई खत्म होते ही सीधे छात्रों को घर जाना होगा।

असेंबली में होने वाली प्रार्थना कैंटीन सहित दूसरी चीजों का क्या?

पढ़ाई के अतिरिक्त अन्य गतिविधियों पर पहले ही रोक लगा दी गई है। निजी स्कूलों ने असेंबली में होने वाली प्रार्थना पर ही रोक लगाने का फैसला लिया है। स्कूल की कैंटीन बंद रहेगी। छात्रों को घर से ही टिफिन, सेनिटाइजर व अन्य चीजें लानी होंगी।

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