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NHM कर्मचारियों पर सरकार सख्त, उधर इस्तीफा तो इधर बर्खास्तगी शुरू

प्रदेश के कई जिलों में जारी है संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण आंदोलन, पढ़िए पूरी खबर-

NHM कर्मचारियों पर सरकार सख्त, उधर इस्तीफा तो इधर बर्खास्तगी शुरू
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत नियुक्त किए गए हजारों संविदा कर्मचारियों के आंदोलन दिन-ब-दिन उग्र रूप ले रहा है।

प्रदेश के कई जिला मुख्यालयों में नियमितीकरण की मांग को लेकर संविदा कर्मचारियों का आंदोलन जारी है। कई जिलों में संविदा कर्मचारियों ने प्रशासन को अपना इस्तीफा भी सौंप दिया है।

इसी के साथ एक बड़ी खबर यह भी है कि कोरोना से लड़ रही छत्तीसगढ़ सरकार इन हड़ताली कर्मचारियों के प्रति अब सख्त हो गई है। बस्तर से दर्जन भर से ज्यादा हड़ताली कर्मचारियों के बर्खास्तगी की खबर है, वहीं कोरिया जिले में 300 से ज्यादा कर्मचारियों को हड़ताल के कारण निकाल दिए जाने की जानकारी मिल रही है।

आपको बता दें कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत बतौर संविदा कर्मचारी काम कर रहे इन कर्मचारियों का यह आंदोलन काफी पुराना है।

पिछली सरकार के समय राजधानी के ईदगाह भाठा मैदान में जब अनियमित कर्मचारियों ने संयुक्त रूप से बड़ा आंदोलन किया था, तब भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत काम करने वाले इन संविदा कर्मचारियों ने उस आंदोलन का साथ दिया था।

यही कारण है कि इस वक्त जब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारी आंदोलन पर हैं, तो तमाम संविदा, अनियमित और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी संगठन इन कर्मचारियों के साथ हैं।


अनियमित कर्मचारी आंदोलन को तेज करने वाले और सरकार के साथ कई मर्तबा की बातचीत करने वाले गोपाल प्रसाद साहू मानते हैं कि कर्मचारियों के प्रति सरकार का रवैया संवेदनशील होना चाहिए, जो मांगे जायज हैं, उन्हें पूरे करने चाहिए। हम NHM के साथी संविदा कर्मचारियों की मांगों पर पूर्णतः समर्थन व्यक्त करते हैं। जायज मांगों की इस लड़ाई में हम हर कदम उनके साथ हैं। अगर समय रहते इस पर उचित निर्णय नही आया तो हम अपने आंदोलन की रणनीति पर विचार करते हुए इसे तेज करेंगे।


अनियमित कर्मचारी आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे राजकुमार कुशवाहा भी मानते हैं कि सालों से बतौर संविदा कर्मचारी काम कर रहे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के इन कर्मचारियों के आगे भविष्य को लेकर अंधकारमय स्थिति है। इसीलिए आंदोलन की यह स्थिति निर्मित हुई है। इसलिए सरकार को इस पर बेहद संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए।

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