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सरकार-ट्रांसपोर्टरों के बीच वार्ता बेनतीजा, सीमेंट का रहेगा संकट, 20 हजार करोड़ का काम ठप

ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के कारण पूरे प्रदेश से सीमेंट गायब हाे गया है। सीमेंट न मिलने के कारण दस हजार करोड़ के सरकारी कामों के साथ करीब दस हजार करोड़ के रीयल एस्टेट के काम भी बंद हो गए हैं। साथ ही निजी निर्माण और निजी तौर पर घरों का निर्माण करने वालों को एक-एक बोरी सीमेंट के लाले पड़ गए हैं। शुक्रवार को मंत्री मो. अकबर के बंगले पर ट्रांसपोर्टरों और सीमेंट उद्योगों के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही। सीमेंट संयंत्रों की ट्रांसपोर्टरों से मालभाड़े को लेकर पिछले 22 दिनों से ठनी हुई है। इस हड़ताल के कारण बाजार से सीमेंट पूरी तरह से गायब हो गया है।

सरकार-ट्रांसपोर्टरों के बीच वार्ता बेनतीजा, सीमेंट का रहेगा संकट, 20 हजार करोड़ का काम ठप
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रायपुर. ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के कारण पूरे प्रदेश से सीमेंट गायब हाे गया है। सीमेंट न मिलने के कारण दस हजार करोड़ के सरकारी कामों के साथ करीब दस हजार करोड़ के रीयल एस्टेट के काम भी बंद हो गए हैं। साथ ही निजी निर्माण और निजी तौर पर घरों का निर्माण करने वालों को एक-एक बोरी सीमेंट के लाले पड़ गए हैं। शुक्रवार को मंत्री मो. अकबर के बंगले पर ट्रांसपोर्टरों और सीमेंट उद्योगों के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही। सीमेंट संयंत्रों की ट्रांसपोर्टरों से मालभाड़े को लेकर पिछले 22 दिनों से ठनी हुई है। इस हड़ताल के कारण बाजार से सीमेंट पूरी तरह से गायब हो गया है।

जब हड़ताल का 26 फरवरी से आगाज हुआ, तो दस दिनों तक इसका ज्यादा असर नहीं हुआ, क्योंकि जहां एक तरफ डीलरों के पास स्टॉक था, वहीं सीमेंट कंपनियों के गोदामों में भी भरपूर स्टाक था, लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे बाजार में इसका असर दिखने लगा। अब एक सप्ताह से ज्यादा समय से बाजार में कहीं सीमेंट नहीं मिल रहा है। किसी भी प्लांट से माल लोड करने ही नहीं दिया जा रहा है। जिन सीमेंट प्लांटों में रेलवे ट्रैक हैं, वहां से जरूर दूसरे राज्यों में कुछ माल जा रहा है, लेकिन जहां तक प्रदेश का सवाल है तो प्रदेश में राजधानी रायपुर के साथ किसी भी शहर में माल ही नहीं जा पा रहा है।

50 से 100 करोड़ की योजनाएं

रीयल एस्टेट की प्रदेश में करीब 12 सौ योजनाओं पर काम चल रहा है। आमतौर पर एक योजना 50 से सौ करोड़ की रहती है। रीयल एस्टेट की सारी योजनाओं में क्रांकीट से संबंधित कार्य जैसे स्लैब, काॅलम, ढलाई सब बंद कर दिए गए हैं। जिनके पास सीमेंट का कुछ स्टॉक है, वे भी जोड़ाई का काम कर रहे हैं। काम बंद होने के बाद योजनाओं में भी विलंब होना तय है। इधर रेरा के नियमों के मुताबिक तय समय पर योजना में मकान न देने पर जुर्माना भी लग जाता है।

12 फीसदी भाड़ा बढ़ाने पर सहमति नहीं हड़ताल रहेगी जारी

प्रदेश के परिवहन मंत्री मो. अकबर के बंगले पर शुक्रवार को सीमेंट उद्योगों, ट्रांसपोर्टरों के बीच हड़ताल को लेकर करीब पांच घंटे तक चली बैठक में ट्रांसपोर्टरों ने 12 फीसदी से कम भाड़ा बढ़ाए जाने पर सहमति नहीं दी। ऐसे में मंत्री मो. अकबर ने सीमेंट उद्योगों से 12 फीसदी भाड़ा बढ़ाकर देने के लिए कहा है। लेकिन अभी सीमेंट उद्योगों की तरफ से इस पर कोई फैसला नहीं आया है। रायपुर बस्तर कोरपुट संघ के सुखदेव सिंह सिद्धू ने बताया, करीब दो सौ ट्रांसपोर्टरों के साथ सभी सीमेंट उद्योगों के प्रतिनिधि और सीमेंट डीलरों की तीन दौर की बैठक हुई। इसमें ट्रांसपोर्टरों ने 25 प्रतिशत के स्थान पर 12 फीसदी भाड़ा बढ़ाने की बात कही है, ऐसे में ट्रांसपोर्टरों ने फैसला किया है, जो सीमेंट कंपनी 12 फीसदी भाड़ा ज्यादा देगी, उसी कंपनी के माल का परिवहन होगा, बाकी का परिवहन नहीं किया जाएगा। ट्रांसपोर्टरों ने सीमेंट उद्योगों के फैसला करने तक हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।

ठेकेदार चौतरफा परेशानी में

हमारे ठेकेदार वैसे ही खनिज रायल्टी और अन्य सरकारी फरमानाें से परेशान हैं। अब सीमेंट न मिलने के कारण काम बंद हो गया है। ठेकेदारों के मजदूर वापस अपने गांव जा रहे हैं। बाजार में दूसरे राज्यों से सीमेंट लाकर 350 रुपए में बेचा जा रहा है, कोई भी ठेकेदार इतनी कीमत पर सीमेंट लेकर काम नहीं कर सकता।

- बीरेश शुक्ला, अध्यक्ष, छग कांट्रेक्टर संघ

हर सरकारी काम अटका

प्रदेश में सरकारी कामों का ठेका लेने वाले दस हजार से ज्यादा ठेकेदार हैं। ज्यादातर का काम रुक गया है। जिनके पास पहले से स्टाॅक था, उनका काम चलता रहा, लेकिन अब सबके पास स्टॉक समाप्त हो गया है। ऐसा होने से 10 लाख से लेकर सौ, पचास करोड़ तक का बड़ा ठेका लेने वाले सारे ठेकेदारों के निर्माण कार्य बंद हो गए। कुछेक ठेकेदारों के पास थोड़ा बहुत स्टाॅक है तो उनका काम चल रहा है, लेकिन उनका काम भी एक-दो दिनों में बंद हो जाएगा।

सिर्फ जोड़ाई हो रही

रीयल एस्टेट की सारी योजनाओं में क्रांकीट से संबंधित काम बंद करने पड़े हैं। इस समय जिनके पास थोड़ा बहुत सीमेंट है, उनकी योजनाओं में इससे जोड़ाई का काम चल रहा है।

- शैलेश वर्मा, पूर्व अध्यक्ष, क्रेडा

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