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मैडम हमें नहीं चाहिए ऐसा शहर : बस्तर से 270 KM पैदल चलकर राजधानी पहुंचे ग्रामीण राज्यपाल से मिले, अपना गांव वापस मांगा

2008 में बस्तर सहित 22 गांवों को मिलाकर नगर पंचायत बनाया गया था। लेकिन लोग इतने सालों में नगरीय प्रशासन विभाग की व्यवस्था से तंग आ चुके हैं। उनके कई गांव बस्तर की मुख्य आबादी से दूर जंगल और नालों के पार हैं। वहां तक कोई सुविधा नहीं पहुंची है। सड़कें, नालियां, पेयजल कुछ नहीं है। इनहें क्या मिला जवाब... पढ़िए...

मैडम हमें नहीं चाहिए ऐसा शहर : बस्तर से 270 KM पैदल चलकर राजधानी पहुंचे ग्रामीण राज्यपाल से मिले, अपना गांव वापस मांगा
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रायपुर। बस्तर के आदिवासियों ने विरोध का अनूठा तरीका अपनाया। वे 270 किलोमीटर का पैदल सफर कर रायपुर पहुंचे। सालों पहले बस्तर नगर पंचायत में मिलाए गए 22 गांव के सैकड़ों लोग बुधवार को राजधानी रायपुर पहुंचे। उन्होंने राजभवन का घेराव कर दिया। उनके प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल अनुसूइया उइके से मुलाकात कर कहा, उन्हें उनका गांव ही लौटा दिया जाए। बस्तर नगर पंचायत से रायपुर पहुंचे ग्रामीणों को पुलिस ने राजभवन के पास रोक लिया। ग्रामीण एकदम सत्यागहियों वाले अंदाज में वहीं जमीन पर बैठकर विरोध जताने लगे। बाद में अधिकारियों ने एक प्रतिनिधि को राज्यपाल से मिलने बुलाया।

इन ग्रामीणों का नेतृत्व कर रहे बस्तर नगर पंचायत के पार्षद रामचंद्र बघेल ने बताया, 2008 में बस्तर सहित 22 गांवों को मिलाकर नगर पंचायत बनाया गया था। लेकिन लोग इतने सालों में नगरीय प्रशासन विभाग की व्यवस्था से तंग आ चुके हैं। उनके कई गांव बस्तर की मुख्य आबादी से दूर जंगल और नालों के पार हैं। वहां तक कोई सुविधा नहीं पहुंची है। सड़कें, नालियां, पेयजल कुछ नहीं है। नगर पंचायत हो जाने से मनरेगा का रोजगार भी नहीं है। पिछले कई वर्षों से वे लोग मांग करते आए हैं कि उनके गांवों को ग्राम पंचायत घोषित कर दिया जाए, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। रामचंद्र बघेल ने कहा, राज्यपाल को पांचवीं अनुसूची क्षेत्र का संरक्षक कहा गया है, ऐसे में हम लोग उनके पास अपनी मांग लेकर आए हैं। हमारी एक ही मांग है कि नगर पंचायत बस्तर का विघटन कर गांवों को पुराना ग्राम पंचायत वाला दर्जा दे दिया जाए। वहां गांवों के मुताबिक बुनियादी सुविधाएं और रोजगार के अवसर प्रदान हों।

3 अक्टूबर को निकले थे बस्तर से

इन ग्रामीणों की पदयात्रा 3 अक्टूबर से शुरू हुई थी। ग्रामीणों ने तिरंगे झंडे और संविधान की प्रति लेकर पैदल चलना शुरू किया। जोबा, फरसपाल, केशकाल, सींगारभाट होते हुए वे 7 अक्टूबर की शाम तक बाबुकोहका पहुंच गए थे। 8 अक्टूबर को वहां से चलना शुरू किया तो राजाराव पठार होकर 9 अक्टूबर की रात धमतरी पहुंच गए। 10 अक्टूबर को वे लोग कुरूद पहुंचे, वहां से अभनपुर में रुके और मंगलवार की रात रायपुर पहुंच गए।

स्वागत करने पहुंचे आदिवासी नेता

सर्व आदिवासी समाज का सोहन पोटाई धड़ा भी रायपुर में इनके साथ शामिल हो गया। समाज के संरक्षक और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम, प्रदेश अध्यक्ष सोहन पोटाई, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बीएस रावटे आदि ने बस्तर के ग्रामीणों का स्वागत किया। उन्हें गोंडवाना भवन में ठहराया गया। बुधवार की दोपहर सभी लोग राजभवन के लिए रवाना हुए थे।

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