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40 करोड़ से ज्यादा की राखियां लॉकडाउन, छोटे कारोबारियों का पैसा जाम

थोक के साथ चिल्हर कारोबारियों का सालभर के लिए फंसा पैसा

बाजारों में इस बार खूब धूम मचा रही है भारतीय राखी, चाइनीज राखी पूरी तरह से बैन
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फाइल फोटो

रायपुर. कोराेना के कहर के कारण प्रदेश में 40 करोड़ से ज्यादा की राखियां भी लॉकडाउन हो गई हैं। थोक के साथ चिल्हर कारोबारियों का पैसा एक साल के लिए फंस गया है। राखियाें का हर साल 40 से 50 करोड़ का कारोबार होता है। इस बार अब तक महज 15 फीसदी ही राखियां बिक सकी हैं। लॉकडाउन के कारण दुकानें बंद हैं। अब माल के खपने की संभावना भी नहीं है। छोटे दुकानदार ज्यादा परेशान हैं, क्योंकि इनकी क्षमता अपने पैसे सालभर तक फंसाकर रखने की नहीं है।

लॉकडाउन का असर हर सेक्टर पर लंबे समय से पड़ रहा है। मई में लॉकडाउन खुलने के बाद धीरे-धीरे हर सेक्टर में स्थिति संभल रही थी, लेकिन इधर प्रदेश में कोरोना की लगातार स्थिति बिगड़ने के कारण अंतत: प्रदेश सरकार को एक बार फिर से लॉकडाउन का सहारा लेना पड़ा है। पहले 22 से 28 जुलाई तक लॉकडाउन किया गया, इसके बाद 6 अगस्त तक लॉकडाउन बढ़ा दिया गया है। लॉकडाउन बढ़ने का सबसे बड़ा असर राखियों का कारोबार करने वालों पर पड़ा है।

फंस गए करोड़ों

राखियों का कारोबार करने वाले राजधानी के थोक व्यापारियों का कहना है, इस बार वैसे भी कोरोना को देखते हुए कम माल मंगाया गया था, लेकिन इसके बाद भी लगभग पूरा माल ही फंस गया है। थोक व्यापारियों की मानें तो उनका 15 फीसदी माल ही बिका है। इतना कम माल बिकने के कारण करोड़ों रुपए फंस गए हैं। जिन चिल्हर व्यापारियों ने खरीदी की है, उनका माल भी नहीं बिक पाया है। कई चिल्हर व्यापारी ऐसे हैं, जिनका कारोबार 20 से 30 हजार का होता है। ये व्यापारी एक तो पैसों के फंसने के कारण परेशान हैं, साथ ही इनके सामने सालभर तक बची राखियों को संभालकर रखने की भी चुनौती है।

चाइना का माल नहीं

ऐसा पहली बार हुआ है, जब राखियों में चाइना अलग रहा है। काराेबारियों का कहना है, वैसे भी चाइना से राखियां बनकर नहीं आती हैं। वहां से रॉ-मटेरियल आता है, जिसका उपयोग यहां पर फैंसी राखियां बनाने में होता है। फैंसी राखियां ज्यादातर अहमदाबाद से आती हैं। इसके अलावा मुंबई, दिल्ली से भी माल आता है। राखियाें में चाइना का करीब 20 कराेड़ का राॅ-मटेरियल लग जाता है, लेकिन इस बार सारा राॅ-मटेरियल भी अपने देश का ही लगा है।

15 फीसदी ही माल बिका

थोक दुकानदारों के साथ चिल्हर कारोबारियों का 15 फीसदी के आसपास ही माल बिका है। करोड़ों का माल इस साल डंप हो जाएगा। सालभर तक इसे संभालकर रखने की चुनौती के साथ रकम फंसना व्यापारियों के लिए बेहद परेशानी का सबब है।

-विनोद साहू, सचिव, बंजारी रोड व्यापारी संघ

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