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कोरबा : नींद से जगा जिला प्रशासन, जब कलेक्टर ने जताई नाराजगी

जिले की कलेक्टर रानू साहू अचानक करतला तहसील कार्यालय का निरीक्षण करने पहुंच गई, जहां काम में अनियमितता देखकर तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस थमाया। साथ ही समय सीमा में राजस्व प्रकरणों के निपटारे के निर्देश भी दिए। पढ़िए पूरी खबर-

कोरबा : नींद से जगा जिला प्रशासन, जब कलेक्टर ने जताई नाराजगी
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कोरबा। आज के खोखले सिस्टम में लोगों को जरूरत है एक इमानदार अधिकारी की, जो पूरी ईमानदारी और निष्ठा से लोगों के समस्या का समाधान करें। कागजों में तो हमारे लिए कई सुविधाएं हैं, किसी समस्या पर हम सम्बंधित कार्यालय में जाकर रिपोर्ट भी दर्ज करवा सकते हैं, लेकिन उन समस्याओं का समाधान कब तक होगा या होगा भी या नहीं, इस बात का दावा कहीं नहीं होता। ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से आया है।

मामला तब सामने आया जब जिले की कलेक्टर रानू साहू अचानक करतला तहसील कार्यालय का निरीक्षण करने पहुंच गई। वहां पहुंचते ही उन्होंने तहसील कार्यालय में उपलब्ध राजस्व प्रकरणों की जानकारी ली और उपस्थित अधिकारियों कई प्रकरणों के लंबे समय से लंबित (Pending) रहने का कारण पूछा, लेकिन प्रकरणों के लंबित रहने का कोई जायज़ कारण तहसीलदार और नायब तहसीलदार नहीं दे सके।

इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई और फ़ौरन कार्रवाही करते हुए तहसीलदार मुकेश देवांगन व नायब तहसीलदार तारा सिदार को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दे दिया। कलेक्टर साहू ने तहसीलदार कोर्ट में प्रकरणों के अद्यतीकरण और नियमित पंजीयन नहीं होने पर भी नाराजगी जाहिर की और सभी प्रकरणों का अद्यतीकरण करने का निर्देश दिया, साथ ही उन्होंने अधिकारियों को यह निर्देश भी दिया की वे सभी प्रकरणों को ई-कोर्ट में दर्ज करें।

कलेक्टर ने उपस्थित एसडीएम सुनील नायक को तहसील कार्यालय का पुनः निरीक्षण करने और राजस्व प्रकरणों के निपटारे में सहयोग करने के भी निर्देश दिए। कलेक्टर साहू ने उपस्थित तहसीलदारों से नामांतरण, अविवादित बंटवारा, बटांकन, सीमाकन सहित अनुविभाग स्तर पर लंबित डायवर्सन प्रकरणों की विस्तृत जानकारी भी ली और राजस्व प्रकरणों का शासन द्वारा निर्धारित समय सीमा में निराकरण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही कलेक्टर ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में अविवादित राजस्व प्रकरणों को लंबित नहीं रखा जाए।

ऐसे में कहा जा सकता है कि अगर लोगों को ऐसे कलेक्टर मिलें जो उनके समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दे और ऐसी कार्रवाही समय-समय पर होते रहे तो प्रशासन की सुस्ती दूर होगी और असल मायने में नागरिकों के लिए कागजों में दर्ज सुविधाएं सार्थक होंगी।

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