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शूटिंग प्रैक्टिस के नाम पर पुलिस वालों के साथ मजाक, दो साल पहले खरीदी राइफल, गाेलियां अब तक गायब!

नेशनल स्पर्धा में शामिल होने वाले पुलिसकर्मी अभ्यास से वंचित, वरिष्ठ अफसरों से जवाब नहीं, इस पूरे मामले में फिलहाल वरिष्ठ अफसरों से कोई जवाब सामने नहीं आ सका है। हरिभूमि टीम ने पीएचक्यू योजना एवं प्रबंध के वरिष्ठ आईपीएस अफसर प्रदीप गुप्ता से संपर्क की कोशिश की। फोन पर उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिल सका। पढ़िए एक्सक्लूसिव रिपोर्ट...

शूटिंग प्रैक्टिस के नाम पर पुलिस वालों के साथ मजाक, दो साल पहले खरीदी राइफल, गाेलियां अब तक गायब!
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रायपुर: पुलिस विभाग में शूटिंग में माहिर वर्दीवालों का अभ्यास मजाक बनकर रह गया है। पुलिस वालों की डिमांड पर विभाग ने राइफल और गन खरीदी की मंजूरी तो दी, लेकिन राउंड की व्यवस्था करने में ही दो साल गुजार दिए। अब भारी भरकम कीमत पर खरीदी गई राइफल और गन धूल खा रही हैं। दूसरी ओर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते रहे वर्दीवाले अभ्यास से पूरी तरह दूर हो गए हैं। दाे साल गुजरने के बाद भी उन्हें कोई मदद नहीं मिल सकी है। ऐसे में आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में शामिल होने को लेकर पुलिस वालों की तैयारियां बुरी तरह पिछड़ गई है। विभाग में इंटरनेशनल स्पर्धा में शामिल एक वर्दीधारी ने बताया कि 2020 में पाइंट 22 गन, बिग बोर से 02 गन और 4 एयर पिस्टल के साथ दो पिस्टल की खरीदी हुई है। इनके लिए राउंड देने के नाम पर विभाग ने पल्ला झाड़ लिया है। इस वजह से अभ्यास का सिस्टम पूरी तरह ठप पड़ गया है। सूत्रों का यह भी दावा है कि पीएचक्यू से खरीदी के दौरान बड़ी गड़बड़ी हो गई है। जिस पिस्टल और राइफल के लिए राउंड आना था, वह नहीं पहुंचा बल्कि उसकी जगह दूसरा स्टॉक आ पहुंचा है। अब खरीदी की शर्ताें पर ही मामला पूरी तरह उलझ गया है। पीएचक्यू में हुई इस चूक की वजह से प्रदेशभर में शूटिंग में माहिर पुलिसकर्मी अभ्यास से पिछड़ चुके हैं।

प्रदेश में 26 खिलाड़ियों ने जीते मेडल

शूटिंग स्पर्धाओं में मेडल जीतने वालों में पुलिस विभाग के 26 कर्मियों के नाम शामिल हैं। महिला पुलिसकर्मियों के साथ ही पुरूष वर्ग से भी खिलाड़ियों ने प्रतिस्पर्धा में शामिल होकर मेडल प्राप्त किया है। प्रतिभावान पुलिसकर्मियों के बेहतर भविष्य के साथ उनके लिए अभ्यास करने तत्कालीन डीजीपी डीएम अवस्थी ने नए राइफल व गन खरीदी के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। विभाग ने इसके लिए खरीदी तो की, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी की वजह से अब खिलाड़ी इसका खामियाजा भुगतने मजबूर हैं।

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