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फैमिली शो में डबल मीनिंग वर्ड का यूज करना सही नहीं : राज शांडिल्य

'कामेडी सर्कस', द कपिल शर्मा शो और फिल्म ड्रीम गर्ल के डायरेक्टर राज शांडिल्य का कहना है कि उन्होंने अपने किसी भी प्रोजेक्ट में डबल मीनिंग वर्ड्स का इस्तेमाल नहीं किया। उनका मानना है कि अगर हमें देश से प्यार है, तो देश में जो कुछ चल रहा है, उस पर बोलना चाहिए, लेकिन कुछ लोग अगर नहीं बोलते हैं, तो यह उनकी व्यक्तिगत आजादी है। राज की 'हरिभूमि' के साथ हुई बातचीत के अंश विस्तार से पढ़िए-

फैमिली शो में डबल मीनिंग वर्ड का यूज करना सही नहीं : राज शांडिल्य
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भोपाल। तालीबान-अफगान (Taliban-Afgan) मामले पर फिल्म इंडस्ट्री (Film Industry) के खान ब्रदर्स (Khan Brothers) की चुप्पी कहीं उन्हें मुसीबत में न डाल देगी? इस प्रश्न पर राज शांडिल्य का कहना है कि वैसे तो मैं हर एक टॉपिक पर खुलकर बोलता हूं। लेकिन यदि इंडस्ट्री के दिग्गज कुछ नहीं बोलते तो यह उनका व्यक्तिगत मामला है। आप देश से प्यार करते हैं, तो बोल सकते हैं।

फैमली शो में डबल मीनिंग शब्दों का प्रयोग नहीं होना चाहिए

राज कहते हैं कि हमने कभी भी डबल मीनिंग (Double Meaning) कॉमेडी नहीं बनाई। हमारे 500 में से गिने चुने 5-6 ही ऐपिसोड (Episode) होंगे, जिसमें कहीं-कहीं डबल मीनिंग वर्ड (Double Meaning Word) यूज किया हो, लेकिन वो भी इतना बेहुदा नहीं रहा। क्योंकि हमें पता है कि यह फैमली शो (Family Show) है, जिसमें डबल मीनिंग शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

भद्दी कामेडी किसी को लगता है परोस दो, तो परोसते हैं

उन्होंने कहा कि आजकल कॉमेडी (Comedy) के नाम पर भद्दी कॉमेडी का जो चलन है, उसमें दो विचारधाराएं हैं। किसी को लगता है अच्छा लग रहा है, परोस दो। लेकिन मेरा मानना है कि फैमली शो में ऐसे डबल मीनिंग वर्ड का प्रयोग नहीं होना चाहिए। अब यही चीजें ओटीटी प्लेटफार्म (Ott Plateform) पर चली गई हैं। क्योंकि फैमली के साथ देखे जाने वाले सीरियल या फिल्मों का टेस्ट अलग होता है। जिसमें ऐसे डबल मीनिंग वर्ड का प्रयोग अनुचित है।

भोपाल की जगह अब चंदेरी और ग्वालियर में करूंगा शूट

उन्होंने कहा कि मैं भोपाल (Bhopal) में कुछ नया करना चाहता हूं। एक फिल्म की शूटिंग (Shooting) भोपाल में करनी थी लेकिन उसकी परमिशन नहीं मिली तो फिर हमने चंदेरी और ग्वालियर (Gwalior) में शूट करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में मैं वेबसीरिज करूंगा जो पूरी तरह से फैमिली कॉमेडी से भरपूर होगी। और जिसमें भरपूर लॉफ्टर (Laughter) होगा, लोग खुलकर हसेंगे।

मेरे दोस्त से एक लड़के ने लड़की बनकर की दोस्ती

शांडिल्य का कहना है कि ड्रीम गर्ल (Dream Girl) बनाने का विचार मेरे दिमाग में तब आया जब सोशल नेटवर्किंग साइट (Social Networking Site) का जमाना था, और मेरे दोस्त को ऑरकुट (Orkut) पर एक लड़की से दोस्ती हुई और दोस्त को उससे प्यार हो गया, जब दोस्त उससे मिलने गया तो वो लड़की नहीं लड़का निकला, जिसका हमने बहुत मजाक उड़ाया। बस वही कांसेप्ट (Concept) मैं फिल्म में लेकर आया।

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