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क्या आपका भी लोन आवेदन लंबित चल रहा? क्यूं नहीं मिल रहा नया लोन, जानिए वज़ह..

दस करोड़ के ऋण पर डेढ़ करोड़ ही वसूली, अब लोन देने से तौबा, राज्य और केंद्र ने खींचे हाथ, दो साल से नहीं मिला विभाग को टारगेट, जिले में आठ सौ से अधिक लाभार्थियों को बांटा ऋण, सरकारी योजनाओं के तहत ऋण लेने के लिए तो लोग आगे रहते हैं, लेकिन उस ऋण की अदायगी को लेकर लोग थोड़ी भी दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। पढ़िए पूरी ख़बर..

क्या आपका भी लोन आवेदन लंबित चल रहा? क्यूं नहीं मिल रहा नया लोन, जानिए वज़ह..
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राजनांदगांव: सरकारी योजनाओं के तहत ऋण लेने के लिए तो लोग आगे रहते हैं, लेकिन उस ऋण की अदायगी को लेकर लोग थोड़ी भी दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। जिले में यही हाल अंत्यावसायी वित्त एवं विकास निगम से कई योजनाओं के तहत मिलने वाले लोन का है। जिले में अब तक आठ सौ से अधिक लोगों को लगभग दस करोड़ रुपए का ऋण विभिन्न योजनाओं के तहत अंत्यावसायी विभाग द्वारा बांटा गया है, लेकिन वापस करने महज डेढ़ सौ के करीब ही लाभार्थी आए।

अब भी सात करोड़ से अधिक राशि वसूलना हितग्राहियों से शेष है। यही कारण है कि बीते दो साल से केंद्र सरकार ने इस विभाग के जरिये दिए जाने वाले लोन पर ब्रेक लगा दिया है। राज्य सरकार ने भी इस साल के लिए कोई टारगेट विभाग को नहीं दिया है। यही हाल रहा तो आने वाले समय में अधिकांश सरकारी योजनाओं में ऐसा देखने को मिलने वाला है। ऐसा भी नहीं है कि यह कहानी केवल राजनांदगांव जिले की हो। प्रदेश के अधिकांश जिलों में अंत्यावसायी वित्त एवं विकास निगम द्वारा बांटे गए ऋण का यही हाल है।

किसी ने घर बदला तो कोई नंबर

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जब कर्मचारी हितग्राहियों तक लोन राशि वसूलने के लिए पहुंचते हैं तो उन्हें कई प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ता है। कई किसी हितग्राही ने अपना घर ही बदल लिया है तो किसी ने अपना फोन नंबर। इतना ही नहीं लोन लेने वाले के साथ ही कई प्रकरण में गारंटी लेने वाला तक गायब है। ऐसे में विभाग के कर्मियों को लोन की राशि वसूलने में एड़ी चोटी का दम लगाना पड़ रहा है। जबकि जिले के अंत्यावसायी वित्त एवं विकास निगम विभाग में केवल दो ही कर्मी तैनात हैं। ऐसे में कर्मचारियों की कमी से भी विभाग को परेशान होना पड़ता है।

नोटिस जारी फिर भी नहीं मानते

ऐसा भी नहीं है कि अंत्यावसायी वित्त एवं विकास निगम की विभिन्न योजनाओं के तहत बांटे गए ऋण की वापसी को लेकर विभाग कुछ करता न हो। विभाग द्वारा ऋण नहीं पटाने वालों की डिफाल्टर सूची तैयार की जा चुकी है और उन्हें समय-समय पर लोन अदायगी के लिए नोटिस भी जारी की जाती है, लेकिन इसके बाद भी हितग्राहियों द्वारा लोन की राशि वापस करने में कोई रूचि नहीं दिखाई जा रही है।

नहीं मिला दो साल से टारगेट

अंत्यावसायी वित्त एवं विकास निगम के तहत पहले हर साल दो दर्जन से अधिक लोगों को ऋण वितरण किया जाता रहा है। प्रदेश व केंद्र दोनों सरकारों द्वारा हितग्राहियों को ऋण वितरण के लिए फंड व टारगेट दिया जाता था, लेकिन डिफाल्टर लोगों की सूची बढ़ते देख सरकारों ने भी अपना हाथ इससे खींचना शुरू कर दिया है, जहां केंद्र सरकार ने बीते दाे साल से कोई फंड व टारगेट नहीं दिया है। वहीं राज्य सरकार ने भी इस साल अपने हाथ खींच लिए।

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