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रायपुर एम्स में वार्ड ब्वॉय करते हैं फार्मासिस्ट का काम, नियमित भर्ती के लिए बरसते पानी में आंदोलन

Raipur AIIMS में 2012 से अभी तक एक भी नियमित फार्मासिस्ट नहीं रखा गया है। फार्मासिस्ट के पदों पर नियुक्ति के लिए 40 से अधिक की पदों की स्वीकृति हो चुकी है। बावजूद इसके अब तक भर्ती नहीं किया गया है। इतना ही नहीं विरोध करने पर एम्स ने संविदा में काम करने वाले फार्मासिस्टों को भी नौकरी से निकाल दिया। पढ़िए पूरी खबर-

रायपुर एम्स में वार्ड ब्वॉय करते हैं फार्मासिस्ट का काम, नियमित भर्ती के लिए बरसते पानी में आंदोलन
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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के खिलाफ फार्मासिस्टों ने आवाज बुलंद कर ली है। गुरुवार को बड़ी संख्या में फार्मासिस्ट एम्स अस्पताल के बाहर एकजुट होकर प्रदर्शन करते नजर आए। बारिश के बावजूद हाथों में तख्तियां लेकर फार्मासिस्टों ने मानव शृंखला बनाकर विरोध जताया। इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने फार्मासिस्ट का काम नर्स और वार्ड ब्वाय से कराए जाने का आरोप एम्स प्रबंधन पर लगाया है। इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के सचिव राहुल वर्मा ने कहा कि एम्स अस्पताल (AIIMS) में लगभग 32 सुपर स्पेशल फैसिलिटी वाले विभाग हैं, लेकिन इन विभागों में एक भी नियमित फार्मासिस्ट नहीं है। फार्मासिस्ट का काम वॉर्ड बॉय और नर्सों से कराया जाता है। उन्होंने मरीजों की जान से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने पर कार्रवाई के लिए क़ानूनी प्रावधान भी है। हमारी मांग है कि एम्स अस्पताल में नियमित फार्मासिस्ट पद के लिए स्वीकृत 40 पदों पर भर्ती की जाए। इसके अलावा विरोध करने पर निकाले गए संविदा फार्मासिस्ट को फिर से ज्वाइनिंग दी जाए। इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के सचिव राहुल वर्मा ने कहा कि देश सभी एम्स अस्पताल में फार्मासिस्ट है, तो प्रदेश के एम्स में क्यों नहीं है? जब तक हमारी मांग नहीं मानेंगे, तब तक हम अलग-अलग तरीके से विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे। इसलिए जल्द से जल्द फार्मासिस्ट के पदों पर नियुक्ति दी जाए। खबरों के अनुसार रायपुर एम्स अस्पताल (AIIMS) में साल 2012 से अभी तक एक भी नियमित फार्मासिस्ट नहीं रखा गया है। फार्मासिस्ट के पदों पर नियुक्ति के लिए 40 से अधिक की पोस्ट स्वीकृति हो चुकी है। बावजूद इसके अब तक भर्ती नहीं किया गया है। इतना ही नहीं विरोध करने पर एम्स ने संविदा में काम करने वाले फार्मासिस्टों को भी नौकरी से निकाल दिया।

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