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सरकारी वितरण की सैंकड़ों नई किताबों का ज़खीरा मिला कचरे के ढेर में

छत्तीसगढ़ सरकार पिछले साल ही सरकारी और निजी स्कूलों के प्राइमरी से हायर सेकेंडरी तक की कक्षाओं के स्टूडेंट्स को निशुल्क पुस्तकें देने की नीति लाई है। इसे इस साल भी जारी रख गया है। शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के साथ पुस्तकों का वितरण कर दिया जाता है। ऐसे में इन किताबों का कचरे के ढेर में पड़ा मिलना गंभीर लापरवाही है जिसकी सघन जांच होनी चाहिए। पढ़िए पूरी ख़बर...

सरकारी वितरण की सैंकड़ों नई किताबों का ज़खीरा मिला कचरे के ढेर में
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कोरबा: शहर की खप्राभट्‌टा इलाके में स्थित बिसाहू दास उद्यान के सामने बस्ती के पास गार्डन में खेल रहे बस्ती के बच्चों को किताबों से भरी बोरी पड़ी मिली थी। बोरी में किताबें भरी देखी तो बच्चों ने उठा ली और उसे लेकर बस्ती में पहुंचे। आसपास के लोगों ने देखा तो बच्चों मीडिया को इसकी सूचना दी। कोरोना संक्रमण के चलते ज्यादातर जिलों में प्राइमरी और मिडिल स्कूल बंद कर ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कराई गई है। इसमें सरकारी और प्राइवेट स्कूल दोनों ही शामिल हैं। ऐसे में कोरबा में बच्चों की किताबें कचरे के ढेर में मिली हैं। किताबों को एक बोरी में भरकर फेंका गया था। खास बात यह है कि सभी किताबें नई हैं और सरकारी स्कूल की हैं। छत्तीसगढ़ सरकार पिछले साल ही सरकारी और निजी स्कूलों के प्राइमरी से हायर सेकेंडरी तक की कक्षाओं के स्टूडेंट्स को निशुल्क पुस्तकें देने की नीति लाई है। इसे इस साल भी जारी रख गया है। शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के साथ पुस्तकों का वितरण कर दिया जाता है। पाठ्य पुस्तक निगम ने इसके लिए डिपो की व्यवस्था की है। वहां से संकुल होकर पुस्तकें स्कूल में पहुंचती है। इसके बाद मांग के अनुरूप वितरण होता है।

मामले की जानकारी नहीं है। आप बता रहे हैं तो पता करवाते हैं- जिला शिक्षा अधिकारी

जिला शिक्षा अधिकारी जीपी भारद्वाज ने कहा कि मामले की जानकारी उन्हें नहीं है। आप बता रहे हैं तो पता करवाते हैं। यह असामाजिक तत्वों की करतूत है। मामले की जांच कराएंगे।

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