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विकास के खोखले दावों की खुली पोल, 12 साल की मासूम को 5 किमी पैदल चलने और घंटों इंतजार करने के बाद मिला इलाज

अस्पताल पहुंचने से पहले 5 किलोमीटर चलना पड़ा पैदल, एक घण्टे बैठकर करना पड़ा नाव का इंतज़ार। पढ़िए पूरी खबर-

विकास के खोखले दावों की खुली पोल, 12 साल की मासूम को 5 किमी पैदल चलने और घंटों इंतजार करने के बाद मिला इलाज
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कांकेर। छत्तीसगढ़ में विकास के दावे करते सरकार थकती नहीं है, सत्ता पर काबिज सरकारों ने विकास के दावे करके समय-समय पर अपनी पीठ खूब थपथपाई लेकिन अक्सर इसके दावों को खोखला साबित करती तस्वीर सामने आते रहती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया जब स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में एक 12 साल की मासूम को बीमार हालात में अस्पताल पहुंचने से पहले 5 किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ा, फिर नदी के किनारे एक घण्टे बैठकर नाव का इंतज़ार करना पड़ा, तब कहीं जाकर यह मासूम अस्पताल पहुंच सकी।

यह मामला जिले में धूर नक्सल प्रभावित संगम इलाके का है। कंदाडी ग्राम पंचायत का आश्रित ग्राम आलदण्ड की रहने वाली 12 साल की मानकी की तबियत रात में अचानक बिगड़ गई, गांव में इलाज के नाम पर कोई सुविधा नहीं होने के कारण रात भर मानकी बीमार हालात में तड़पती रही, सुबह होते ही परिजन उसे लेकर 5 किलोमीटर पैदल सफर करने के बाद बेचाघाट पहुंचे, यहां कोटरी नदी में आज भी पुल नहीं है, जिसके चलते नाव के सहारे नदी पार करनी पड़ती है, बीमार मानकी को लेकर जब परिजन पहुंचे तो यहां नाव भी नहीं थी, जिसके कारण एक घण्टे तक नदी किनारे ही परिजन इंतज़ार करते रहे, नाव के तट पर पहुंचने के बाद नदी पार कर बीमार मानकी को लेकर छोटे बेठिया उप स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, जहां मानकी को इलाज के लिए भर्ती करवाया गया है।

हैरान करता है ऐसा दृश्य, जहां ग्रामीण क्षेत्रो में एक पुल तक ग्रामीणों को नसीब नहीं है, सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य गांव-गांव तक पहुंचाने के दावे करती है लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मानकी के साथ जो कुछ घटा यह तस्वीर शासन-प्रशासन को आइना दिखा रही है कि आपका विकास सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गया है।

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