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गोलबाजार की आधा दर्जन दुकानें सौ साल पुरानी, यहां बसी हैं पुरखों की यादें

राजधानी के सबसे पुराने और ऐतिहासिक गोलबाजार को नया स्वरूप देने नए सिरे से बाजार को तोड़कर बनाने की कवायद रायपुर नगर निगम प्रशासन कर रहा है। गोलबाजार राजधानी सहित पूरे राज्य के सबसे पुराने खुदरा बाजारों में से एक है। इस बाजार में आदा दर्जन के करीब ऐसे दुकानदार हैं, जो बाजार के अस्तित्व में आने के बाद से अपना परंपरागत व्यवसाय कर रहे हैं।

गोलबाजार की आधा दर्जन दुकानें सौ साल पुरानी, यहां बसी हैं पुरखों की यादें
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रायपुर. राजधानी के सबसे पुराने और ऐतिहासिक गोलबाजार को नया स्वरूप देने नए सिरे से बाजार को तोड़कर बनाने की कवायद रायपुर नगर निगम प्रशासन कर रहा है। गोलबाजार राजधानी सहित पूरे राज्य के सबसे पुराने खुदरा बाजारों में से एक है। इस बाजार में आदा दर्जन के करीब ऐसे दुकानदार हैं, जो बाजार के अस्तित्व में आने के बाद से अपना परंपरागत व्यवसाय कर रहे हैं।

भले बदलते समय में दुकानों का स्वरूप बदल गया हो, लेकिन आज भी उनका व्यपार पारंपरिक है। हरिभूमि की टीम ने गोलबाजार की पड़ताल की, तो पाया कि गोलबाजार में स्थापित ज्यादातर दुकानदार 15 से 20 वर्ष पुराने हैं। इसी के साथ कई दुकानें चार से पांच दशक पुरानी हैं। गोलबाजार के अस्तित्व में आने के बाद से गिनती के दुकानदार अभी भी वहां काबिज हैं और अपना परंपरागत व्यवसाय कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर दुकानदार परचून और जड़ी बूटी का व्यवसाय कर रहे हैं। इसी के साथ गोलबाजार स्थित गोल गुंबज के पास आज भी पुराने समय की तर्ज पर मिट्टी के बर्तन बेचने वाले तथा बांस का सामान बेचने वाले पसरा लगाकर अपना सामान बेच रहे हैं।

एक दुकान ऐसी, जिसका मूलस्वरूप जस का तस

गोलबाजार स्थित बजरंगबली मंदिर के पीछे एक दुकान ऐसी है, जिसके मूलस्वरूप में किसी तरह से अब तक कोई बदलाव नहीं किया गया है। वह दुकान आज भी वैसी ही है, जैसी तत्कालीन नगर निगम प्रशासन ने बनाकर दी थी। गोलबाजार के पुराने कारोबारियों के मुताबिक यह दुकान जवाहर गुप्ता की है। इस दुकान में अब तक किसी प्रकार से कोई छेड़खानी नहीं की गई। साथ ही दुकान के दरवाजे से लेकर शेड और शेड छाने के लिए गाड़े गए खंभों काे भी अब तक नहीं बदला गया है।

व्यापारियों के साथ महापौर की बैठक

नगर निगम रायपुर के महापौर एजाज ढेबर ने निगम मुख्यालय में लगातार दूसरे दिन गोलबाजार के व्यापारियों के साथ बैठक की। महापौर ने व्यापारियों से गोलबाजार को स्मार्ट बाजार में बदलने एवं किराएदार व्यापारियों को मालिकाना हक देने की बात कही। महापौर ने व्यापारियों को विश्वास दिलाया कि उनकी सहमति के बिना नगर निगम गोलबाजार की एक भी दुकान को नहीं हटाया जाएगा। महापौर ने एमआईसी सदस्य सुंदर जोगी, पूर्व पार्षद राधेश्याम विभार, उपायुक्त बाजार आरके डोंगरे, जोन 4 कमिश्नर विनय मिश्रा, जोन सहायक राजस्व अधिकारी बलदाऊ वर्मा की उपस्थिति में गोलबाजार के 50 व्यापारियों की समूह से चर्चा की।

कर उन्हें निगम की योजना से अवगत कराया। साथ ही सभी व्यापारियों से सहयोग देने आव्हान किया। महापौर ने गोलबाजार को स्मार्ट बाजार बनाने व व्यापारियों को मालिकाना हक देने की योजना काे नायाब बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसी योजना पूरे प्रदेश के किसी भी शहर में किसी भी नगरीय निकाय में तैयार नहीं की गई है। यह जनहितकारी योजना है, जिसे हमने सभी व्यापारियों के पूर्ण सकारात्मक सहयोग से पूरा करने का संकल्प लिया है।

महापौर श्री एजाज ढेबर द्वारा योजना की जानकारी देने पर प्रसन्न होकर निगम के चतुर्थ तल पर स्थित सामान्य सभा सभागार में उपस्थित गोलबाजार के सभी व्यापारियों ने इसमें सहमति व्यक्त करते हुए तालियां बजाकर महापौर के प्रस्ताव का स्वागत किया एवं उन्हें धन्यवाद दिया। विगत दिवस भी महापौर श्री ढेबर ने निगम के सामान्य सभा सभागार में 50 - 50 व्यापारियों के समूहों ने गोलबाजार के व्यापारियों की बैठक लेकर उन्हें गोलबाजार को स्मार्ट बाजार बनाने एवं व्यापारियों को मालिकाना हक देने की योजना की दी थी।

बेजा-कब्जा ने बनाया भूल-भुलैया

गोलबाजार में खरीदी करने आने वाले ज्यादातर लोग अंदर ही भटक जाते हैं। खरीदार जिस गेट से अंदर प्रवेश करते हैं, उनमें से ज्यादातर नए ग्राहक उसी गेट से निकलने के बजाय किसी दूसरे गेट से निकलते हैं। गोलबाजार को अगर भूल-भुलैया बाजार कहें, तो यह अतिश्योक्ति नहीं होगी। गोलबाजार के अंदर किए गए अवैध कब्जों की वजह से भी यह बाजार भूल-भुलैया बन गया है। बेजा कब्जा की वजह से बाजार की कई गलियां इतनी तंग हो गई हैं कि यहां से पैदल निकलना दूभर है।

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