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फर्जी जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट मामले में दो लोग गिरफ्तार

भारत सरकार राजस्व विभाग के सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस द्वारा देशभर में फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के रैकेट पर नकेल कसने विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत छत्तीसगढ़ से दो कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपी दोस्त हैं जो संदिग्ध कारोबार को अंजाम देने में लगे थे।

फर्जी जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट मामले में दो लोग गिरफ्तार
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जीएसटी धोखाधड़ी आरोपी गिरफ्तार (प्रतीकात्मक फोटो)

भारत सरकार राजस्व विभाग के सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस द्वारा देशभर में फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के रैकेट पर नकेल कसने विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत छत्तीसगढ़ से दो कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपी दोस्त हैं जो संदिग्ध कारोबार को अंजाम देने में लगे थे। फर्जी जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े एक ऐसे रैकेट का पर्दाफाश किया गया है जिसे दो दोस्तों रोहन तन्ना व अभिषेक पाण्डेय दोनों निवासी रायपुर द्वारा चलाया जा रहा था। बता दें नवम्बर 2020 से इसी कड़ी में जीएसटी इंटेलीजेंस रायपुर द्वारा की जा रही एक जांच में बड़े रैकेट का खुलासा हुआ था।

कार्यवाही पिछले कुछ महीनों से निरंतर चल रही थी। जीएसटी इंटेलीजेंस, रायपुर जोनल इकाई के एडिशनल डायरेक्टर जनरल अजय कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में सात महीनों से चल रही जांच में मंगलवार को कामयाबी हासिल हुई। जांच के लिए दोनों रोहन तन्ना व अभिषेक पाण्डेय को विभाग द्वारा बुलाया गया था। वे हाजिर नहीं हुए। कुछ रोज बाद दोनों भाग खड़े हुए थे। उनके बारे में सटीक जानकारी लगने पर गिरफ्तारी की कार्रवाई हुई। दोनों ही आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। जहां से 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

फेक बिल में छिपे फर्जी फर्म

विभाग द्वारा एक ऐसे फेक बिल के रैकेट का खुलासा हुआ है जिसमें 8 से अधिक फर्जी फर्मों को बनाकर लगभग 7 करोड़ की जीएसटी चोरी कर शासन को राजस्व हानि पहुंचाई गई है। सूत्रों के अनुसार उक्त फर्जी फर्मों से फर्जी बिल जारी कर उनके आधार पर विभिन्न फर्मों को फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट पारित किया गया। जांच से जुड़े सुराग जुटाने के लिए कई जगह छापेमार कार्रवाई लगातार जारी है।

एक जगह से फर्मों का संचालन

रायपुर स्थित विपिन तन्ना की फर्म मेसर्स जेआर ट्रेडर्स के ऑफिस से कई फर्मों का संचालन किया जाता था। उन सभी फर्मों के प्रोप्राइटर डमी थे। असल में उन सभी फर्मों को कहीं न कहीं रोहन तन्ना व अभिषेक पाण्डेय द्वारा ही संचालित किया जाता था। कई फर्मों से माल का बेचा जाना दिखाया गया लेकिन उसमें कोई भी खरीदी नहीं थी।

कई ऐसी भी फर्म पाई गई जिनकी खरीदी अस्तित्वहीन अर्थात बोगस फर्मों से थी। एक फर्म मेसर्स अभिषेक मार्केटिंग जिसके प्रोप्राइटर अभिषेक पाण्डेय थे उसमें भी इन्हीं बोगस फर्मों द्वारा बिल पाकर आगे बेचे गए थे लेकिन बिना खरीदी के सिर्फ बिल्स बेचे गए थे।


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