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मानस नेशनल पार्क से जल्द आएंगे चार नए राजकीय मेहमान

राजकीय पशु वनभैंसा का कुनबा बढ़ाने वन विभाग ने एक बार फिर कवायद तेज कर दी है। असम स्थित मानस नेशनल पार्क से चार वनभैंसे लाने वन अफसरों की टीम एक बार विजिट कर वापस लौट आई है। इस बार वन अफसरों की टीम एक साथ नर-मादा चार वनभैंसे लाने की योजना बना रही है। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ पीवी नरसिंग राव के अनुसार वनभैंसों को लाने के लिए समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन विभाग की कोशिश रहेगी कि वनभैंसों को जल्द से जल्द लाया जाए।

मानस नेशनल पार्क से जल्द आएंगे चार नए राजकीय मेहमान
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रायपुर. राजकीय पशु वनभैंसा का कुनबा बढ़ाने वन विभाग ने एक बार फिर कवायद तेज कर दी है। असम स्थित मानस नेशनल पार्क से चार वनभैंसे लाने वन अफसरों की टीम एक बार विजिट कर वापस लौट आई है। इस बार वन अफसरों की टीम एक साथ नर-मादा चार वनभैंसे लाने की योजना बना रही है। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ पीवी नरसिंग राव के अनुसार वनभैंसों को लाने के लिए समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन विभाग की कोशिश रहेगी कि वनभैंसों को जल्द से जल्द लाया जाए।

गौरतलब है कि चिगत अप्रैल माह में वन विभाग की टीम असम स्थित मानस नेशनल पार्क से एक नर तथा मादा वनभैंसा रेस्क्यू कर उन्हें यहां लेकर आई थी। दोनों वनभैंसों को यहां के प्राकृतिक वातावारण में ढालने के लिए बारनवापारा में अलग से बाड़ा बनाकर रखा गया है। पूर्व में लाए गए वनभैंसों को उदंती-सीतानदी वनभैंसा रेस्क्यू सेंटर में रखना है, इस बात को लेकर विभाग ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है। दोनों वनभैंसों की देखरेख करने अलग से वनकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।

जानकारी नहीं

वनभैंसों का रहवास केंद्र बारनवापारा से लेकर उदंती-सीतानदी के साथ इंद्रावती टाइगर रिजर्व के साथ बस्तर के जंगल रहा है। वर्तमान में उदंती-सीतानदी में एक दर्जन के करीब वनभैंसे हैं, लेकिन इंद्रावती टाइगर रिजर्व में कितने वनभैंसे हैं, इसकी जानकारी वन अफसरों को भी नहीं है। इसकी वजह इंद्रावती का इलाका नक्सल प्र‌भावित क्षेत्र होने की वजह से वहां वन्यजीवों की गणना करना वन अफसरों के लिए टेढ़ी खीर है। उल्लेखनीय है कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व में महाराष्ट्र के वनभैंसों की आवाजाही होती रहती है।

कुनबा बढ़ाने कई प्रयोग

राजकीय पशु का कुनबा बढ़ाने वन विभाग के साथ शासन स्तर पर कई प्रयोग किए जा रहे हैं। राजकीय पशु का कुनबा बढ़ाने क्लोनिंग करने के साथ कृत्रिम गर्भाधान का साहरा लिया गया है। इसके साथ ही अब मानस नेशनल पार्क से वनभैंसे लाकर कुनबा बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। बावजूद इसके जितनी तेजी के साथ वनभैंसों की संख्या जिस गति से बढ़नी चाहिए, वह नहीं बढ़ रही।

...इसलिए मानस के वनभैंसों का चुनाव

पूर्व में असम से लाए गए वनभैंसे बुबैलस, बुबालिस प्रजाति के हैं। छत्तीसगढ़ में इसे अर्ना के नाम से भी जाना जाता है। यह प्रजाति उत्तर-पूर्वी राज्यों में पाई जाती है, पूरे भारत में यह प्रजाति सिर्फ पांच फीसद ही है। वन अफसरों के अनुसार असम के वनभैंसे का छत्तीसगढ़ में पाए जाने वाले वनभैंसों से डीएनए मिलता है, इस वजह से मानस नेशनल पार्क के वनभैंसे लाने का निर्णय लिया गया है, जिससे राज्य के वनभैंसा का डीएनए परिवर्तन न हो।

जल्द लाएंगे

असम से जो वनभैंसे लाने है, उसके लिए वन विभाग की टीम विजिट कर लौटी है। साथ ही जिन वनभैंसों को लाना है, उसे टीम ने चिन्हांकित कर लिया है। जल्द ही उन्हें लाने की योजना बनाई जा रही है।

- पीवी नरसिंग राव, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ

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