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शुरुआती बारिश के बाद जुलाई में सूखा, खेतों में जितनी दरारें, माथे पर उतनी ही लकीरें

मानसून में शुरुआती बारिश के बाद जुलाई सूखा गुजर रहा है। खेतों की दरारें और किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहराती जा रही हैं। हालात यह है कि दस दिन और सूखा रहा तो खरीफ फसल बरबाद हो जाएगी। छत्तीसगढ़ में हाल के वर्षों में शायद पहली बार ऐसी नौबत आई है जब मानसून आने के बाद जुलाई के महीने के मध्य में किसानों को अपनी खेतों के लिए बांधों से पानी की मांग करनी पड़ी है।

शुरुआती बारिश के बाद जुलाई में सूखा, खेतों में जितनी दरारें, माथे पर उतनी ही लकीरें
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रायपुर. मानसून में शुरुआती बारिश के बाद जुलाई सूखा गुजर रहा है। खेतों की दरारें और किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहराती जा रही हैं। हालात यह है कि दस दिन और सूखा रहा तो खरीफ फसल बरबाद हो जाएगी। छत्तीसगढ़ में हाल के वर्षों में शायद पहली बार ऐसी नौबत आई है जब मानसून आने के बाद जुलाई के महीने के मध्य में किसानों को अपनी खेतों के लिए बांधों से पानी की मांग करनी पड़ी है।

खेती किसानी के जानकार मानते हैं कि इस साल मानसून समय पूर्व आने से खेती की गतिविधियां तो शुरु हो गई, लेकिन जब किसानों को रोपा लगाने के लिए पानी की जरुरत पड़ी तो मानसून ब्रेक हो गया है। इस बीच किसानों की मांग पर सरकार ने धमतरी के सोढूर बांध से पानी छोड़ दिया है, लेकिन किसान गंगरेल से भी पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं। इस संवाददाता ने रायपुर जिले के आसपास अभनपुर,आरंग क्षेत्र में धान की फसल का जायजा लेने के बाद पाया कि किसानों ने शुरुआती बारिश के बाद से ही धान की फसल लेने की तैयारी में काम शुरु कर दिया था। शुरुआत में अच्छी बारिश से उत्साहित किसानों ने सबसे पहले रोपा लगाने की तैयारी की। बाद में जब खेतों में पानी जमा हुआ तो छिडकाव के माध्यम से भी बुवाई कर दी। लेकिन इस बीच जुलाई में दो बार मानसून ब्रेक की वजह से रोपा लगाने वाले तथा सीधी बुवाई करने वाले किसान कम बारिश के कारण संकट में पड़ गए हैं।

सोंढूर से छोड़ा गया पानी

धमतरी जिले में जल संसाधन विभाग द्वारा रविवार से सोंढूर जलाशय से पानी छोड़ा जा रहा है। इस जलाशय से पांच सौ क्यूसेक पानी दुधावा जलाशय को भरने और किसानों के फसल की सिंचाई के लिए छोड़ा जा रहा है। वर्षा नहीं होने के कारण फसल को सूखने से बचाने के लिए सिंचाई हेतु नगरी के सोंढूर जलाशय से पानी छोड़ने की मांग कर रहे थे। हालांकि पहले भी जलाशय से पानी छोड़ा गया था, किन्तु क्रॉस रेगुलेटर की मरम्मत कार्य की वजह से पानी कम छोड़ रहे थे, लेकिन रविवार सुबह से जलाशय से 500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

मुरझाने लगे धान के पौधे,खेतो में दरारें

गरियाबंद से खबर है कि बीते एक पखवाड़े से बारिश नही होने से धान की फसल पर सूखे के बादल मंडराने लगे हैं। धान के पौधे तेज गर्मी से मुरझा गए है। आषाढ़ का महीना समाप्ति की ओर है फिर भी बारिश का अतापता नहीं है। किसानों की नज़र अब आसमान की ओर टिका हुआ है। खेतों में मिट्टी दरककर सूखने लगी है और रोपा मुरझाने लगे हैं। अगर जल्द ही बारिश नहीं हुई तो किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा इधर तेज धूप के कारण खेतों में दरारें बढ़ने लगी है। ये दरारें किसानों की चिंता दोगुनी कर रही। ऐसी ही स्थिति कर्वधा,महासमुंद व आसपास के इलाकों में बनी है।

धमतरी से धमधा तक बुरा हाल

इधर धमतरी जिला जहां काफी क्षेत्र सिंचित है, वहां भी बारिश न होने से धान की फसल पर संकट है। जिले में पिछले एक सप्ताह से बारिश न होने के कारण खेतों में दरारें साफ नजर आ रहीं है। जिले के किसान बांधों से पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर बेमतरा के धमधा इलाके में जहां खेती काफी बड़े पैमाने पर होती है, वहां से मिली जानकारी के अनुसार वहां बारिश नहीं होने से किसान चिंतित हैं। यहां भी कई इलाकों में खेतों में सूखे की वजह से दरारें आ गईं है।

जगदलपुर. पिछले एक सप्ताह से बारसूर इलाके में चिलचिलाती धूप निकल रही है। खरीफ की मुख्य फसल पर इसका प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल रहा है। किसान टकटकी लगाए आसमान को निहार रहे हैं पर उनकी परेशानी कम नहीं हो रही है। 11 जुलाई के बाद बारसूर, मुचनार , उपेट व हितामेटा में हल्की हल्की से मध्यम बारिश हुई। जबकि इससे पहले इलाके में एक सप्ताह तक लगातार चिलचिलाती धूप और तेज गरमी का माहौल रहा। मौसम के बदले तेवर से लोगों को फौरी तौर पर राहत मिली। वही रोपा लगाने वाले किसान जो पानी के अभाव में काम पूरा नही कर पा रहे थे, अब पुनः सोमवार से इस काम में लग जाएंगे। इधर बारिश के बाद भी बिंयासी का काम नहीं हो पाएगा। रविवार को हुई वर्षा से क्यारियों में केवल मचाई लायक पानी है।

बारिश न होने से खेत सूखे

जगदलपुर तहसील के नजदीक के गांव बिरिंगपाल में अनेक किसानों के खेत सूखे होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। सूखे खेत दिखाते किसानों ने हरिभूमि से कहा कि यही हाल रहा तो अकाल की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

रोपा लगा रहे हैं अब पानी चाहिए

अभनपुर क्षेत्र के ग्राम तोरला निवासी रूपेंद्र तारक अपनी खेतों में रोपा लगवा रहे हैं,लेकिन उन्हें इस बात की चिंता है कि पानी कैसे मिले। उन्होंने कहा कि समय पर बारिश हुई तो ठीक है,वरना बांधों से छूटने वाला पानी ही फसल और मेहनत को बचा सकता है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो मुश्किल हो जाएगी। जिन किसानों के पास पानी के साधन नहीं हैं उनके लिए बांध के पानी का ही सहारा है। गरियाबंद से खबर है कि बीते एक पखवाड़े से बारिश नही होने से धान की फसल पर सूखे के बादल मंडराने लगे हैं। धान के पौधे तेज गर्मी से मुरझा गए है। आषाढ़ का महीना समाप्ति की ओर है फिर भी बारिश का अतापता नहीं है। किसानों की नज़र अब आसमान की ओर टिका हुआ है। खेतों में मिट्टी दरककर सूखने लगी है और रोपा मुरझाने लगे हैं। अगर जल्द ही बारिश नहीं हुई तो किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा इधर तेज धूप के कारण खेतों में दरारें बढ़ने लगी है। ये दरारें किसानों की चिंता दोगुनी कर रही। ऐसी ही स्थिति कर्वधा,महासमुंद व आसपास के इलाकों में बनी है।

जहां पानी उपलब्ध, वहां दिया जाए

जुलाई में आम तौर पर ऐसी नौबत नहीं आती है। बांधों में पानी भरा है इसलिए पानी देने की मांग कर रहे है। रायपुर जिले में जहां डेम में पानी उपलब्ध है, वहां पानी दिया जाना चाहिए। इस संबंध में जल संसाधन मंत्री को पत्र भी लिखा है।

- धनेंद्र साहू, विधायक, अभनपुर

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