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कवर्धा मामले में डॉ. रमन की चेतावनी: समूह विशेष को प्रताड़ित किया गया तो गांव-गांव में स्थिति विस्फोटक होगी

बेटे अभिषेक पर FIR के बाद भड़के डॉ. रमन, कहा: ज्यूडिशियल इनक्वायरी के बिना कुछ साफ नहीं होगा

कवर्धा मामले में डॉ. रमन की चेतावनी: समूह विशेष को प्रताड़ित किया गया तो गांव-गांव में स्थिति विस्फोटक होगी
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रायपुर। कवर्धा में हिंसक झड़प और तोड़फोड़ के बाद से राज्य में सियासी पारा गर्म है। कवर्धा पुलिस ने पूर्व सांसद और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह के खिलाफ भी केस दर्ज किया है। इस खबर के बाद डॉ. रमन सिंह की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई। रायपुर में मीडिया से बात करते हुए चेतावनी भरे के लहजे में डॉ. रमन बोले- एक समूह को प्रताड़ित किया जा रहा है, ऐसा ही चला तो गांव-गांव में स्थिति विस्फोटक होगी। आज तो हम शांति से हल ढूंढना चाहते हैं।

उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि जिस तरह से प्रशासन का उपयोग राजनीतिक दृष्टि किया जा रहा है ये स्थिति को खराब कर रहे हैं। 70 बच्चों को गिरफ्तार किया गया है। ये ठीक नहीं है। जब तक कवर्धा हिंसा मामले में ज्यूडिशियल इनक्वायरी नहीं होगी तब तक निराकरण नहीं होगा। शुक्रवार रात भाजपा नेताओं का प्रतिनिधि मंडल राजभवन पहुंचा। वहां राज्यपाल से मुलाकात के बाद इस मामले में दखल देने को कहा। इस प्रतिनिधि मंडल में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, पूर्व मंत्री व विधायक बृजमोहन अग्रवाल, अजय चंद्राकर, शिवरतन शर्मा, सांसद संतोष पाण्डेय, सुनील सोनी, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, भाजपा प्रदेश मंत्री विजय शर्मा, भाजपा जिला अध्यक्ष कवर्धा अनिल सिंह, पूर्व विधायक अशोक साहू, मोतीलाल चंद्रवंशी शामिल थे। प्रतिनिधि मंडल ने राज्यपाल से इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

कौन माहौल बिगाड़ रहा है सबको पता है: अभिषेक

उधर पूर्व सांसद अभिषेक सिंह ने मीडिया से कहा कि कवर्धा को कौन अशांत बना रहा है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, वे लोग सबके सामने हैं। कांग्रेस सरकार के दबाव में एकतरफा कार्रवाई की जा रही है। क्षेत्र के ऐसे जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी कार्यवाही की जा रही है, जो वातावरण को बेहतर बनाने में जुटे हुए हैं। यह बेहद ही शर्मनाक और निंदनीय है।

मेरे पास मिनट-टू-टू मिनट की जानकारी: मो. अकबर

उधर राज्य सरकार के मंत्री और कवर्धा विधायक मो. अकबर ने भी इस मामले में अब अपना मुंह खोला है। उन्होंने रायपुर स्थित अपने सरकारी बंगले में मीडिया से कहा कि मैं वहां जल्द जाऊंगा। शांति व्यवस्था विधायक और सरकार की जिम्मेदारी है। जाकर खुद को दिखाने से कुछ नहीं होता, मैं मिनट-टू-मिनट जानकारी ले रहा हूं। जिस झंडे को हटाने से विवाद हुआ उसे मैंने ही दोबारा लगवाया। वहां के लोग शांतिप्रिय हैं। IG विवेकानंद सिन्हा ने कहा है कि पूरा मामला प्रायोजित था। लोग रायपुर के माना, गुढ़ियारी, बेमेतरा से मुंगेली से वहां पहुंचे थे। वो क्या करने गए थे। इसकी इन्वेस्टिगेशन हो रही है, सब साफ हो जाएगा।

कवर्धा के अशांत की होने की वजह

मामला तब बिगड़ा जब 3 अक्टूबर को वार्ड नंबर 27 के लोहारा नाका चौक इलाके में झंडा लगाने को लेकर विवाद हुआ। रविवार दोपहर कुछ युवकों ने अपना झंडा चौराहे पर लगा दिया। इसी बात को लेकर दो गुटों के युवक सड़क पर लाठी-डंडे लेकर उतर आए। एक दूसरे को पीटा। पत्थरबाजी हुई। पुलिस की आंखों के सामने एक युवक को भीड़ पीटती रही। मारपीट में 8 लोग घायल हुए हैं। इसके बाद सोमवार को शांति समिति की बैठक भी बुलाई गई थी। 5 अक्टूबर को जिले में कुछ संगठनों ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान हिंसक घटनाएं हुई। गाड़ियों में तोड़-फोड़ भी की गई।

इन भाजपाइयों पर FIR

कर्वधा शहर में 5 अक्टूबर को हुए उपद्रव के बाद पुलिस ने 3 अलग-अलग FIR दर्ज की थी। भाजपा ने जब FIR की कॉपी कोर्ट से निकलवाई, तो पता चला कि वरिष्ठ नेताओं का नाम भी जोड़े गए हैं। इनमें सांसद संतोष पांडेय, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, पूर्व विधायक मोतीराम चंद्रवंशी, अशोक साहू, प्रदेश मंत्री विजय शर्मा, जिलाध्यक्ष अनिल सिंह, भाजयुमो जिलाध्यक्ष पीयूष ठाकुर, VHP जिला प्रमुख नंदलाल चंद्राकर सहित कैलाश चंद्रवंशी, राजेंद्र चंद्रवंशी, पन्ना चंद्रवंशी, उमंग पांडेय, राहुल चौरसिया, भुनेश्वर चंद्राकर के नाम शामिल हैं।

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