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डोंगरगांव : स्वास्थ्य विभाग के घोटाले में MLA दलेश्वर साहू का नाम, बिल भुगतान में गड़बड़ी का मामला उजागर

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में एक बार फिर भ्रष्टाचार और गड़बड़ी का मामला सामने आया है। विधायक दलेश्वर साहू के नाम से बिल जारी किए जाने और बगैर स्वीकृति के भुगतान भी कर लिए जाने के बाद अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अपनी दामन बचाने में जुट गए हैं। पढ़िए पूरी खबर-

डोंगरगांव : स्वास्थ्य विभाग के घोटाले में MLA दलेश्वर साहू का नाम, बिल भुगतान में गड़बड़ी का मामला उजागर
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राजनांदगांव। डोंगरगांव विधायक दलेश्वर साहू के नाम पर बने डीजल बिल के भुगतान का मामला ठंडा होने के बाद डोंगरगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ने बिना नाम और तारीख वाले बिल का भुगतान कर नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। यह मामला सामने आने के बाद भी ईमानदारी का चोला ओढ़ने वाले जनप्रतिनिधियों ने चुप्पी साध रखी है।

उल्लेखनीय है कि बीते माह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के कुछ बिल वायरल हुए थे। कोरोना के दूसरे चरण में एम्बुलेंस में डलवाये गए तीन बिलों में सीएमओ की बजाय विधायक दलेश्वर साहू के नाम का उल्लेख किया गया था। व्यक्तिगत नाम से जारी बिल का भुगतान सरकारी स्तर पर अस्पताल प्रशासन ने किया था। इस संबंध में बीएमओ का कहना था कि चालक ने गलती से बिल में दलेश्वर साहू लिखवा दिया था। किसी भी सूरत में इन बिलों के स्वीकृत नहीं होने के बाद भी भुगतान कर दिए जाने के मामले में अस्पताल प्रशासन के पास कोई जवाब नहीं है।

अफसर से कर्मियों के प्रताड़ित होने के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं किन्तु डोंगरगांव में उल्टा हो रहा है। अस्पताल में पदस्थ बीएमओ अपने अधीन काम करने वाले कर्मचारियों से आए दिन प्रताड़ित हो रही है। हालात यह निर्मित हो चुके हैं कि वह अपना पद छोड़ने तक तैयार हो गई हैं। हैरानी वाली बात यह है कि आए दिन मामलों के खुलासे के बाद भी विभाग न तो दोषी कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है और न जनप्रतिनिधि रूचि ले रहे है। बताया जाता है कि अपनी कार्यप्रणाली से लोगों के बीच अच्छी छवि रखने वाली बीएमओ को हटाया गया तो पब्लिक उनके फेवर में मोर्चा खोल सकती है। गलत बिलों के भुगतान का मामला थमने के अंदर बाद डोंगरगांव अस्पताल प्रशासन ने बिल स्वीकृत कर संबंधित फर्म को भुगतान भी कर दिया है। राजनांदगांव की दो और डोंगरगांव की एक मेडिकल स्टोर्स के बिल में खरीददार का नाम और तारीख का भी जिक्र नहीं है। इसके बाद भी यह बिल न सिर्फ स्वीकृत हो गए, बल्कि उनका भुगतान भी हो गया। बताया जाता है कि इस तरह ढेरों बिल है, जो संदिग्ध है।

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