Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

गुंडों की डिजिटल कुंडली बनी, कुनबे के साथ दोस्तों की हिस्ट्री भी, बदमाश अंडरग्राउंड

कोई छोटा-मोटा गुंडा डॉन न बन जाए इसकी कवायद अभी से

गुंडों की डिजिटल कुंडली बनी, कुनबे के साथ दोस्तों की हिस्ट्री भी, बदमाश अंडरग्राउंड
X

रायपुर. कानपुर का एक छोटा गुंडा धीरे-धीरे सिस्टम का फायदा उठाकर डॉन बन गया और पुलिस के लिए ही काल साबित हुआ। रायपुर में उसका इम्पैक्ट दिख रहा है। पुलिस ने पहली बार शनिवार से गुंडों की डिजिटल कुंडली तैयार की। उनके आधार, पैन कार्ड समेत सभी दस्तावेज मंगाए गए। पूरे खानदान की हिस्ट्री पता की गई। इतना ही नहीं, गुंडों के दाेस्तों के बारे में रिकार्ड बनाया गया है। पुलिस का खौफ ऐसा है कि रायपुर के आधे से ज्यादा गुंडे शहर से गायब हो गए हैं।

पुलिस यह पता कर रही है कि बदमाशों के बैंक खातों में कितना बैलेंस है? अगर बैंक में बड़ी राशि है तो वह कहां से पहुंची है। गुंडा-बदमाश ने एक महीने में किस-किस से संवाद या फिर मित्रता की है, इसका हिसाब अब थानों रखा जा रहा है। शुरूआत रायपुर के नए पुलिस कप्तान अजय यादव के निर्देश पर शनिवार से हो गई है, जहां पुलिस ने नए फार्मेट में पुराने अपराधियों का डाटा बेस तैयार करने कवायद तेज की है। पेन नंबर, आधार नंबर के साथ ही अपराधियों का पूरा बायोडाटा थाने के डिजीटल लॉकर में कैद होगा। यही नहीं अपराधी से जुड़े करीबियों के फोन नंबर और घर के पते वेरिफाई करते हुए अलग से उनका भी एकाउंट खुलेगा। एसएसपी अजय यादव ने एक दिन पहले सभी थानेदारों को दिशा निर्देश जारी कर जल्द से जल्द रिपोर्ट सुपुर्द करने को कहा है। पिछले हफ्ते पुलिस ने आर्थिक अपराधाें में संलिप्त पुराने बदमाशों की नई हिस्ट्रीशीट खोलते हुए गुंडा लिस्ट और निगरानी बदमाशों की नई सूची जारी की थी। डेढ़ सौ से ज्यादा नए बदमाशों को पुरानी सूची में शामिल किया। अब नए फर्मेट में बदमाशों के लिए डिजीटल कुंडली का ब्याेरा बनाने की व्यवस्था कायम की है।

एएसपी तारकेश्वर पटेल ने बताया, केवल निगरानी, गुंडा-बदमाश ही नहीं चाकूबाजी में संलिप्त रहने वालों को भी सूचीबद्ध कर उनसे बैंक खाता नंबर की जानकारी लेने कहा गया है। थानेदार निगरानियों को बुलाकर थानों में उनका डाटा अपलोड करेंगे। शहर में कई गुंडे बदमाश गायब हैं। पते पर तस्दीकी नहीं होने पर रिश्तेदारों और दूसरे ठिकानों में भी खोजबीन शुरू कर दी गई है।

रायपुर जिले के 1 लाख से ज्यादा केस डिजिटल लॉकर में

सीसीटीएनएस- क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्किंग सिस्टम प्रोजेक्ट के तहत में रायपुर जिले के तकरीबन एक लाख प्रकरणों को डाटा कंप्यूटरकृत प्रणाली से सुरक्षित किया जा रहा है। अब गुंडे बदमाशों का डाटा बेस अपडेट किया जाएगा। केस के साथ अपराधियों का पर्सनल डाटा भी आसानी से मिल सकेगा।

समझाइश के बाद सख्ती

पुलिस रिकार्ड बनाने के बाद पहले सबको समझाइश देगी। इसके बाद भी अपराध में संलिप्त होने के बाद सख्ती की जाएगी। पुलिस की कोशिश होगी कि छोटे अपराधियों को सुधार दिया जाए या फिर जेल भेज दिया जाए। ऐसे लोगों को समाज में सक्रिय रहने नहीं दिया जाएगा।

ठग और आर्थिक अपराधी भी निशाने पर

ऐसे हिस्ट्रीशीटर निशाने पर हैं जो सीधे अपराध में शामिल नहीं हैं लेकिन लोगों को ठगने, जमीन-जायदाद कब्जा करने और डिजीटल किस्म के अपराध में शामिल हैं। ऐसे लोगों के बैंक खाते खंगाले जा रहे हैं। उनको बैंक में कहां से पैसा आया और कहां ट्रांजेक्शन हुआ इसकी खोज-खबर ली जा रही है। संदिग्ध लेनदेन की शंका होने पर बुलाकर सफाई मांगी जा रही है। इससे बदमाशों में खलबली मची है।

हिस्ट्रीशीट में नया फार्मेट

रिकार्ड में जरूरी- फिंगरप्रिंट, मोबाइल नंबर, आधार और पेन नंबर, परिवार सदस्यों का ब्योरा

एक माह का ब्योरा- घर में कौन-कौन रहने को पहुंचा, इसकी जानकारी अनिवार्य

कमाई का स्राेत- स्वंय का, परिवार का, कार्यस्थल का वर्तमान पता

आवाजाही डाटा- तीन माह के भीतर कहां गए थे? और कहां पर रूके ?

करीबी दोस्त- वर्तमान में करीबी साथी कौन-कौन हैं? उनका बायोडाटा और मोबाइल नंबर।

Next Story