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डायरी काण्ड: 366 करोड़ की साजिश नाकाम, पढ़िए साजिश की विस्तृत गाथा

ज़ोर शोर से उठी डायरी काण्ड की गुत्थी जब सुलझी तो जो सामने आया वो सबको हैरान कर गया,साजिश में सिर्फ बदला था या अभी खुलने हैं कुछ और बड़े राज़? कुछ दिनों पहले तक गेंदराम चंद्राकर का नाम इज्जत से लिया जाता था। जिला शिक्षा अधिकारी जो थे। शनिवार को दुनिया से नजर बचाते सिर झुकाए पुलिस कंट्रोल रूम में खड़े थे। फिर सामने आया पूरा सच। पढ़िए डायरी काण्ड की सारी बारीकियां...

डायरी काण्ड: 366 करोड़ की साजिश नाकाम, पढ़िए साजिश की विस्तृत गाथा
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रायपुर: पिछले कुछ दिनों से जिस शिक्षा विभाग की घोटाले वाली डायरी का जिक्र प्रदेश में छाया हुआ था उसके रचयिता स्वयं जिला शिक्षा अधि० गेंदराम चंद्राकर ही निकले। पूरा मामला मनगढंत और फर्जी निकला, पुलिस ने चंद्राकर को उसके साथी होम्योपैथी कॉलेज के सचिव संजय कुमार ठाकुर और टायपिस्ट कपिल कुमार देवदास के साथ धर दबोचा।

इसलिए रची साजिश

SSP प्रशांत अग्रवाल रायपुर पुलिस ने इन गिरफ्तारियों की जानकारी देते हुए कहा कि पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी चंद्राकर को रिटायरमेंट के बाद संविदा पर पोस्टिंग चाहिए थी। ये पोस्ट नहीं मिली तो इसने जिला शिक्षा अधिकारी ए.एन.बंजारा, संयुक्त संचालक के.सी.काबरा, तत्कालीन ओ.एस.डी। आर.एन. सिंह, ए.बी.ई.ओ. प्रदीप शर्मा और मंत्री के निज सचिव अजय सोनी के खिलाफ एक घोटाले की कहानी रच दी।

ऐसे रची साजिश

सबसे पहले गेंदराम ने एक डायरी में मंत्री प्रेम साय टेकाम का नाम लिखकर हजारों कर्मचारियों से पोस्टिंग, ट्रांसफर के नाम पर रुपए लेने की बात लिखी। कुल 366 करोड़ के लेन-देन का जिक्र किया। फिर एक शिकायत पत्र तैयार करके इसमें लोक शिक्षण संचालनालय के उप संचालक आशुतोष चावरे के नाम का इस्तेमाल किया। और ये शिकायती पत्र कई अफसरों, मीडिया हाउस और नेताओं को डाक के जरिए भेज दिए।

उप संचालक लोक शिक्षण आशुतोष चावरे के नाम का इस्तेमाल

पुलिस के मुताबिक जीआर चंद्राकर ने घपले की शिकायत का फर्जी लेटर असली लगे इसके लिए अपने साथी कपिल कुमार की मदद ली। कपिल को अफसर आशुतोष चावरे के नाम से शिकायत टाईप करने और उप संचालक लोक शिक्षण के नाम से सील (रबर) तैयार करने के लिए 2500 रुपए दिए। इसी के आधार पर फर्जी शिकायती पत्र तैयार करके वायरल किया गया। चंद्राकर ने अपने साथी संजय सिंह के साथ मिलकर कई लोगों का नाम लिखकर लेन-देन की बात एक डायरी में लिखी, बाद में इस डायरी को जलाकर नष्ट कर दिया। कुछ दस्तावेज संजय के पास ही थे, जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है। चूंकि खुद चंद्राकर शिक्षा विभाग में अफसर था, उनसे ट्रांसफर, पोस्टिंग में उन्हीं कर्मचारियों और अफसरों के नाम का इस्तेमाल किया जिनका असल में ट्रांसफर या पोस्टिंग की गई है, ताकि मामला असल लगे।

फर्जी लेटर की शिकायत के बाद खुली पोल

गेंदराम का रचा चक्रव्यूह उसकी मंशा के मुताबिक चल भी रहा था। वो पिछले कुछ दिनों में डाक के जरिए अपनी बनाई डायरी की डिटेल और फर्जी शिकायती पत्र मीडिया और नेताओं को भेजने में तीनों कामयाब भी रहा। मामला तब बिगड़ा जब उप संचालक लोक शिक्षण आशुतोष चावरे ने थाने में जाकर ये शिकायत कर दी कि उनके नाम से जो शिकायती खत इधर-इधर भेजे जा रहे हैं उससे उनका कोई लेना देना नहीं है और वो तमाम ख़त फ़र्जी हैं,, तो मामला खुला। पुलिस ने डाक में आई चिटि्ठयों को भेजने वालों का पता लगाया, CCTV कैमरों की जांच से पुलिस के हाथ कपिल तक पहुंचे और कपिल ने सारा राज उगलकर मास्टर माइंड गेंदलाल चंद्राकर और संजय सिंह को पकड़वा दिया।

48 घंटे प्रदेश की राजनीती में मचा रहा तूफ़ान

सीधे तौर पर शिक्षामंत्री का नाम इस काण्ड में जुड़ने के बाद विरोधी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को जम के घेरा, और आरोप लगाने का दौर चलने लगा। उधर मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिल शिक्षामंत्री ने भी अपनी गुहार लगाई और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए इसे भाजपा की साजिश बताया था। बहरहाल मामले में गिरफ्तारियां तो हो गई हैं, लेकिन गेंदराम से पुलिस अभी और पूछताछ कर के इस साजिश में और भी किसी के शामिल होने की संभावनाओ की पड़ताल करेगी।

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