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सदन में पुअर परफॉर्मेंस की गाज धरमलाल पर, बृजमोहन बने नेता प्रतिपक्ष

छत्तीसगढ़ के बजट सत्र का समय पूर्व समाप्त होना नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक को भारी पड़ा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी टीम ने बजट सत्र समाप्त होने के बाद असम में डेरा डाल दिया और वहां मौजूदा भाजपा सरकार की वापसी को कठिन बना दिया है।

सदन में पुअर परफॉर्मेंस की गाज धरमलाल पर, बृजमोहन बने नेता प्रतिपक्ष
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रायपुर (होली समाचार). छत्तीसगढ़ के बजट सत्र का समय पूर्व समाप्त होना नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक को भारी पड़ा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी टीम ने बजट सत्र समाप्त होने के बाद असम में डेरा डाल दिया और वहां मौजूदा भाजपा सरकार की वापसी को कठिन बना दिया है।

भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व इससे बेहद खफा है। उसका असर छत्तीसगढ़ की सियासत पर पड़ा और नेता प्रतिपक्ष बदल दिए गए। धरमलाल कौशिक को हटाकर तेज तर्रार नेता बृजमोहन अग्रवाल को छत्तीसगढ़ का नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया गया है।

उल्लेखनीय है कि 22 फरवरी से शुरू होकर 9 मार्च को समाप्त हुए विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विपक्ष के रूप में भाजपा की विफलता का मामला प्रदेश प्रभारी पुरंदेश्वरी के पास पंहुचा था। बताया गया है कि प्रदेश प्रभारी को भेजी गई रिपोर्ट में यह उल्लेख था कि नेता प्रतिपक्ष इस सत्र के दौरान प्रतिपक्ष का दायित्व सही तरीके से नहीं निभा पाए। ऐेेसे में सदन के भीतर भाजपा पूरी तरह निरीह नजर आ रही थी। कई विधायकों ने भी यह शिकायत की थी कि उनके क्षेत्र के गंभीर सवाल भी सदन में शामिल नहीं हो पाए। उन पर चर्चा नहीं हो पाई। पुरेंदश्वरी ने इसकी जांच अपने स्तर पर भी कराई। तथ्य सच पाए जाने पर उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व को रिपोर्ट सौंपी और उसके बाद धरमलाल कौशिक को हटाने का फैसला किया गया।

बृजमोहन के साथ हैं तेजतर्रार विधायक

भाजपा सूत्रों के अनुसार विपक्ष की सियासत की बात करें, तो 14 सदस्यों वाले भाजपा विधायक दल में सबसे अधिक प्रभावी विधायकों का दल बृजमोहन के साथ है। इनमें नारायण सिंह चंदेल, शिवरतन शर्मा, अजय चंद्राकर जैसे नेता शामिल हैं। इन नेताओं के साथ मिलकर श्री अग्रवाल नेता प्रतिपक्ष न होते हुए भी विधायक दल के नेता के समान भूमिका में थे। अब माना जा रहा है कि उनके नेता प्रतिपक्ष बन जाने के साथ ही सदन में विपक्ष के रूप में भाजपा तेज तर्रार व दमदार साबित हो सकती है।

भूपेश के दांव को भाजपा ने लिया गंभीरता से

राज्य विधानसभा का बजट सत्र विपक्ष की कमजोर रणनीति के कारण समय से पहले समाप्त हो गया था। मुख्यमंत्री के रूप में भूपेश बघेल ने इस स्थिति का भरपूर फायदा उठाया। वे असम विधानसभा चुनाव के लिए सीनियर आर्ब्जवर के रूप में पहुंचे। वहां उन्होंने अपनी आक्रामक कार्यशैली के दम पर कमजोर पड़ी असम कांग्रेस में जान फूंकने का काम कर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मुकाबले भाजपा को मैदान पर ला खड़ा कर दिया। भाजपा आलाकमान ने भी इसे अत्यंत गंभीरता से लिया है। श्री बघेल की इस सफलता को छत्तीसगढ़ विधानसभा में भाजपा विधायक दल की असफलता से भी जोड़कर देखा गया।

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