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कोरोना से मृत शासकीय कर्मचारियों के परिजनों को केंद्र से नहीं मिला आर्थिक सहयोग

छत्तीसगढ़ में कोरोना महामारी से एक हजार से अधिक शासकीय कर्मचारियों की असमय मौत हुई थी। मृतकों के परिजनों को मुआवजे के रूप में कोई भी सहायता एवं आर्थिक मदद नहीं मिली। कोरोना के पहले दौर में स्वास्थ्य विभाग के ऐसे कर्मचारी जिनकी मौत कोरोना से हुई थी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण बीमा योजना के तहत 8 परिवारों को मदद दी गई थी। दूसरी लहर में केंद्र से भी कोई मदद नहीं मिली।

कोरोना से मृत शासकीय कर्मचारियों के परिजनों को केंद्र से नहीं मिला आर्थिक सहयोग
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कर्मचारी की कोरोना से मौत (प्रतीकात्मक तस्वीर)

छत्तीसगढ़ में कोरोना महामारी से एक हजार से अधिक शासकीय कर्मचारियों की असमय मौत हुई थी। मृतकों के परिजनों को मुआवजे के रूप में कोई भी सहायता एवं आर्थिक मदद नहीं मिली। कोरोना के पहले दौर में स्वास्थ्य विभाग के ऐसे कर्मचारी जिनकी मौत कोरोना से हुई थी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण बीमा योजना के तहत 8 परिवारों को मदद दी गई थी।

दूसरी लहर में केंद्र से भी कोई मदद नहीं मिली। राज्य सरकार ने कोरोना के दौरान मृत शासकीय कर्मियों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति देकर मदद की है। सभी विभागों में इसके तहत 10 प्रतिशत की सिलिंग में छूट देकर लोगों को नियुक्ति दी गई है।

कोरोना महामारी को लेकर आम लोगों के अलावा कोरोना ड्यूटी में लगे स्वास्थ्य, स्थानीय निकाय और प्रशासन के राजस्व और अन्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की मौत हुई थी। कोरोना संक्रमण के दौर में इन लोगों को सहायता और सुविधा नहीं मिलने की शिकायतें भी रहीं। राज्य सरकार से कर्मचारी संघ ने इस संबंध में मांग की थी पर पूरी नहीं हुई।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में कोविड-19 के इलाज के लिए पदस्थ विभाग के 5 चिकित्सक और 19 स्वास्थ्य कर्मियों की मौत हाे गई थी। इन स्वास्थ्य कर्मियों को प्रधानमंत्री मंत्री गरीब कल्याण बीमा योजना के तहत मिलने वाली बीमा की राशि केवल 8 स्वास्थ्य कर्मियों को ही मिल पाई है। बीमा कंपनी के पास 12 प्रकरण लंबित हैं वहीं कंपनी ने चार प्रकरणों को निरस्त कर दिया है।

ऐसे प्रकरणों में नियम शिथिल करें

कोरोना के दौरान पति-पत्नी दोनों शासकीय कर्मी हैं, उनमें से एक की मौत होने पर उनके परिवार के लोगों को अनुकंपा नियुक्ति देने का प्रावधान नहीं है। ऐसे प्रदेश में कई प्रकरण हैं। उनके परिजनों की मांग है कि उन्हें भी अनुकंपा नियुक्ति का लाभ मिलना चाहिए। कर्मचारी संघों ने इसे लेकर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव काे पत्र लिखकर नियम में छूट देकर ऐसे परिवार के लोगों को भी लाभान्वित करने की मांग की है।

कांग्रेस का डोर-टू-डोर सर्वे

इधर कांग्रेस ने कोरोना से प्रभावित लोगों की सहायता करने आउटरीच अभियान शुरू किया है। पीसीसी आउटरीच योजना के माध्यम से अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। इसके लिए प्रतिदिन हर ब्लॉक के 20 घरों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ऐसे परिवारों से मिलना है जो कि कोरोना से या तो ठीक हो चुके हैं या फिर कोरोना से किसी सदस्य की परिवार में मौत हो चुकी है।

योजना के तहत हर ब्लॉक में डोर-टू-डोर सर्वे कर कोरोना पीड़िताें की मदद करना है। इसके साथ ही ऐसे परिवार जिन्होंने दो या दो से अधिक सदस्य महामारी के दौर में खोए हैं। पीसीसी से इसके लिए बकायदा आदेश भी जारी हुए थे। वहीं सर्वे की रिपोर्ट 10 जुलाई तक पीसीसी को सौंपने के लिए कहा गया था।

शहर, जिला और ग्रामीण का सर्वे जारी

कांग्रेस के सर्वे अभियान के तहत प्रत्येक ब्लॉक कांग्रेस को कोरोना प्रभावित परिवार से मिलकर एक फार्मेट में पांच जानकारी भरनी थी। इसमें कोरोना से किसी की मौत, लॉकडाउन के दाैरान परिवार के किसी की नौकरी गई अभी उन्हें किस तरह की सहायता है। शहर जिला अध्यक्ष गिरीश दुबे ने बताया कि शहर के सभी ब्लॉक में सर्वे चल रहा है।

यहां पर पांच हजार से अधिक परिवारों से मिल चुके हैं। इनमें कोरोना से मृत करीब 600 लोगों की भी जानकारी आई है। जिला रायपुर के ग्रामीण अध्यक्ष उधोराम वर्मा ने बताया कि 5 हजार परिवारों से ब्लॉक में मिल चुके हैं। इनमें काेरोना से मृत 377 लोग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पीसीसी में इनके फार्म भरकर जमा करा दिए हैं।



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