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पढ़ाई के लिए 20-25 किमी की साइकिल यात्रा, शिक्षा ग्रहण करना यहाँ तपस्या से कम नहीं

छत्तीसगढ़ राज्य का एक ऐसा इलाका, जहां स्कूल जाने के लिए बच्चों को उफनते नदी, नाले और जंगली जानवरों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए साइकिल से 20 से 25 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि कई बार स्कूल जाते और वापस लौटते वक्त वन्य प्राणी इन पर हमला कर चुके हैं।

पढ़ाई के लिए 20-25 किमी की साइकिल यात्रा, शिक्षा ग्रहण करना यहाँ तपस्या से कम नहीं
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मैनपुर. छत्तीसगढ़ राज्य का एक ऐसा इलाका, जहां स्कूल जाने के लिए बच्चों को उफनते नदी, नाले और जंगली जानवरों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए साइकिल से 20 से 25 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि कई बार स्कूल जाते और वापस लौटते वक्त वन्य प्राणी इन पर हमला कर चुके हैं।

गरियाबंद जिले के अंतर्गत आने वाले मैनपुर विकासखण्ड क्षेत्र में 118 शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय है और मात्र 17 हाईस्कूल है। कई क्षेत्रों में बच्चे हाई स्कूल तक पढ़ाई करने जा रहे हैं, लेकिन उन्हें 20 से 25 किलोमीटर सायकल से प्रतिदिन आना जाना करना पड़ रहा है। और तो और यहां आश्रम छात्रावास भी नहीं है। दूरस्थ वनांचल क्षेत्र गरीबा, महुआनाला, कमारपारा, भाठापानी, गाजीमुडा, भद्रीपारा, कुचेंगा, तेन्दुछापर, भीमाटीकरा, भूतबेड़ा क्षेत्र में लगभग 25 किलोमीटर तक पांच मिडिल स्कूल है, लेकिन एक भी हाई स्कूल नहीं है।

आठवीं के बाद छोड़ देते हैं पढ़ाई

इस क्षेत्र में प्रतिवर्ष मिडिल स्कूल से आठवीं के बाद सैकडों की संख्या में छात्र उत्तीर्ण होकर 09 कक्षा में पहुचते हैं, लेकिन उसमें अधिकांश बच्चे आठवी के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। छात्र व पालक बताते हैं कि इस क्षेत्र के लगभग दो दर्जन ग्रामों में हाई स्कूल नहीं है। हाई स्कूल यहां से लगभग 25 किलोमीटर दूर ग्राम शोभा में है। महज 10 से 12 बच्चे ही नवमीं की कक्षा में दाखिला ले पाते है। घने जंगल, नदी, नालों को पार कर बच्चे सुबह आठ बजे तैयार होकर घर से निकलते हैं। तब कहीं जाकर स्कूल साइकिल के माध्यम से 10 बजे पहुंचते हैं। स्कूल से छुट्टी होने के बाद कई बार बारिश, आंधी तूफान, मौसम खराब होने से बच्चों को घर पहुंचने में रात हो जाती है, इसके बावजूद भी लगभग 10 से 12 बच्चे प्रतिदिन शोभा तक पढ़ाई करने पहुंच रहे हैं।

कई बार जंगली जानवरों ने बच्चों को किया जख्मी

शाम को चार बजे स्कूल से छुट्टी होने के बाद बच्चे घने जंगल को पार कर उन्हें देर शाम तक घर पहुंचते हैं, इसके चलते बच्चों को पालक अज्ञात भय से भयभीत रहते हैं। क्षेत्र के वरिष्ठ मुखिया दलसूराम नेताम, ग्राम भूतबेडा के सरपंच अजय कुमार नेताम, कुचेंगा के सरपंच कृष्णा बाई मरकाम ने बताया कि हम तो बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन सरकार हमारी बात नहीं सुन रही। कम से कम बच्चों की खातिर भूतबेड़ा गरीबा क्षेत्र में हाईस्कूल खोल दें। बिमलेश, राजेश, रविना, पूजा, अर्चना, ने बताया कि वे ग्राम भूतबेडा, तथा गरीबा से सायकल के माध्यम से प्रतिदिन आते हैं। उन्हें सुबह आठ बजे निकलना पड़ता है। घर पहुंचते कभी कभी अंधेरा रात 07 बज जाते हैं, घने जंगल होने के कारण जंगली जीव जन्तु का डर बना रहता है, नदी नालों में बाढ भी आ जाती है, छात्रों ने बताया कि शोभा में छात्रावास भी नहीं है। यदि छात्रावास रहता तो बच्चों को पढ़ाई करने में आसानी होती।

शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजा जा चुका

गरीबा, भूतबेड़ा सहित तौरेंगा, साहेबिनकछार, दबनई में हाई स्कूल खोलने के लिए पूर्व में कई बार शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक हाई स्कूल नहीं खुला है, श्री सिंह ने बताया कि भुतबेडा, गरीबा क्षेत्र से छात्र 15 से 20 किलोमीटर सायकल में हाई स्कूल की पढाई करने शोभा तक आते है।

- आरआर सिंह, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी मैनपुर

मांगपत्र सौंपा गया

भूतबेड़ा क्षेत्र में हाई स्कूल खोलने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को मांगपत्र सौपे हैं, उन्होंने जल्द ही भूतबेड़ा में हाई स्कूल की स्वीकृति देने की बात कही है।

- संजय नेताम, जिला पंचायत उपाध्यक्ष

राज्य सरकार गंभीरता से ध्यान नहीं दे रही

राजापडाव गौरगांव क्षेत्र के गरीबा, भूतबेड़ा में हाई स्कूल खोलने उन्होंने शिक्षा मंत्री को पत्र लिख चुके है, राज्य सरकार इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रही है।

- डमरूधर पुजारी, विधायक बिन्द्रानवागढ़

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