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छत्तीसगढ़ में कोरोना अनकंट्रोल, एम्स में आईसीयू फुल, अम्बेडकर में वेंटिलेटर के मरीज बढ़े

कोरोना ने एक बार फिर प्रदेश में फिर पांव पसारने शुरू कर दिए हैं, जिससे लोगों में संक्रमण को लेकर दहशत बढ़ रही है। पिछले छह दिनों से कोरोना संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी के साथ ही लगभग खाली हो चुके कोविड सेंटरों में फिर मरीज पहुंचने लगे हैं। एम्स में तो आईसीयू फुल है, वहीं आंबेडकर अस्पताल के आईसीयू के साथ वेंटिलेटर वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। शासन-प्रशासन की छूट और लोगों द्वारा की जाने वाली लापरवाही की वजह से महाराष्ट्र, पंजाब, मध्यप्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ में भी कोरोना की वापसी होने का अनुमान है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

रायपुर. कोरोना ने एक बार फिर प्रदेश में फिर पांव पसारने शुरू कर दिए हैं, जिससे लोगों में संक्रमण को लेकर दहशत बढ़ रही है। पिछले छह दिनों से कोरोना संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी के साथ ही लगभग खाली हो चुके कोविड सेंटरों में फिर मरीज पहुंचने लगे हैं। एम्स में तो आईसीयू फुल है, वहीं आंबेडकर अस्पताल के आईसीयू के साथ वेंटिलेटर वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। शासन-प्रशासन की छूट और लोगों द्वारा की जाने वाली लापरवाही की वजह से महाराष्ट्र, पंजाब, मध्यप्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ में भी कोरोना की वापसी होने का अनुमान है।

मार्च के पहले सप्ताह तक यही माना जा रहा था कि पिछले एक साल से लोगों में भय का कारण बनने वाला कोरोना जल्द ही समाप्त हो जाएगा, मगर सोमवार से जिस तरह कोविड के वायरस ने अपना असर दिखाना शुरू किया, उससे लगता है कि छत्तीसगढ़ में कोरोना ने यू-टर्न लिया है। कुछ दिनों पहले दो हजार से नीचे जा चुके एक्टिव केस अब बढ़कर 3500 के पार हो चुके हैं और संक्रमण बढ़ने की वजह से अस्पतालों में एक बार फिर कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ चुकी है। पांच दिन पहले तक एम्स को कोविड आईसोलेशन वार्ड में संक्रमितों की संख्या 30 से 40 के बीच थी, जो अब बढ़कर सौ के करीब पहुंचने वाली है। यहां के आईसीयू के बेड भी फुल हो गए हैं। आंबेडकर अस्पताल के आईसीयू में डेढ़ दर्जन से ज्यादा मरीज हैं और यहां वेंटिलेटर पर सात मरीज भर्ती हैं। एकमात्र कोविड रिलीफ सेंटर लालपुर में मरीजों की संख्या जीरो से बढ़कर 20 तक पहुंच गई है। नियम के पालन के लिए सुस्ती बरतने वाला शासन-प्रशासन फिर सख्ती दिखा रहा है, मगर रोकथाम के नियमों का पालन भी परिस्थिति को देखकर कराया जा रहा है।

सबके लिए वैक्सीन जरूरी

वर्तमान में वैक्सीन हेल्थ वर्कर, फ्रंटलाइन वर्कर, बुजुर्गों और को-मार्बिडिटी से ग्रसित लोगों तक पहुंची है, मगर इस वायरस की चेन को खत्म करने के लिए वैक्सीन सबके लिए जरूरी है। रोजगार के लिए बाहर निकलने वाले मेहनतकश मजदूर, सेल्समैन, नौकरीपेशा, मीडिया से जुड़े लोग, बिजनेसमैन के साथ सभी वर्ग की एक तिहाई से ज्यादा आबादी को वैक्सीन की दोनों खुराक मिलने के बाद ही हर्ड इम्युनिटी की संभावना बन पाएगी। एम्स के डायरेक्टर नितिन एम. नागरकर का कहना है, वैक्सीन सबके लिए जरूरी है और एक सिस्टम के तहत पहले इसे उन्हें उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसे ज्यादा आवश्यकता है। हास्पिटल बोर्ड के अध्यक्ष डा. राकेश गुप्ता के मुताबिक वैक्सीन के साथ खुद की सुरक्षा पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है।

लापरवाही से बढ़ रहे केस

प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े हैं, मगर माना जा रहा है कि वायरस से स्वरूप में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है। पॉजिटिव केस बढ़ने की वजह केवल लापरवाही को माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक कोई भी वायरस वातावरण के अनुसार अपना स्वरूप बदलता है और इसकी जांच चलती रहती है।

ऐसे हुई लापरवाही

क्रिकेट स्टेडियम में हजारों की भीड़, ज्यादातर बिना मास्क

केस कम होने के बाद मास्क, सेनेटाइजर, सोशल डिस्टेंस ताक पर

भीड़भाड़ वाले आयोजनों पर भी सुरक्षा उपाय का ध्यान नहीं

जांच कराने में लापरवाही, परिवार के सदस्य हुए संक्रमित

चौक-चौराहों पर मास्क की जांच, जुर्माने पर ध्यान

बड़े आयोजनों, धरना-प्रदर्शन में नियमों की उड़ीं धज्जियां, रोकथाम के उपाय नहीं

जांच के आंकड़े बढ़ाने पर जोर, कांटेक्ट ट्रेसिंग का सिस्टम बंद

सुरक्षा उपाय जरूरी

वर्तमान में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं और इसकी रोकथाम के लिए सावधानी जरूरी है। कामकाज को बंद नहीं किया जा सकता, इसलिए लोगों को खुद पर प्रतिबंध लगाना होगा। जब तक जरूरी न हो, भीड़भाड़ वाले इलाकों में बिना सुरक्षा उपाय के जाने से बचना चाहिए।

- डा. नितिन एम. नागरकर, निदेशक एम्स

सावधानी ही उपाय

कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, जिसकी वजह से अस्पतालों में भी संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। इससे बचाव के लिए खुद की सुरक्षा के अलावा कोई दूसरा विकल्प मौजूद नहीं है। लोगों को अभी भी मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंस को अपनी आदत में शामिल करना जरूरी है।

- डा. ओपी सुंदरानी, विशेषज्ञ क्रिटिकल केयर, आंबेडकर अस्पताल

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